जो लोग मुझे डांटते हैं, उन्हें घोड़े पर हर्गिज नहीं बैठाऊंगा

: चार बातों को बेसब्री से इंतजार : जब मैं छोटा था तो मैंने योजना बनाई कि एक दिन जब मैं बड़ा हो जाऊंगा तो एक घोड़ा खरीदूंगा। उस पर बैठकर मैं पूरी दुनिया घूमूंगा। इस बात का मैं पूरा ध्यान रखूंगा कि जो लोग मुझे डांटते हैं, उन्हें घोड़े पर हर्गिज नहीं बैठाऊंगा। जब कभी मैं दूर देश से लौटूंगा तो मां के लिए गुड़ से बनी मिठाई, बतासे और चूरमा लेकर आऊंगा। जब मैं इस बात की चर्चा मेरे परिजनों से करता तो शायद उन्हें विश्व भ्रमण की मेरी इस योजना पर संदेह होता और वे हंसते। लेकिन मुझे पूरा भरोसा था कि एक दिन मेरे पास बहुत सारे पैसे हो जाएंगे और मैं उनसे एक सुंदर घोड़ा खरीद लूंगा। इसके लिए मैंने गुल्लक बनाई और पैसे इकट्ठे करने लगा।

कई बार मैं सोचता हूं कि अगर सच में एक दिन मेरे पास बहुत सारे पैसे होंगे तो मैं क्या करूंगा? मैंने डायरी में इसकी योजना बनाई है, क्योंकि मैं नहीं चाहता कि बाद में सोच-विचार करने पर वक्त खराब किया जाए। अगर ऐसी स्थिति बनी तो मैं इन चार इच्छाओं को पूरी करना चाहूंगा जिनका मुझे बेसब्री से इंतजार है।

– सबसे पहले मैं लद्दाख जाना चाहूंगा। मैं अपनी आंखों से देखना चाहता हूं कि वहां की पहाड़िया, बौद्ध मंदिर, रंगीन टोपियां और प्रार्थना चक्र सच में इतने खूबसूरत हैं या ये सिर्फ टीवी चैनल पर ही ऐसे दिखाई देते हैं। मैंने डिस्कवरी पर लद्दाख भ्रमण का एक प्रोग्राम देखा जो मुझे बेहद पसंद आया। उसके बाद से ही लद्दाख मेरी सूची में सबसे ऊपर है। अगर संभव हुआ तो वहां से मैं एक याक भी लेकर आऊंगा!

– मेरी इच्छाओं की सूची में दूसरे नंबर पर ल्हासा (तिब्बत) है। खासतौर से ल्हासा का पोटाला महल। यह एक प्राचीन इमारत है जिससे विश्व के लिए शांति के संदेश को महसूस किया जा सकता है। भारत की तरह ही तिब्बत की संस्कृति भी बहुत प्राचीन है। मैंने इंटरनेट पर इससे संबंधित बहुत तस्वीरें देखी हैं। वे सचमुच बहुत सुंदर हैं। इसके अलावा मैंने चीन की दीवार के बारे में पढ़ा था कि यह अंतरिक्ष से भी दिखाई देती है। यह अद्भुत है। किसी समय ह्वेनसांग और दूसरे महान विद्वानों को ज्ञान प्राप्ति की प्यास भारत ले आई थी। भारत की तरह ही चीन व तिब्बत का परम्परागत चिकित्सा विज्ञान बहुत प्राचीन है। मैंने सीआरआई- हिंदी की वेबसाइट से तिब्बती चिकित्सा विज्ञान के बारे में पढ़ा। मुझे यह जानकर बहुत आश्चर्य हुआ कि यह नेचरोपैथी (जिसका मैंने कोर्स किया है) से अद्भुत समानता रखती है।

