‘टैबलेट’ लौटाकर सरकार को ही ‘दर्द’ दे दिया ‘चुनिंदा’ पत्रकारों ने

सपा शासनकाल में केवल पत्रकारों का उत्‍पीड़न ही नहीं बढ़ा है बल्कि अंग्रेजों की तरह पत्रकारों के बीच फूट डालने की कवायद भी की जा रही है. पर कई सवालों के घेरे में खड़ी पत्रकारिता के दौर में कुछ पत्रकारों ने इस कवायद को ऐसा जोरदार तमाचा मारा है, जिसका दर्द सरकार और उनके कारिंदों को लंबे समय तक होता रहेगा. खबर यह है कि सूचना विभाग के कुछ अधिकारियों ने चोरी छुपे लखनऊ के कुछ चुने हुए पत्रकारों को खुश करने के लिए किताबों-डायरियों के साथ सैमसंग का टैबलेट गिफ्ट में भिजवाया.

शायद अधिकारियों को यह भान रहा होगा कि सब कुछ बिकने के दौर में इन चुनिंदा पत्रकारों का ईमान भी इस सैम'संग' टैबलेट के बदले सरकार के 'संग' हो जाएगा. शुरुआत कुछ अच्‍छी भी रही, कई चापलूस टाइप, चम्‍मच टाइप पत्रकार सैम'संग' टैबलेट मिलते ही सरकार और सरकारी अधिकारियों 'संग' हो लिए. वे अधिकारियों के साथ सत्‍'संग' भी करने लगे. इन दो कौड़ी के पत्रकारों के चलते सरकारी कारिंदों का मनोबल भी बढ़ गया. इसके बाद इन लोगों ने आईबीएन7 के ब्‍यूरोचीफ शलभमणि त्रिपाठी, आईबीएन7 के पत्रकार मनोज राजन त्रिपाठी, बिजनेस स्‍टैंडर्ड के स्‍टेट चीफ एवं मान्‍यता प्राप्‍त समिति के सचिव सिद्धार्थ कलहंस, पी7 न्‍यूज के ब्‍यूरोचीफ ज्ञानेंद्र शुक्‍ला, इंडिया न्‍यूज के ब्‍यूरो चीफ श्रेय शुक्‍ल, वरिष्‍ठ पत्रकार सत्‍यवीर सिंह को भी कुछ किताबों के साथ टैबलेट गिफ्ट में भिजवाया.

परन्‍तु इन लोगों के यहां भेजा गया सैम'संग' टैबलेट ने सूचना विभाग के अधिकारियों के रंग में 'भंग' डाल दिया. ये सभी पत्रकार 'संग' तो हुए नहीं उल्‍टा 'टैबलेट' ने ही अधिकारियों को 'दर्द' दे दिया. हुआ यह कि सभी पत्रकार सरकार और अधिकारियों की नीयत को भांपते हुए टैबलेट रखने की बजाय ससम्‍मान वापस भिजवा दिया. इन पत्रकारों के पास अधिकारियों की दाल तो नहीं 'गली', पर उनके इस 'टैबलेट' वितरण प्रोग्राम का शोर जरूर 'गली-गली' हो गया. वैसे बताया जा रहा है कि सरकार के इस सैम'संग' टैबलेट 'संग' न होने और पत्रकारिता का सिर ऊंचा करने का मौका शलभमणि त्रिपाठी की पहल पर मिला.

खबर है कि जब सूचना विभाग के अधिकारियों ने सभी पत्रकारों के घर टैबलेट भिजवाया, उस वक्‍त शलभमणि त्रिपाठी सपरिवार शहर के बाहर थे. वापस आने पर जब उन्‍हें इस बात की जानकारी हुई साथ ही ये भी प‍ता चला कि यह चुनिंदा पत्रकारों को देकर खुश किया जा रहा है तो उन्‍होंने तत्‍काल सभी साथियों से सलाह मशविरा किया. इसके बाद सभी ने निर्णय लिया कि बिना किसी नीति के टैबलेट वितरण कर सरकार पत्रकारों के ईमान का सौदा कर रही है, साथ ही अन्‍य पत्रकार भाइयों के साथ अन्‍याय भी कर रही है, लिहाजा सभी लोगों ने एक साथ सैमसंग टैबलेट लौटा कर ऐसा करने वाले अधिकारियों के मुंह पर जोरदार तमाचा जड़ दिया.        

सूत्र बता रहे हैं कि प्‍यार भरे तमाचे से सरकारी अधिकारियों के गाल अभी तक दर्द कर रहे हैं. साथ ही टैबलेट वापस लौटाने वाले पत्रकार तमाम लोगों की नजरों में हीरो भी बन गए हैं. वहीं दूसरी तरफ 'टैबलेट' गटकने वाले तथाकथित पत्रकारों के नामों पर थू-थू हो रही है. पीठ पीछे गालियां भी पड़ रही हैं. लखनऊ के कई पत्रकारों का कहना है कि यहां सवाल नैतिकता का नहीं है. राजस्‍थान, असम समेत तमाम राज्‍यों पत्रकारों को लैपटॉप और अन्‍य चीजें बांटी गई हैं, परन्‍तु उसके लिए बकायदा सूचना जारी की गई है, क्राइटिरिया तय किया गया है. अगर पत्रकारों को सरकार सुविधा देती है तो इसमें कोई बुराई भी नहीं है, लेकिन अगर कोई चीज चुनिंदा लोगों को और चोरी-छिपे दिया जा रहा है तो यह गलत है और इसका विरोध किया जाना चाहिए. जिन पत्रकारों ने 'टैलबेट' लौटा कर सरकार को 'दर्द' दिया है वे अपने तमाम साथियों की नजरों में पत्रकारिता के 'मर्द' बन गए हैं. 

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