डा. रोशन जैकब का गोंडा से तबादला और दुर्गाशक्ति नागपाल प्रकरण से सबक

आखिरकार मंगलवार को गोंडा की डीएम डा. रोशन जैकब का तबादला हो गया। वाराणसी जिले के मूल निवासी व 28 नवम्बर 2012 से कृषि उत्पादन आयुक्त के स्टाफ आफिसर रहे 2000 बैच के आईएएस अजय कुमार उपाध्याय को गोंडा का नया डीएम बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि 15 अक्टूबर 2012 को दूसरी बार जिलाधिकारी के रूप में गोंडा की डीएम का कार्यभार सम्हालने वाली डा. जैकब का सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के नेताओं से कई बार टकराव हुआ।

डा. जैकब को हटाने के लिए शासन में कई बार पुरजोर कोशिशें भी हुईं किन्तु उनके अच्छे कार्यों के चलते दो फाड़ में बंटी समाजवादी पार्टी का एक धड़ा हमेशा उनके लिए ढाल बनकर खड़ा हो जाता था। कैसरगंज से पार्टी सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बगावत के बाद राज्य मंत्री विनोद कुमार उर्फ पंडित सिंह को लोकसभा का प्रत्याशी बनाए जाने पर पार्टी ने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित होने में आने वाली अड़चनों के बारे में जानकारी ली, तो पहले से ही डीएम को हटाए जाने की मांग कर रहे धड़े ने अपनी पुरानी मांग दोहरा दी। किन्तु मतदाता सूची के पुनरीक्षण के चलते भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों के तबादले पर रोक से उनका आसानी से हटाया जाना संभव न था।

सूत्र बताते हैं कि ऐसी दशा में शासन ने चुनाव आयोग को तीन अधिकारियों के नाम का पैनल भेजकर गोंडा में नए डीएम को तैनात किए जाने की अनुमति मांगी। इसकी भनक मिलते ही डीएम ने जिले में खाद्यान्न व खनन माफियाओं के विरुद्ध जोरदार अभियान छेड़ दिया। उधर, जनवरी माह के दूसरे सप्ताह में आयोग ने अजय कुमार उपाध्याय के नाम को हरी झंडी दे दी। सूत्र बताते हैं कि आयोग से अनुमति लेने के बाद भी शासन ने निर्णय लिया कि भ्रष्टाचारियों के खिलाफ अभियान छेड़े प्रदेश के एकमात्र कलेक्टर को हटाया जाएगा तो फिर कहीं सरकार की दुर्गाशक्ति नागपाल के प्रकरण जैसी किरकिरी न हो जाय। इससे बचने के लिए थोक में होने वाले तबादलों तक इंतजार किया गया। आखिरकार मंगलवार को किए गए 53 आइएएस अधिकारियों के स्थानांतरण सूची में इनका भी नाम शामिल करते हुए हटा दिया गया।

गोंडा के वरिष्ठ पत्रकार जानकी शरण द्विवेदी की रिपोर्ट.

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