Yashwant Singh : मैंने तरुण तेजपाल को लेकर अपने कुछ विचार फेसबुक पर प्रकाशित किए तो उस पर ढेर सारी गालियां आई हैं.. सही भी है.. हर मसले पर भीड़, जनता का एक मूड, मिजाज, संवेदना, जिद होती है… तरुण तेजपाल प्रकरण को जिस तरह मीडिया ने टीआरपी के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, इससे धीरे धीरे यह हो जाएगा कि जो भी इस प्रकरण पर तटस्थ, उदात्त, मौलिक तरीके से सोचने का प्रयास करेगा, वह भीड़ की गालियों, भीड़ के कंकड़-पत्थरों का शिकार होगा.. इस खतरे के बावजूद मैं अपनी बात आगे बढ़ाने जा रहा हूं..
भाई संजय कुमार सिंह ने मेरी पोस्ट से असहमति जताते हुए एक पूरी अलग से ही पोस्ट डाल दी है, जो कि बहुत लाजिकल पोस्ट है.. मैं विरोध, असहमति, किसी मसले के दूसरे पक्ष को पूरा सम्मान देता हूं और इसी नजरिए के कारण संजय कुमार सिंह जी के उपरोक्त पोस्ट को भड़ास पर भी सम्मान के साथ शेयर किया है.. लिंक ये http://bhadas4media.com/article-comment/16024-2013-11-23-18-07-00.html है.. अब जो बात मैं आगे कहना चाहूंगा उसे थोड़ा ध्यान से सुनिएगा…
तहलका ने बड़े बड़े लोगों के चेहरे का नकाब हटाया है… शुरुआत रामदेव से ही करते हैं.. इन महाशय के अरबों खरबों के खेल के पीछे के काले सच का तहलका ने इतना तार्किक और सटीक तरीके से खुलासा किया कि लोगों को समझ में आ गया कि ये बाबा जितना सहज सरल सांस छोड़ता खींचता दिखता है, वैसा है नहीं.. बेसिकली यह एक बड़ा व्यापारी है जो लोगों को योग, अध्यात्म आदि सिखाने के नाम पर बड़े पैमाने पर आश्रम, जमीन, फैक्ट्री, प्रोड्कट आदि खरीद बेंच रहा है.. तहलका की मुझे वो रिपोर्ट याद हैं जिसे पढ़कर कोई भी कह देता था कि ये बाबा बहुत बड़ा जनविरोधी है क्योंकि यह तो बाहुबल के जरिए किसानों की जमीनें कब्जा लेता है… तो इस बाबा ने तरुण तेजपाल पर आरोप लगते ही लंबा चौड़ा प्रेस कांफ्रेंस करके तरुण तेजपाल के बारे में ढेर सारा उल्टा सीधा बोला… बबवा ने बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस कर तेजपाल के खिलाफ भड़ास निकाली. बाबा ने कहा- ''योगगुरु बाबा रामवदेव ने तलहका के एडिटर इन चीफ तरुण तेजपाल के एक महिला पत्रकार के साथ यौन शोषण का मामला उजागर होने पर उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर सजा दिलाने की मांग की है। बाबा रामदेव ने आज यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पिछले पांच साल से कांग्रेस की शह पर तेजपाल उनके पीछे पडा हुआ था। उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस की शह पर ज्यादा काम करता था और अब उसका स्वयं का बडा ‘तहलका’ सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि मीडिया को तेजपाल का बहिष्कार करना चाहिए और उसे तुरंत गिरफ्तार कर सजा दिलानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि कांग्रेस को अपने चाल-चरित्र और चेहरे पर विचार करना चाहिए। आसाराम बापू के मामले पर पूछे गए सवाल पर बाबा रामदेव ने कहा कि उन्होंने कभी इस प्रकरण में उनका साथ नहीं दिया था, किंतु अब जो कृत्य सामने आ रहे हैं उन पर टिप्पणी करने की कोई गुंजाइश ही नहीं है।''
