झांसी में पत्रकार को पुलिस ने हवालात में बंद कर बुरी तरह पीटा, अस्पताल में भर्ती

सच का सामना कराने की आदत के कारण झाँसी में एक पत्रकार को पुलिस की बर्बरता का शिकार होना पड़ा। एक पत्रकार को झाँसी के नवाबाद थाना इलाके के मंडी चौकी में बंद कर दरोगा ने घंटो पीटा। लाठी डंडों और पिस्टल की बटों से पत्रकार को इतना पीटा कि पुलिस के चंगुल से मुक्त होने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस पूरी बर्बरता का कारण थी वह खबर, जिसमें लूट की शिकार एक मरणासन्न महिला की खबर इस पत्रकार ने दरोगा के मना करने के बावजूद चला दी थी।

घटना उस समय घटी जब पत्रकार कुलदीप अवस्थी का एक मित्र शहर से अपने घर बरुआसागर ओर जा रहा था। रास्ते में बस स्टैण्ड पर तैनात कुछ सिपाहियों ने रुपया वसूलने के मकसद से वाहन रोक लिया। जब काफी प्रयास के बाद वाहन नहीं छूटा तो वाहन में सवार जीतेन्द्र बिरथरे ने कुलदीप को मामले की जानकारी दी। कुलदीप अपने मित्र की सहायता करने के

अस्पताल में भर्ती पीड़ित पत्रकार
अस्पताल में भर्ती पीड़ित पत्रकार
मकसद से मंडी चौराहे पर पहुंचे। यहाँ सिपाहियो से उसकी बात चल ही रही थी कि इसी बीच चौकी प्रभारी सुनीत सिंह वहाँ आ पंहुचा। कुलदीप को देखते ही उसने अपने सिपाहियों से मामले के जानकारी ली और कुलदीप को धमकी देते हुए कहा कि गाड़ी तो बाद में छूटेगी पहले मेरे खिलाफ खबर दिखाने का अंजाम तो देख लो। इसके बाद दरोगा ने जीतेन्द्र और कुलदीप को चौकी में बंद कर कार में सवार महिलाओं को गाली देकर भगा दिया। चौकी में बंद कर दरोगा सुनीत ने पुलिसिया जुल्म की को तस्वीर पेश की उसे सुनने के बाद रुह तक काँप उठेगी।

दारोगा ने कुलदीप और जीतेन्द्र को लाठी डंडों से पीटना शुरू किया। बीच बीच में कुलदीप से यह भी कहता रहा कि अब और दिखाना मेरे खिलाफ खबर। रात दस बजे से शुरू हुयी यह यातना देर रात तक चलती रही। किसी तरह यह बात कुछ पत्रकारों को मालूम हुयी तो उन्होंने पुलिस के आला अधिकारियो को इसकी जानकारी दी और बंधक पत्रकार को मुक्त कराने की कोशिश की। हालांकि पुलिस अधिकारियों के जवाब से यह साफ़ हो गया कि सब कुछ उनकी संज्ञान में है और पत्रकारों को सबक सीखने के लिए कुलदीप पर यह जुल्म ढाया गया। यह पूरी घटना पच्चीस अक्टूबर की रात की है।

डीआईजी को ज्ञापन देते पत्रकार

देर रात कुलदीप को कुछ पत्रकारों की मदद से मुक्त कराया जा सका। इसके बाद सुबह पत्रकारों ने झाँसी के जिलाधिकारी और एसएसपी से मिलकर दारोगा सुनीत पर मुकदमा दर्ज़ करने की मांग की। इस मामले में जिलाधिकारी तनवीर जफ़र अली ने मैजिस्ट्रेटी जांच के आदेश और जांच रिपोर्ट के आधार पर कारर्वाई का सरकारी आश्वासन पत्रकारों को दिया। एसएसपी इस पूरे मामले में दारोगा की तरफदारी करते दिखे। उसे निलम्बित करने और उस पर मुकदमा दर्ज़ करने में उनकी उदासीनता के बाद पत्रकारों ने डीआईजी सूर्यनाथ सिंह और कमिश्नर बीवी सिंह से मुलाकार कर आंदोलन की चेतावनी दी। पत्रकारों ने डीआईजी को बताया कि दारोगा सुनीत बलात्कार के एक मामले में जेल के हवा खा चुका है। इसके अलावा इस पर अपने ही विभाग के एक सिपाही को पीटने का भी मुकदमा दर्ज़ किया जा चुका है।

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