डीजीपी यूपी को अंग्रेजी और क़ानून कम आता है?

आरटीआई के जरिये प्राप्त सूचना से यूपी के डीजीपी द्वारा अंग्रेजी में लिखे विधि के प्रावधानों का ठीक उल्टा मतलब निकाल्रे जाने का एक वाकया सामने आया है. आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने मौलिक भारत नामक एक सामाजिक संगठन का अवैतनिक सदस्य बनने के बारे में डीजीपी को सूचना भेजी. इस पर आईजी कार्मिक तनूजा श्रीवास्तव ने अंग्रेजी में आईपीएस अधिकारियों के आचरण नियमावली के नियम 13(2) का हवाला दिया जिसका अर्थ हुआ कि कोई आईपीएस अधिकारी बिना शासन के किसी पूर्वानुमति के अवैतनिक रूप से सामाजिक कार्य कर सकता है.

मजेदार बात यह कि सुश्री श्रीवास्तव ने इस नियम को लिखते हुए इसका यह अर्थ निकाला कि इसके अनुसार श्री ठाकुर शासन की पूर्वानुमति के बाद ही इस संस्था में सहभागिता कर सकते हैं. उससे भी गंभीर बात यह कि एडीजी कार्मिक जे एल त्रिपाठी और तत्कालीन डीजीपी ए सी शर्मा ने भी सुश्री श्रीवास्तव की कही बात को अपने स्तर से अनुमोदित करते हुए श्री ठाकुर को इस संस्था में भाग लेने से मना कर दिया.

प्रकरण से सम्बंधित डीजीपी कार्यालय के नोटशीट के अंश…

इस नोटशीट के पृष्ठ 1 में आईजी (कार्मिक) ने दिनांक 22/01/2013 को लिखा-

“1.4- अखिल भारतीय सेवाएँ आचरण नियमावली 1968 के नियम 13(2) के उक्त प्रस्तर दो में निम्न व्यवस्था अंकित है- “13(2) A member of the Service may, without the previous sanction of the Government,— (a) undertake honorary work of a social or charitable nature”    1.5- उक्त नियमावली के उपरोक्त प्रस्तर में अंकित निर्देशों के अनुसार श्री अमिताभ ठाकुर, आईपीएस को शासन की पूर्वानुमति के पश्चात ही मौलिक भारत नामक गैर सरकारी संगठन की सहभागिता में सम्मिलित होना चाहिए.”

इसी नोटशीट के पृष्ठ 3 पर दिनांक 08/03/2013 को आईजी कार्मिक ने अपने नोट के पैरा 6.2 पर लिखा-“अखिल भारतीय सेवाएँ आचरण नियमावली 1968 के नियम 13(2) में निम्न व्यवस्था अंकित है- “ 13(2) A member of the Service may, without the previous sanction of the Government,— (a) undertake honorary work of a social or charitable nature” उक्त निर्देश के सन्दर्भ में ही श्री अमिताभ ठाकुर, आईपीएस को उपरोक्तानुसार निर्देशित किया गया है”

इन दोनों नोट को एडीजी कार्मिक और डीजीपी ने अनुमोदित किया.

लखनऊ से नूतन ठाकुर की रिपोर्ट.

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