टीओआई ने नर्मदा जल सत्‍याग्रह को छद्म तथा मीडिया को झूठा बताया

 

अंग्रेजी अखबार टाइम्स आफ इंडिया ने तमाम मीडिया को झूठा बताते हुए एक खबर प्रकाशित की है कि नर्मदा जल सत्याग्रह छद्म था, फेक था. खबर में इस बात को प्रमुखता से बताया गया है कि वह नर्मदा नहीं थी, एक नाला था जिसमें कि लोग खड़े थे. जबकि यह सर्व विदित है कि जिसे अखबार नाला बता रहा है वो कावेरी नदी है, जो कि "नर्मदा की ट्रीब्यूटरी" है और घोगल गाँव और टोंकी के बीच में बहती है. 
 
इतिहास गवाह है कि कोई भी प्रदर्शन या सत्याग्रह सांकेतिक होता है. इसके लिए जगह भी सांकेतिक होती है. जरूरी नहीं कि सब लोग नर्मदा में खड़े होके ही प्रदर्शन करें. और जैसा कि खबर में कहा गया कि अब वहां बिलकुल पानी नहीं है तो ये भी सब जानते हैं कि ट्रीब्यूटरी नदी में जो बैकवाटर होता है, वो पानी घटने के साथ ही मुख्य नदी में वापस चला जाता है. ऐसे में इस अखबार का ये कहना कि वह सत्याग्रह ही गलत था पूरी तरह से हास्यास्पद है और जनभावनाओं से खिलवाड़ है. 
 
 

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