ज्योतिषी जी के अखबार में छपती है चोरी की खबर

वाराणसी। महोदय शहर के मानिंद ज्योतिषी है। राष्ट्रीय स्तर से लेकर अंतराष्ट्रीय स्तर की भविष्यवाणियां करते रहते हैं। कितनी बारिश होगी, कैसी ठंड पड़ेगी से लेकर कौन सी फिल्म हिट होगी, सब कुछ इनके भविष्यवाणी के दायरे में है। इनका विज्ञापन आपकी समस्याओं के हल की गांरटी देता है। ज्योतिष में हाथ आजमाते-आजमाते इन दिनों 'भारत एकता टाइम्स' नाम से अखबार निकाल निकाल रहे हैं। लेकिन हाथ देखकर भाग्य बांचने का दावा करने वाले महोदय का अखबार चोरी की खबर लगाने लगा और महोदय को पता ही नहीं चला। 
 
हुआ कुछ यूं कि वाराणसी से ही प्रकाशित होने वाले सांध्य दैनिक अखबार 'गांडीव' ने शहर में हुए डिप्टी जेलर हत्याकांड को लेकर अपने अखबार में 26 नवम्बर को 'कितने हाथों से गुजरती है सुपारी, मारने वाला कौन' शीर्षक से समाचार का प्रकाशन किया। इसी समाचार को 'भारत एकता टाइम्स' ने अपने 5 दिसम्बर के अंक में 'अपराधियों के नये नेटवर्क के आगे पुलिस बेबस' शीर्षक के साथ प्रकाशित कर दिया। चालाकी देखिए खबर को प्रकाशित करने वाले ने इन्ट्रो में चार लाइन अपनी तरफ से चस्पा कर पूरी खबर को छाप मारा। 
 
चोरी की इस खबर को छापते हुए शर्म तक नहीं आयी कि इस हरकत को कम से कम पत्रकारिता तो नहीं कहते। अखबार का स्लोगन है- "अखबार नहीं आंदोलन हैं’’। भविष्यवेत्ता महोदय चोरी की खबरों से आंदोलन नहीं चलता। हां अखबार के नाम पर भौकालबाजी जरूर चलती है, वो भी कुछ दिनों। किसी ने सच ही कहा है- "आज तो सच्चाई से कागज का घर भी छिन गया, ऐसे-वैसे लोग अखबारों के मालिक हो गये।" इसे कहते है चिराग तले अंधेरा यानि दुनियां पर नजर पर खुद के अखबार में चोरी की खबर।
 
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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