डीआईजी कार्मिक बोले- पुलिसकर्मी भी कर सकता है बेहतरीन शायरी

: 'गुफ्तगू' के इश्क सुल्तानपुरी अंक का विमोचन : इलाहाबाद। एक पुलिसकर्मी हमेशा डंडा ही नहीं चलाता बल्कि कलम उठाकर अपनी अभिव्यक्ति भी खूबसूरती से व्यक्त कर सकता है, इश्क सुल्तानपुरी ने इसको बेहतरीन ढंग से करके दिखाया है, इन्होंने अपनी काव्य सृजन की क्षमता अवगत करा दिया है. यह बात डीआईजी कार्मिक लाल शुक्ल ने ‘गुफ्तगू’ के इश्क सुल्तानपुरी अंक के विमोचन के अवसर पर कही. उन्होंने कहा कि इश्क साहब की शायरी को लोगों तक लाने में गुफ्तगू पत्रिका ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, पत्रिका का यही कार्य इसे अन्य पत्रिकाओं से अलग करता है. हिन्दुस्तानी एकेडमी में पत्रिका का विमोचन भी मुख्य अतिथि लाल जी शुक्ल ने किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर डा. जमीर अहसन ने की. अति विशिष्ठ अतिथि के रूप में न्यायमूर्ति प्रेम शंकर गुप्त मौजूद रहे.

डा. जमीर अहसन ने अपने वक्तव्य में कहा कि इस पत्रिका ने कई उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं, खासतौर पर बड़े शायरों के साथ ही नए उभरते हुए रचनाकारों को सम्मान के साथ जगह दी है, इश्क सुल्तानपुरी अंक भी इसी बात की गवाही देता है. न्यायमूर्ति प्रेम शंकर गुप्त ने इश्क सुल्तापुरी की शायरी के साथ ही गुफ्तगू पत्रिका के प्रयासों की सराहना की और कहा कि पत्रिका ने अपने बेहतरीन काम के जरिए देशभर काफी नाम कमाया है, इसके उल्लेखनीय कार्यों की चर्चा आज हर साहित्यिक परिचर्चाओं की जा रही है.

वरिष्ठ पत्रकार मुनेश्वर मिश्र ने कहा कि गुफ्तगू पत्रिका की शुरुआत आज से नौ साल पहले हुई थी. निरंतर प्रकाशित हो रही इस पत्रिका ने साबित कर दिया है कि मेहनत और इमानदारी के साथ काम किया जाए तो कामयाबी जरूर मिलेगी. आज के युग में साहित्यिक पत्रिका इतनी कामयाबी से साथ प्रकाशित करना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन गुफ्तगू की टीम से इस चुनौती का साहस के साथ सामना किया है और कामयाबी हासिल की है. इम्तियाज अहमद गाजी ने कार्यक्रम की भूमिका पेश करते हुए बताया कि आज गुफ्तगू पत्रिका का आनलाइन विमोचन भी कर दिया गया है, इसी के साथ अब पत्रिका इंटरनेट के माध्यम से पूरी दुनिया पढ़ी जा सकेगी.

उन्होंने कहा कि साहित्य की दुनिया में कदम रखने वाले नए लोगों की हौसलाअफाजाई की जानी चाहिए, न कि उन्हें छुरी-कैंची दिखानी चाहिए। जब तक नए लोगों को प्रोत्साहित नहीं किया जाएगा तब तक नए लोग नहीं जुड़ेंगे. श्री गाजी ने कहा कि एक नया लिखने वाले सूर, निराला, गालिब और मीर की तरह का शायर नहीं हो सकता। धीरे-धीरे ही उसमें परिवक्ता आती है, और इश्क सुल्तानपुरी की शायरी को भी इसी नज़रिए से देखना चाहिए. कार्यक्रम के संयोजक शिवपूजन सिंह ने साहित्यिक आयोजन कराना आज के दौर में एक बड़ी चुनौती है, लेकिन गुफ्तगू परिवार ने कुछ लोगों के सहयोग से समय-समय पर आयोजन कराया है और आपलोगों का सहयोग मिलता रहा तो यह प्रयास आगे भी जारी रहेगा.

सीमैट की प्राचार्या सुश्री भावना शिक्षार्थी ने कहा कि आज के दौर में इमानदारी के साथ काम करना आसान नहीं है, लेकिन गुफ्तगू पत्रिका ने यह कार्य कर दिखाया है, निश्चित रूप से हमें इस तरह के कार्यों की सराहना करनी चाहिए. डा. पीयूष दीक्षित, संतोष तिवारी आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किया. संचालन इम्तियाज अहमद गाजी ने किया. दूसरे सत्र में मुशायरे का आयोजन किया गया, जिसका संचालन नजीब इलाहाबादी ने किया। बुद्धिसेन शर्मा,फरमूद इलाहाबादी,मखदूख फूलपुरी,जयकृश्ण राय तुशार, राजेश श्रीवास्तव,वीनस केसरी,शकील गाजीपुरी, अजीत शर्मा आकाश,रमेश नाचीज,श्रीरंग पांडेय, विवके सत्यांशु, शादमा जैदी शाद,सतीश कुमार यादव आदि ने कलाम पेश किया।

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