ठाकरे प्रकरण के दौरान लगातार मिमियाते और रोते नजर आए अर्नब गोस्वामी

वाह रे मीडिया के कर्णधारों! एक हिन्दू नेता के लिए इतना जबरदस्त मीडिया कवरेज. पुलिस द्वारा जारी 20 लाख लोगों की भीड़ के आकड़े से सबसे ज्यादा प्रभावित अपने अर्नब गोस्वामी रहे. जब वे ठाकरे के साथ की दोनों बातचीत दिखा रहे थे तब भी वे मिमियाते लग रहे थे और जब राज ठाकरे से बातचीत कर रहे थे तब भी वे डरे हुए लग रहे थे.

गोस्वामी महान पत्रकार हैं कुछ भी कहें सब ठीक. दूसरे नेताओं के सामने दहाड़ने वाले गोस्वामी ठाकरे साहेब के लिए दोनों दिन रोते ही नज़र आ रहे थे. ठाकरे की शव यात्रा की तुलना गाँधी या दूसरे नेताओं से करने के पीछे क्या मकसद है, यह तो वही जानें पर यह भीड़ वोट देने के समय कहाँ गायब हो जाती है? अगर लोकप्रियता का यही पैमाना है तो 2014 में कांग्रेस को महाराष्ट्र से एक भी सीट नहीं मिलनी चाहिए. ठाकरे साहेब जाते जाते यही सन्देश देकर गए हैं.

लेखक Anchal Sinha वरिष्ठ पत्रकार हैं. बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े हुए है.

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