ट्विटर का धोखा, विदेशी आईटी प्रोवाइडर देश के कानून से ऊपर!

जहाँ भारतीय इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर देश के क़ानून का पालन करते हुए आईटी एक्ट के तहत बने नियम के अनुसार शिकायत अधिकारी नियुक्त कर रहे हैं, वहीँ विदेशी प्रोवाइडर देश के क़ानून को कुछ नहीं समझते. सामाजिक कार्यकर्ता अमिताभ और नूतन ठाकुर द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर याचिका के सम्बन्ध में इलेक्ट्रानिक और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रेषित सूचना से यह बात सामने आई है.

29 नवंबर 2012 को आईटी मंत्री कपिल सिब्बल की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभाग ने स्वीकारा कि जहाँ भारतीय सर्विस प्रोवाइडर शिकायत अधिकारी नियुक्त कर चुके हैं, वहीँ विदेशी प्रोवाइडर इसका पालन नहीं कर रहे हैं. आईटी विभाग के ग्रुप कोऑर्डिनेटर गुलशन राय ने यह भी दृष्टांत सामने रखा कि ट्विटर द्वारा शिकायत निस्तारण के लिए जो ईमेल अपने साईट पर दर्शाया गया था, वह फर्जी था. स्वयं भारत सरकार द्वारा उस पर शिकायत डालने पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई और बाद में ट्विटर ने स्वीकार किया कि सरकार का ईमेल उन्हें मिला ही नहीं था. सवाल यह है कि आईटी विभाग इस प्रकार देश के कानूनों का माखौल बनाने और फर्जी काम करने वाली इन कंपनियों के खिलाफ कार्यवाही क्यों नहीं करती है?

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