डिंपल की जीत पर कन्नौज के पत्रकारों को सीएम अखिलेश ने दी पार्टी

: न बुलाए जाने से कानपुर के पत्रकार हुए दुखी : पीड़ितों की लाइन लगी थी लेकिन सिर्फ कन्नौज के लोगों को अंदर जाने दिया गया : सेवा में, श्रीमान् संपादक महोदय, भडास मीडिया डाट काम, विषयः- पत्नी की निर्विरोध जीत पर अपने आवास पर अखिलेश यादव ने दी कन्नौज के पत्रकारों को दावत। महोदय, आपको अवगत करा रहा हूं कि कन्नौज लोकसभा उपचुनाव के दौरान डिम्पल यादव के निर्विरोध चुने जाने के उपलक्ष्य में माननीय मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कन्नौज के पत्रकारों को व्यक्तिगत रूप से अपने लखनऊ स्थित कालीदास मार्ग आवास में दिनांक 18 जून 2012 को बुलाकर चाय, नाश्ते और खाने के साथ ही भेंट की।

वहां पर कन्नौज के लगभग 25 पत्रकारों को बुलाया गया था, किन्तु वहां पर कन्नौज के लगभग 50 पत्रकार शामिल हुये। चेकिंग व सत्यापन के दौरान उनके सुरक्षा गार्डों द्वारा बोला गया कि सिर्फ कन्नौज के ही पत्रकार अन्दर आयेंगे। परन्तु उनके साथ आये जनपद कन्नौज के कई पीड़ित अपनी अपनी समस्याओं को लिखित रूप में लेकर कार्यक्रम में शामिल हुये।

मुख्यमंत्री जी के आते ही पत्रकारों ने अपनी समस्याओं से उन्हें अवगत कराया कि जनपद कन्नौज में प्रेस क्लब बनाया जाये और आये साथ लोगों ने अपने कार्यों को उनके सामने रखा जिसमें कोई स्थानान्तरण से संबन्धित प्रकरण, जमीन विवाद, थाना चौकी, मेडिकल कालेज, पार्क आदि समस्यायें शामिल रहीं। इसमें पीड़ित कन्नौज निवासी होने पर मुख्यमंत्री जी ने विशेष रुचि लेते हुये समस्याओं का निस्तारण करने के लिये अपने पीए को निर्देश दिये।

महोदय, पत्रकार तो एक बहाना था, वहां पर लोगों की समस्याओं का निस्तारण ज्यादा किया गया। खेद इस बात का है कि जनपद कन्नौज के अलावा सभी प्रिन्ट एवं इलेक्ट्रानिक मीडियाओं का जोनल आफिस कानपुर में है और उनके वरिष्ठ पत्रकार कानपुर में बैठते हैं, जिन्हें इस आयोजन में नहीं बुलाया गया जबकि लगभग सारी खबरें कानपुर से ही हेड आफिस के लिये भेजी जाती हैं। यदि मुख्यमंत्री जी को पत्रकारों को पार्टी देनी थी तो कानपुर के पत्रकारों को बुलाना उचित क्यों नहीं समझा गया। मुख्यमंत्री जी से मिलने के लिये सुबह आठ बजे से एक बजे तक प्रदेश के पीड़ितजन उनके निवास के बाहर धूप में अपनी अपनी फरियाद लेकर खड़े रहे, परन्तु आदेशानुसार कन्नौज से आये हुये पत्रकारों व पीड़ित जनों को ही अन्दर भेजा गया।

महोदय मैं इस खबर के माध्यम से किसी की गरिमा को ठेस नही पहुंचाना चाहता हूं और न ही सरकारी काम में बाधा डालना चाहता हूं, परंतु मुख्यमंत्री जी के लिये सभी पत्रकार व पीड़ित एक समान हैं। महोदय मैं अपना नाम व मोबाइल नंबर नहीं दे सकता हूं। मैं एक पत्रकार की हैसियत से यह पत्र आपको लिख रहा हूं। आप उक्त प्रकरण की जानकारी करके ही प्रकाशित करे।

एक पत्रकार

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