आप देख सकते हैं कि बाबा रामदेव का आसाराम प्रकरण पर क्या रुख रहा है पहले और तरुण तेजपाल प्रकरण पर कैसा रुख है… असल में कई घटनाओं पर स्टैंड लेने का काम ज्यादातर अपनी अपनी राजनीतिक, निजी और अन्य किस्म के फायदों के आधार पर तय होता है…. बाबा रामदेव अगर तरुण तेजपाल की इस गल्ती पर खुलकर उनका विरोध करते हुए पुराने सारे मामलों के बदले निपटा रहे हैं तो यह समझ में आने वाली चीज है.. एक और उदाहरण देना चाहूंगा.. सोनी सोरी की योनि आदि में पत्थर तक डालने वाले आईपीएस अंकित गर्ग को दंडित कराने को लेकर न्यूज चैनलों पर कभी भी इस कदर डिबेट, खबरें, पल-पल की रिपोर्ट, विश्लेषण, लाइव आदि का प्रसारण नहीं किया गया जिस तरह की तरुण तेजपाल सेक्स कांड को लेकर किया जा रहा है.. कारण? एक नहीं, दो तीन हैं… आईबीएन7, जी न्यूज जैसे कारपोरेट मीडिया हाउसेज को कभी यह अच्छा नहीं लगता है कि तहलका जैसे ग्रुप आगे बढ़ें क्योंकि उन्हें हमेशा खतरा बना रहता है कि कहीं तहलका या इस जैसे ग्रुप आईबीएन7 या जी न्यूज जैसे मीडिया घरानों और इनके पीछे की राजनीति-अर्थनीति पर ही स्टोरी न कर दे… संभव है, अतीत में तहलका ने ऐसा किया भी हो… दूसरे, सोनी सोरी अंकित गर्ग प्रकरण के उठाने से सीधे सीधे बलात्कारी सिस्टम का पर्दाफाश होता और एक आईपीएस को ही नहीं बल्कि पूरी स्टेट मशीनरी, सेंटर गवर्नमेंट के डिपार्टमें आदि चपेटे में आते… मतलब ये कि एक महिला की योनि में पत्थर तक डालने की घटना पर इस कदर भावावेग, बहस, उबाल, चिंत नहीं पैदा हुआ जैसा तरुण तेजपाल कांड को लेकर हुआ है… ऐसा क्यों? बस वही, कि ये कारपोरेट मीडिया हाउसेज स्टेट या सरकार या तंत्र को कभी सीधे सीधे नंगा नहीं कर सकते… अगर ऐसा कर दिया तो लोग क्रांति के लिए दिल्ली को घेर लेंगे.. इसलिए जनमत उन मुद्दों के जरिए बनाया जाता है जिसमें ज्यादा पेंच न हों.. सीधे सीधे एक नायक व एक खलनायक…. सीधे सीधे एक पीड़ित व एक आरोपी पेश किए जा सकें और एक का वध कर दूसरे को न्याय दिलाते हुए कथा का द इंड किया जा सके ताकि जनता यह कह सके कि हां, इस देश में न्याय होता है और देखो, न्याय हुआ…
तरुण तेजपाल कांड में सब कुछ है.. दिल्ली महानगर है, गोवा है, मुंबई है (गोवा वाले आयोजन में अमिताभ बच्चन आदि भी गए थे साथ ही तहलका से जुड़े लोग मुंबई समेत भारत के सारे बड़े महानगरों में हैं), अन्य ढेर सारे शहर हैं… एक जवान लड़की है.. पूरी लंबी चौड़ी कहानी है जिसकी एक-एक परत खोलते हुए देखते हुए हर कोई एक ऐसी दुनिया में चला जाता है जो उसके आसपास है, रोजरोज की है.. सो, इस टीआरपीबाज मसाले पर चैनल क्यों न खेलें… सोशल मीडिया में उबाल क्यों न आए… भाजपा और बंगारू का प्रकरण याद ही होगा जो तहलका के कारण दुनिया के सामने आया था…. मौका मिला है भाजपा को.. मोदी और उनकी महिला मित्र प्रकरण पर भाजपा को कोई जल्दबाजी नहीं है.. लेकिन तरुण तेजपाल प्रकरण पर गोवा क्राइम ब्रांच ने जो तेजी दिखाई है, उससे पूरे देश को समझ में आ रहा है कि तरुण तेजपाल अपनी एक गल्ती के कारण अब ढेर सारे अपने दुश्मनों से बुरी तरह घिर चुके हैं और उन्हें अब काफी देर तक व बहुत कुछ झेलना पड़ेगा… मोदी, भाजपा, आसाराम का प्रचार तंत्र अब तरुण तेजपाल सेक्स कांड को यूं ही नहीं जाने देगा.. क्योंकि पूरे दक्षिणपंथ को एक बड़ा मौका दे दिया है तरुण तेजपाल ने, जो सब कुछ भूलकर इसी मुद्दे को उठाए जिलाए रखते हुए जनपक्षधर व सरोकार की पत्रकारिता का गला घोंटेंगे और देश में अपने हिसाब से कुतर्क भ्रम लोगों के बीच फैलाएंगे…