– ल्हासा से भारत लौटने के बाद मैं भारत व दुनिया का एक नक्शा खरीदूंगा, क्योंकि मेरे पास जो नक्शा है वह काफी पुराना हो चुका है। मैं भारत भ्रमण की योजना बनाऊंगा और नक्शे के आधार पर रास्ता खोजूंगा। साथ ही मैं मेरे लघु उद्योग (जिसके तहत अभी मैं सिर्फ प्राकृतिक केश तेल व शैंपू ही बना रहा हूं) पर ध्यान केंद्रित करना चाहूंगा। मेरी कोशिश रहेगी कि इंटरनेट के साथ ही अन्य तरीकों से मैं और ज्यादा लोगों तक लघु उद्योग के उत्पाद पहुंचा सकूं। मुझे एक लैपटॉप, एक छोटी गाड़ी और इंटरनेट के कनेक्शन की भी जरूरत होगी। फिर मैं भारत भ्रमण के लिए निकल जाऊंगा, लेकिन यह भ्रमण परम्परागत पिकनिक या मौज-मस्ती की तरह नहीं होगा। मैं भारत के गांवों की उन स्कूलों तक जाना चाहता हूं जहां बच्चों को कम्प्यूटर और इंटरनेट की बहुत कम या बिल्कुल भी जानकारी नहीं है। शुरुआत में मैं किसी एक गांव का चयन करूंगा और वहां के बच्चों को कम्प्यूटर व इंटरनेट का उपयोग करना सिखाऊंगा। साथ ही मेरी लाइब्रेरी ‘गांव का गुरुकुल’ से जोड़ूगा। इस यात्रा के दौरान मैं विभिन्न स्कूलों के शिक्षकों से मिलूंगा और लाइब्रेरी के ब्लॉग से एक न्यूजलेटर व एक टीवी चैनल शुरू करूंगा।

मुझे पूरा भरोसा है कि बेहद आसान भाषा में मैं बच्चों को एक माह में कम्प्यूटर व इंटरनेट का उपयोग करने में काफी पारंगत बना दूंगा। इसके बाद वे खुद ही अपनी प्रगति के रास्ते खोज लेंगे। मैं उन्हें तकनीकी का दुरुपयोग न करने की शपथ दिलाऊंगा। घर लौटते वक्त मैं मां के लिए साड़ी लेकर आऊंगा।  वहीं मैं ‘गांव का गुरुकुल’ को तकनीकी रूप से विकसित करूंगा ताकि यह हर स्कूल के विद्यार्थी तक पहुंच सके और उनके लिए उपयोगी बन सके। इसके अलावा मैं मेरे लघु उद्योग से प्राप्त आय से एक कोष बनाना चाहूंगा ताकि इसका उपयोग ग्रामीण भारत की स्कूलों में कम्प्यूटर शिक्षा का प्रसार करने पर किया जा सके।

– अगर ऊपर लिखी बातें सच हुईं तो मैं लाइब्रेरी का अवलोकन कराने के लिए भारत के राष्ट्रपति जी को बुलाना चाहूंगा। हालांकि यह योजना अभी तक सिर्फ एक सपना ही है लेकिन मुझे उम्मीद है कि एक दिन यह जरूर साकार होगी, क्योंकि मैंने मेरे जीवन में उन योजनाओं को कई बार साकार होते देखा है जिनकी कभी उम्मीद की थी। इसके लिए अभी मैं गुल्लक में पैसे जमा कर रहा हूं और हफ्ते में एक बार गिन लेता हूं। मेरे पास काफी सिक्के भी जमा हो गए हैं और इंटरनेट से प्राकृतिक केश तेल की मांग बढ़ती जा रही है।  मैं इस मामले में खुशनसीब हूं कि मैंने कभी शराब, महंगे कपड़े और फिजूलखर्ची वाले शौक के सपने नहीं पाले। हां, घोड़ा खरीदने वाली योजना फिलहाल रद्द कर दी है। अभी उसकी कोई जरूरत नहीं है।

राजीव शर्मा

संचालक, गांव का गुरुकुल

ganvkagurukul.blogspot.com

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