डीजीपी यूपी ने दिया भरोसा, वाराणसी के पत्रकारों का उत्पीडन नहीं होगा

लखनऊ : सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने आज उत्तर प्रदेश के डीजीपी देबराज नागर से मिल कर थाना चौक, वाराणसी में सट्टेबाजी सम्बंधित एक मुकदमे में एसएसपी वाराणसी अजय कुमार मिश्रा द्वारा व्यक्तिगत द्वेषभाव से पत्रकारों को प्रताडित किये जाने के सम्बन्ध में शिकायत की. उन्होंने इस प्रकरण की विवेचना वाराणसी से हटा कर किसी अन्य जिले या विशेष शाखा को सौंपे जाने की मांग की, जिस पर डीजीपी ने जांच कर आवश्यक समझे जाने पर विवेचना स्थानांतरित करने समेत सभी समुचित कार्यवाही करने की बात कही. डीजीपी नागर ने यह भी आश्वस्त किया कि पत्रकारों का किसी प्रकार भी उत्पीडन नहीं होगा.

मणिकर्णिका घाट पर लाशों की प्रति घंटा आमद पर सट्टेबाजी के सम्बन्ध में जुआ अधिनियम में दर्ज एक मुक़दमे में वाराणसी पुलिस ने मात्र अभियुक्तों के बयान के आधार पर खबर दिखने वाले पत्रकार काशीनाथ शुक्ल, आसिफ और दिनेश कुमार को अभियुक्त बना दिया और आसिफ को गिरफ्तार भी किया. एसएसपी के कार्य को पूर्णतया विधिविरुद्ध समझते हुए ठाकुर ने भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष मार्कंडेय काटजू को शिकायत भेजी जिसमे उन्होंने कहा कि इस मामले में जो भी आपराधिक धाराएँ पुलिस द्वारा पत्रकारों पर लगाई जा रही हैं वे बुनियादी तौर पर ही गलत हैं.

डीजीपी उत्तर प्रदेश को दिया गया पत्र–

सेवा में,

पुलिस महानिदेशक,
उत्तर प्रदेश,
लखनऊ

विषय:- वाराणसी के चौक थाने में पंजीकृत मु०अ०सन०- 84/2013 अंतर्गत  धारा  13 जुआ अधिनियम व धारा  420,467,468,177, 295A,298 आईपीसी  की विवेचना गैर जनपद अथवा स्वतंत्र जांच से कराने हेतु

महोदय,

कृपया निवेदन है कि मैं डा. नूतन ठाकुर, पत्नी श्री अमिताभ ठाकुर, निवासी – 5/426, विराम खंड, गोमती नगर, लखनऊ एक सामाजिक कार्यकर्ता हूँ और विशेषकर मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों पर काम करती हूँ. इस प्रार्थना पत्र के माध्यम से मैं आपके समक्ष वाराणसी के चौक थाने में पंजीकृत मुकद्दमा अपराध संख्या- 84/2013  धारा  13 जुआ अधिनियम  व धारा  420,467,468,177,295A,298 आईपीसी  के मामले में न्यूज स्ट्रीट ब्राडकास्ट प्राईवेट लिमिटेड के स्ट्रिंगर रिपोर्टर राम सुंदर मिश्र द्वारा दिए गए शिकायती प्रार्थना पत्र की प्रति प्रस्तुत कर रही हूँ जिसमे उन्होंने एसएसपी वाराणसी के दवाब में विवेचना को निष्पक्ष ढंग से नहीं किये जाने व वाराणसी पुलिस द्वारा इस मुकद्दमे में खुद को जबरन फंसाये जाने की आशंका व्यक्त करते हुए इस अपराध की विवेचना किसी भी गैर जनपदीय पुलिस अथवा किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से कराये जाने सम्बन्धी प्रार्थना पत्र आपको दिया था. अपने प्रार्थना पत्र की एक प्रति उन्होंने मुझे भी प्रेषित की थी.

नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत को दृष्टिगत रखते हुए यह उचित प्रतीत होता है कि इस अपराध की विवेचना किसी भी अन्य जनपद की पुलिस अथवा स्वतंत्र एजेंसी से जांच से कराये जाने हेतु स्थानांतरित करने के आदेश आप अपने स्तर से करने की कृपा करें क्तोंकी इस प्रकरण में जो भी आरोप लग रहे हैं वे सीधे-सीधे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वाराणसी पर हैं. ऐसे में आप सहमत होंगे कि न्याय सिर्फ हो नहीं बल्कि न्याय होते हुए दिखे भी की अवधारना यह चाहती है कि यदि वाराणसी के एसएसपी पर बारम्बार आरोप लग रहे हैं तो उनके अथवा उनके किसी अधीनस्थ के स्तर से विवेचना नहीं कराई जाये ताकि लोगों को यह साफ़ दिखे कि इस मामले में किसी प्रकार के व्यक्तिगत रागद्वेष के लिए कोई जगह नहीं है.

भवदीय,

पत्रांक संख्या- NT/DG/RAM/VAR/01                                                     
दिनांक – 18/06/2013                                                                            
नूतन ठाकुर
गोमती नगर
लखनऊ
 

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