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डॉ. कृष्ण कुमार रत्तू की पुस्तक ‘मीडिया और हिंदी- वैश्विक परिदृश्य’ लोकार्पित

जाने-माने तकनीकी विशेषज्ञ एवं भारत में सूचना क्रांति के जनक व प्रधानमंत्री के सलाहकार सैम पित्रोदा का मानना है कि हिंदी भाषा एवं सूचना तकनीक मीडिया संप्रेषण के द्वारा भारत जैसे बड़े देश की विविधता को गहरे भावनात्मक सूत्र में बांधती है। श्री पित्रोदा ने यह उद्गार मीडिया विशेषज्ञ एवं हिंदी, पंजाबी के लेखक डॉ. कृष्ण कुमार रत्तू की नवीनतम पुस्तक ‘मीडिया और हिंदी- वैश्विक परिदृश्य’ के विमोचन के अवसर पर प्रकट किये।

जाने-माने तकनीकी विशेषज्ञ एवं भारत में सूचना क्रांति के जनक व प्रधानमंत्री के सलाहकार सैम पित्रोदा का मानना है कि हिंदी भाषा एवं सूचना तकनीक मीडिया संप्रेषण के द्वारा भारत जैसे बड़े देश की विविधता को गहरे भावनात्मक सूत्र में बांधती है। श्री पित्रोदा ने यह उद्गार मीडिया विशेषज्ञ एवं हिंदी, पंजाबी के लेखक डॉ. कृष्ण कुमार रत्तू की नवीनतम पुस्तक ‘मीडिया और हिंदी- वैश्विक परिदृश्य’ के विमोचन के अवसर पर प्रकट किये।

चंडीगढ़ के पंजाब विश्वविद्यालय में हुए इस विमोचन समारोह में श्री सैम पित्रोदा ने लेखक डॉ. रत्तू को बधाई देते हुए कहा कि यह पुस्तक मीडिया तथा हिंदी के संबंधों को वैश्विक स्तर पर देखने का एक अपनी तरह का अनूठा प्रयास है। उन्होंने पुस्तक की विविध सामग्री एवं चर्चित बिंदुओं को संप्रेषण के माध्यम से सूचना तकनीक को देश के विकास तथा संवाद के लिए अति महत्वपूर्ण बताया। इस अवसर पर पंजाब विश्वविद्यालय के उप-कुलपति डॉ. अरुण कुमार ग्रोवर ने इस पुस्तक को मीडिया तथा हिंदी के संबंधों पर महत्वपूर्ण कृति बताया। यहां पर यह उल्लेखनीय है कि डॉ. रत्तू की यह पुस्तक श्री पित्रोदा को ही समर्पित की गई है। इससे पहले भी डॉ. रत्तू की पच्चास से ज्यादा प्रकाशित हो चुकी हैं और देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रहीं हैं। इस अवसर पर राजधानी की कई गणमान्य हस्तियां उपस्थित थीं।

डा. रत्तू ने कहा कि राजभाषा हिंदी अपना दबदबा और क्षेत्र बढ़ाने में सफल रही है। मीडिया क्षेत्र में की प्रभुसत्ता है। खबरिया चैनलों से लेकर अन्य सभी में उसका वर्चस्व है। आखिर क्यों न हो हिंदी भाषा में ही पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने की क्षमता है। सरकारी स्तर पर हिंदी के प्रचार प्रसार में कोई कमी नहीं है। अगर कुछ है तो उसे दूर किया जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘मीडिया और हिंदी- वैश्विक परिदृश्य’ जिस उद्देश्य को लेकर लिखी गई है वह उसे पूरा करने में काफी हद तक सफल होगी।

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