डा. नूतन ठाकुर को चैनलों ने नहीं दिया उत्‍तर, शिकायत एनबीए को

सामाजिक कार्यकत्री डा. नूतन ठाकुर ने एनडीटीवी (हिंदी), एनडीटीवी 24×7 (अंग्रेजी), आइबीएन-7, सीएनएन-आइबीएन, आज तक, हेडलाइंस टुडे, ईटीवी उत्तर प्रदेश, इंडिया टीवी, एबीपी न्यूज़, न्यूज़ 24 चैनलों को स्वर्गीय डिप्टी एसपी जिया उल हक हत्याकांड के बाद एक शिकायत/सुझाव पत्र अलग-अलग भेजा था, जिनके सम्बन्ध में मात्र इंडिया टीवी द्वारा उत्तर प्राप्त हुआ. अन्य किसी चैनल से कोई भी उत्तर नहीं मिला है. डा. ठाकुर ने इसके मद्देनज़र नेशनल ब्रॉडकास्टर एसोसियेशन को एक शिकायती पत्र आज प्रेषित किया है जो निम्नवत है-

ब्रॉडकास्टर के नाम-   एनडीटीवी (हिंदी), एनडीटीवी 24×7 (अंग्रेजी), आइबीएन-7, सीएनएन-आइबीएन, आज तक, हेडलाइंस टुडे, ईटीवी उत्तर प्रदेश, इंडिया टीवी, एबीपी न्यूज़, न्यूज़ 24
(नोट- इस प्रकरण में कई ब्रॉडकास्टर के विरुद्ध एक ही प्रकार की लगभग समान शिकायतें हैं अतः उन्हें अलग-अलग प्रेषित किये जाने के स्थान पर एक साथ प्रस्तुत करना ज्यादा उचित समझ रही हूँ)

प्रोग्राम  टाइटल-   दिनांक 04/03/2013 प्रातः से रात्रि लगभग 10 बजे तथा पुनः दिनांक 05/03/2013 को स्वर्गीय जिया उल हक, डिप्टी एसपी, प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश) से सम्बंधित लगभग सभी न्यूज़ प्रोग्राम तथा अन्य स्पेशल प्रोग्राम
प्रोग्राम तिथि- दिनांक 04/03/2013 प्रातः से रात्रि लगभग 10 बजे तथा पुनः दिनांक 05/03/2013
समय – इन दोनों दिनों में पूरे दिन भर

शिकायतकर्ता
उपनाम  – ठाकुर
नाम – डॉ (श्रीमती) नूतन
पता  – 5/426, विराम खंड, गोमती नगर, लखनऊ- 226010 (उत्तर प्रदेश)
फोन नंबर.: 094155-34525
ईमेल— nutanthakurlko@gmail.com, nutanthakurlkw@gmail.com
फैक्स– कोई नहीं

क्या  पूर्व में ब्रॉडकास्टर को शिकायत की गयी- जी हाँ (Yes)

शिकायत के तथ्य:

मैं डॉ नूतन ठाकुर लखनऊ स्थित एक सामाजिक कार्यकर्ता हूँ जो विशेषकर प्रशासन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की दिशा में कार्य करती हूँ. मैंने अपने पत्र संख्या- NT/ZUH/NBA/01 दिनांक-05/03/2013 के माध्यम से ईमेल authority@nbanewdelhi.com पर एक युवा और उत्साही डिप्टी एसपी श्री जिया उल हक की दिनांक 02/03/2013 (शनिवार) को कुंडा क्षेत्र, जनपद प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश में हुई हत्या हो और उसके बाद शहीद डिप्टी एसपी की पत्नी सुश्री परवीन आज़ाद द्वारा धारा 302  आईपीसी सहित विभिन्न धाराओं में दर्ज एफआईआर, जिसमें अन्य लोगों के अलावा उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री श्री राजा भैया भी 120बी आईपीसी में षडयंत्र करने के दोषी बताए गए थे, के सम्बन्ध में दिनांक 04/03/2013 प्रातः से रात्रि लगभग 10 बजे तथा पुनः दिनांक 05/03/2013 को विभिन्न न्यूज़ चैनल एनडीटीवी (हिंदी), एनडीटीवी 24×7 (अंग्रेजी), आइबीएन-7, सीएनएन-आइबीएन, आज तक, हेडलाइंस टुडे, ईटीवी उत्तर प्रदेश, समाचार प्लस, इंडिया न्यूज़, इंडिया टीवी, एबीपी न्यूज़, न्यूज़ 24 आदि पर प्रस्तुत खबरों के विषय में सीधे नेशनल ब्रॉडकास्टर एसोसियेशन को शिकायत भेजा था.

मैंने कहा था कि जिस प्रकार से उपरोक्त वर्णित सभी न्यूज़ चैनलों ने इस सामाचार में श्री राजा भैया के सम्बन्ध में खबरें प्रस्तुत की हैं वे निष्पक्ष समाचार नहीं दिख कर एकपक्षीय समाचार जान पड़ते हैं. यह मीडिया ट्रायल का महत्वपूर्ण उदाहरण बन कर सामने आता है. इन न्यूज़ चैनलों को देख कर ऐसा लगता है मानो इनकी कोई नैतिक, विधिक और सामाजिक जिम्मेदारी हो कि श्री राजा भैया तत्काल दण्डित कर दिये जाएँ.  

