टीआरपी के लिए समाचार चैनल को सर्कस बनाना भी तो बिज़नेस लाना ही है

Mayank Saxena : ज़ी न्यूज़ में बिजनेस हेड और सम्पादक के साझा पद को लेकर बवाल मचा रहे तमाम पत्रकार-वरिष्ठ पत्रकार-सेवानिवृत्त पत्रकार-वेटरन पत्रकार-स्वयंभू पत्रकार-पूर्व सम्पादक-वर्तमान 'चम्पादक' इन सब से सिर्फ एक सवाल है… कि आपको एक पद से इतनी समस्या है, जबकि सम्पादक और चम्पादक के पदों पर रहते हुए आपमें से तमाम ने ये ही काम (बिज़नेस लाना-रेवेन्यू मॉडल सोचना-पेड पत्रकारिता करना-राजनैतिक दलों के लिए लॉबीइंग करना-अपने संस्थान-मालिक को फ़ायदा दिलवाना) लगातार किए…ज़ी ने बस उसे औपचारिक मान्यता दे दी…आप ने ऐसा किया चोरी छिपे…ज़ी ने खुलेआम कर मारा…और बता दिया कि दरअसल आज का सम्पादक सिर्फ सम्पादक है ही नहीं…

आप लोग धोखा देते रहे…मैं चाहता हूं..मेरे तमाम साथी युवा पत्रकार चाहते हैं कि सुधीर चौधरी केवल नौकरी से ही नहीं…इस पेशे से भी जाएं…मौका लगे तो जेल भी जाएं…लेकिन सवाल ये कि उनकी आलोचना और इस पद उंगली वो लोग उठाएं, जिन्होंने अनौपचारिक तौर पर कभी इन कामों को अंजाम न दिया हो…टीआरपी के रेवेन्यू मॉडल के लिए, समाचार चैनल को सर्कस बनाना भी तो बिज़नेस लाना ही है…(सर्कस में रात को चलने वाले मर्दाना ताक़त के स्लॉट…कॉमेडी के स्लॉट…निर्मल और दाती के स्लॉट सभी शामिल हैं…)… सभी माननीय आलोचक चम्पादकों-वरिष्ठों के जवाब नहीं मिलेंगे ये जानते हुए बी उनकी प्रतीक्षा है…

टीवी जर्नलिस्ट मयंक सक्सेना के फेसबुक वॉल से साभार.

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