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तंत्र साधना से गड़ा धन दिलवाने का दावा करता है पत्रिका का उप संपादक!

राजस्थान पत्रिका के अजमेर संस्करण में कार्यरत एक उप संपादक की ज्योतिष विद्या की दुकान जमकर चल रही है। अपने नाम के आगे ‘ज्योतिष रत्न’ की उपाधि लगाने वाला यह उप संपादक अपने धंधे को चमकाने के लिए पत्रिका का इस्तेमाल करने से भी नहीं चूक रहा है।

राजस्थान पत्रिका के अजमेर संस्करण में कार्यरत एक उप संपादक की ज्योतिष विद्या की दुकान जमकर चल रही है। अपने नाम के आगे ‘ज्योतिष रत्न’ की उपाधि लगाने वाला यह उप संपादक अपने धंधे को चमकाने के लिए पत्रिका का इस्तेमाल करने से भी नहीं चूक रहा है।

उप संपादक नगरा क्षेत्र में स्थित एक शिव मंदिर पर हर रविवार को ज्योतिष विद्या सिखाने और शंका समाधान का नि:शुल्क शिविर आयोजित करता है। शिविर आयोजन की खबर राजस्थान पत्रिका में छापता है। खबर पढ़कर इस निशुल्क शिविर में आने वाले दुखी लोगों को गड़ा धन तक दिलवाने का फर्जी और झूठा दावा करते हुए उन्हें अपने घर बुलवाता है और वहां अपनी लच्छेदार बातों से प्रभावित करते हुए शंका समाधान के नाम पर रुपए ऐंठता है।

पत्रिका के जयपुर कार्यालय से छपकर आने वाले साप्ताहिक विशेष परिशिष्ट ‘यंत्र-मंत्र-तंत्र’ का लेखन-संपादन खुद करने तक का फर्जी दावा उप संपादक की ग्राहकी में और इजाफा कर रहा है। लोग उप संपादक के प्रलोभन में फंस रहे हैं और वह अपना उल्लू सीधा करने में जुटा है।

पत्रिका प्रबंधन अपने इस उप संपादक की हरकतों से पूरी तरह अनजान नहीं है। अजमेर का मूल निवासी यह उप संपादक जब नागौर कार्यालय में कार्यरत था तब फोन पर ही सलाह और शंका समाधान का दावा करते हुए अपना निजी मोबाइल नंबर तक पत्रिका में छाप देता था। ग्राहकों के फोन आते तब उन्हें जन्मपत्री लेकर मिलने बुला लेता था। नागौर के ब्यूरो चीफ को जब उसकी यह हरकत पता लगी तो पुष्टि के लिए उन्होंने खुद ही फोन मिला डाला। दफ्तर में ही थोड़ी दूर बैठे उप संपादक के निजी मोबाइल की घंटी बजी और ब्यूरो चीफ की आवाज सुनकर हालत खराब हो गई। परिणाम नागौर से तबादले के रूप में सामने आया।

अब अजमेर में भी उप संपादक की यही हरकतें जारी है। समझ में यह नहीं आ रहा है कि इतना महान तांत्रिक और ज्योतिष जो जाने कितने लाख रुपए खुद कमा सकता है और करोडों रुपए अपने सेठ जी गुलाब कोठारी को दिला सकता है, रात के दो ढाई बजे तक कम्प्यूटर पर खबरों के बीच रात काली क्यों कर रहा है? 

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