मैंने दिनांक 05/03/2013 को प्रातः नौ बजे से दस बजे के बीच विभिन्न न्यूज़ चैनल पर आ रहे न्यूज़ हाईलाईट/ब्रेकिंग न्यूज़ के नमूने प्रस्तुत किये थे-

आईबीएन 7- “राजा भईया की गिरफ़्तारी कब , आरोपी राजा भईया अब तक गिरफ्तार नहीं , आरोपी राजा भईया से अब तक पूछताछ नहीं”

आज तक- “राजा भईया की होगी गिरफ़्तारी?”

तेज – क्या राजा भईया की होगी गिरफ़्तारी?”. इसके अतिरिक्त जुर्म का भईया, एक राजा का गुनाह, गुंडे को डर किससे लगता है जैसे हाईलाईट भी लगातार दिखाए गए.

इडिया न्यूज़- “राजा की राजनीति का रक्त चरित्र” नामक एक समाचार दिखाया गया जो पिछली तारीख को भी दिखाया गया था  

इंडिया न्यूज़- “राजा भैया आज गिरफ्तार होंगे?” “परसों एफआईआर, कल इस्तीफा, आज गिरफ्तार” “कौन बचा रहा है राजा भैया को?”

CNN-IBN- “Akhilesh Promises Slain DSP’s Kin Of Arrest “, Will Akhilesh Keep Promise” “Will Raja Bhaiya Be Arrested?”

Headlines Today-“Will Raja Bhaiya be arrested?”
 
न्यूज़ 24- “सलाखों के पीछे जायेंगे राजा भईया”

NDTV 24×7- “Will Raja Bhaiya be arrested?”

उपरोक्त सभी न्यूज़ हाईलाईट के आधार पर मैंने कहा था कि इससे साफ़ दिखता है कि ये समाचार नहीं हो कर पूर्वानुमान हैं और अपने मंतव्य हैं. इन खबरों से ऐसा माहौल बनता है कि चूँकि श्री राजा भैया समाज के लिए हर प्रकार से अवांछनीय हैं, बहुत गलत आदमी हैं और अपराधी हैं, अतः उन्होंने निश्चित रूप से यह अपराध भी किया होगा. अतः इन खबरों में श्री राजा भैया को साफ़ तौर पर इस हत्याभियोग का अभियुक्त और दोषी बता दिया जा रहा है. एक प्रकार से यह तय कर दिया जा रहा है कि चूँकि श्री राजा भैया का बहुत पुराना आपराधिक इतिहास है, अतः वे इस मामले में भी निश्चित रूप से ही अभियुक्त और दोषी होंगे. यदि अभियुक्त और दोषी हैं तो उनकी तत्काल गिरफ़्तारी होनी चाहिए. इसके विपरीत विधिक स्थिति मात्र यह है कि अभी इस मामले में एफआईआर दर्ज किया गया है. एफआईआर करने वाली शहीद डिप्टी एसपी की पत्नी ने श्री राजा भैया को षडयंत्र का दोषी बताया है. वे इस मामले में श्री राजा भैया को ही पूरी तरह दोषी और जिम्मेदार मान रही हैं. चूँकि शहीद की पत्नी ऐसे गंभीर आरोप लगा रही हैं, अतः इसे बहुत ही गम्भिता और तत्परता से लिया जाना चाहिए. पर इसका यह अर्थ कदापि नहीं लगा लेना चाहिए कि मामले में सभी बातें पूरी तरह साफ़ हो गयी हैं. मीडिया, विशेषकर इलेक्ट्रौनिक मीडिया जिसमे उपरोक्त वर्णित न्यूज़ चैनल भी शामिल हैं, को यह चाहिए कि मामले की निष्पक्ष विवेचना की प्रतीक्षा करें, ना कि अपनी तरफ से ही विवेचना कर के किसी व्यक्ति को कातिल और अभियुक्त घोषित कर दें.

मैंने कहा था कि बहुत संभव है कि कल को विवेचना में श्री राजा भैया दोषी पाए जाएँ और उनकी गिरफ़्तारी भी हो पर इलेक्ट्रौनिक मीडिया द्वारा निष्पक्ष प्रस्तुति को त्याग कर अपने स्तर से जज और निर्णायक की भूमिका में आ जाना और श्री राजा भैया के विरुद्ध एक प्रकार का कैम्पेन प्रारम्भ कर देना निष्पक्ष और तटस्थ पत्रकारिता के मापदंडों के प्रतिकूल दिखता है. इन समाचारों से यह स्पष्ट आभास होता है कि मीडिया (उपरोक्त न्यूज़ चैनल सहित) चाहती है कि श्री राजा भैया दोषी हों और उनकी यथाशीघ्र गिरफ़्तारी हो.

मेरा निवेदन था कि यह स्थिति मात्र इसीलिए खतरनाक है क्योंकि यदि बाद में खुदा-ना-खास्ता विवेचना के बाद यह बात सामने आती है कि श्री राजा भैया इस मामले में दोषी नहीं थे, तो यह उनके साथ तो अन्याय होगा ही, निष्पक्ष पत्रकारिता पर भी एक प्रश्नचिन्ह बन कर खड़ा हो जाएगा. अतः संभवतः उचित यह होता कि न्यूज़ चैनल सभी तथ्य उन व्यक्तियो की बानगी प्रस्तुत करते जो ऐसी बातें कह रहे हैं और उसके साथ ही दूसरे पक्ष को भी अपनी बात कहने का पूरा अवसर देते और उनकी बात भी उसी प्रमुखता से प्रस्तुत करते ताकि दर्शकों के सामने सारी बातें तथ्यात्मक रूप से सामने आ पाती और मीडिया के जज बन जाने की स्थिति नहीं दिखती.

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