कुशीनगर (यूपी) में झूठे वादों, आश्र्वासनों से आजिज मतदाताओं ने जनसंपर्क करने आये बसपा के आधा दर्जन कार्यकर्ताओं को हो हल्ला करके गांव से बाहर से निकलने पर मजबूर कर दिया। सूचना पाकर स्थानीय पुलिस भी पहुंच गयी। पडरौना विधानसभा के गांव मिठहा माफी में रविवार की शाम जनसंपर्क में बसपा कार्यकर्ता आये हुये थे, जिन्हें देखते ही गांव के बच्चों ने हो हल्ला शुरू कर दिया। उनका कहना था कि बिजली नहीं तो वोट नहीं।
ग्रामीणों की मानें तो पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान बसपा से चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी द्वारा इस गांव को 15 दिनों के अन्दर बिजली देने की बात कही गयी थी। आज इस गांव के मतदाताओं ने वादा खिलाफी से आजिज होकर चुनाव बहिष्कार का निर्णय किया है। इस घटना की सूचना पाकर नेबुआ नौरंगिया की पुलिस भी पहुंच गयी। ग्रामवासी ओम प्रकाश, आयशा खातून, अख्तर अंसारी, रसीद, चौथी प्रसाद, द्वारिका प्रसाद, शबीबुन नेसा, अमीना रहमान आदि का कहना है कि वादाखिलाफी करने वाले व चुनाव के दौरान ही नजर आने वाले हर प्रत्याशी का हम विरोध करेंगे।
उधर संत कबीर नगर के विकास खण्ड बेलहर कला के पिपरपाती गांव के ग्रामीणों ने प्रदर्शन करके विधान सभा चुनाव में मतदान न करने का निर्णय लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली और सड़क नहीं तो वोट नहीं। यह दर्द है ग्राम पंचायत बूढ़ी बेलहर के उन वंचित गांवों का जो आधुनिकता और विकास के इस युग में भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। उक्त गांव निवासी रघुराई, सुरेन्द्र, राजाराम, रामराज, प्रेमसागर, राजेश, रामआसरे, अलगू, दिवाकर, घनश्याम, राजकुमार, किसुन, राममूरत, परशुराम तथा निर्मल सहित अन्य ग्रामीणों ने आक्रोशित लहजे में प्रदर्शन करते हुए विधान सभा चुनाव में मतदान के बहिष्कार का एलान किया।
ग्रामीणों का कहना था कि आजादी के छह दशक से अधिक समय बीत गया लेकिन यहां के लोग बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं। जनप्रतिनिधियों ने हर चुनाव के समय यहां के लोगों को सिर्फ आश्वासन ही दिया लेकिन विकास के नाम पर कभी एक धेला भी खर्च नहीं किया। सांथा विकास खण्ड से काटकर बेलहर विकास खण्ड में सम्मिलित किए गए इस गांव की जनसंख्या लगभग पांच सौ होगी जिसमें सर्वाधिक संख्या दलितों की है। हरिजन, केवट और लोध बिरादरी के इस गांव में मात्र दो इण्डिया मार्का हैण्डपंप लगाए गए हैं जिसमें एक खराब है। गांव का जोड़ने लिए कच्चा रास्ता है जो बरसात में चलने लायक नहीं रहता है। बाढ़ में यह गांव तीन तरफ से पानी से घिर जाता है। गांव में विद्युतीकरण नहीं हुआ है और आज भी लोग ढिबरी के सहारे रात काटने का विवश हैं। बसपा ने वादे तो बहुत किये लेकिन काम कुछ नहीं किया।