मैं यह सब लिखकर यह कतई नहीं कह रहा कि कानून अपना काम न करे… सब कुछ करिए, फांसी पर चढ़ा दीजिए तरुण तेजपाल को… लेकिन यह भी तो जरा अकल लगाइए कि आखिर तरुण तेजपाल कांड मीडिया के लिए हाट केक क्यों बन गया और पूरे देश के लिए जबरन इतना जरूरी क्यों बना दिया गया… इसके पीछे को खेल को समझिए.. तेजपाल से भी जघन्यतम सोनी सोरी यौन उत्पीड़न कांड पर जिन लोगों ने सबसे जघन्य चुप्पी साधे रखी, वो लोग आज तरुण तेजपाल कांड पर सबसे ज्यादा चिल्ली रहे हैं और इसी बहाने पूरे तहलका संस्थान को नेस्तनाबूत करा देने पर आमादा हैं… ये हो भी रहा है…
तरुण तेजपाल ने गल्ती की है, इसमे कोई दो राय नहीं है. उन्होंने अपनी गल्ती कुबूल करके और माफीनामा लिखकर ज्यादा हिम्मत का काम किया है… मोदी अभी तक अपने महिला मित्र को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं… पर तरुण तेजपाल ने पीड़ित लड़की द्वारा आइना दिखाए जाने पर गल्ती कुबूल की, प्रायश्चित का ऐलान किया… पर, जब तहलका को नेस्तनाबूत करने का अघोषित अभियान चलाकर तरुण तेजपाल की बुरी तरह फंसाने की फासिस्ट किस्म की साजिशें शुरू हो गई हैं तो अब उन्हें कानून की भाषा में बात करना पड़ रहा है… अपनी बेटी समान तहलका की महिला पत्रकार के साथ तरुण ने बहुत बुरा सलूक किया… यह निंदनीय, घृणित है.. पर क्या उस पीड़ित महिला पत्रकार को यह नहीं समझना चाहिए कि तरुण तेजपाल की अखिल भारतीय स्तर पर अब तक जिस किदर लानत, मलानत, निंदा, विरोध हो चुका है, वह उस शख्स के लिए ताउम्र की सजा है… इतना अपमान झेलकर कोई सहज रह सकता है, इसकी कल्पना नहीं की जा सकती… ऐसे में अगर वो लड़की अब पुलिस केस के जरिए लड़ाई लड़ने जा रही है तो पूरे मामले को नए नजरिए से देखने की जरूरत है.. उसने अपने पहले मेल में जिसमें घटना की विस्तार से जानकारी दी गई है, तहलका की मैनेजिंग एडिटर से आंतरिक न्याय दिलाने की गुहार लगाई है.. उसी मेल के बाद तरुण तेजपाल को पता चल गया कि उन्होंने कितनी नीच व घटिया हरकत की है… पर तरुण तेजपाल व तहलका अपराधबोध से ग्रस्त होते हुए जैसे जैसे माफी, प्रायश्चित, आंतरिक जांच आदि की तरफ बढ़ते गए, उस लड़की की तरफ से इन पर दबाव बढ़ता चला गया… अब न्यूज चैनलों, भाजपा शासित गोवा की पुलिस आदि ने ऐसा कर दिया है कि तरुण तेजपाल दोतरफा पिट गए हैं.. नैतिक आधार पर अपराध कुबूल कर खुद को दंडित करने के बाद अब इसी कुबूलनामे के कारण पुलिस केस में बुरी तरह फंस चुके हैं… मामला यहीं रुकने का नहीं है… काफी आगे जाएगा और धीरे धीरे तहलका इस कदर अलगाव व बदनामी में पड़ेगा कि इसका कोई नामलेवा नहीं रहेगा…
हमारे अतीत में इतिहास में किस्सों कहानियों में ऐसे दर्जनों उदाहरण मिलेंगे जिसमें अपराधी, पापी आदि ने ऐसा प्रयाश्चित किया कि उनसे बड़ा कोई संत न बना… जो चरम गल्ती, चरम अपराध करता है उसके मन में खुद ब खुद चरम प्रायश्चित शुरू होता है और कभी कभी तो यह सुसाइडल भी हो जाता है… तरुण तेजपाल को इतनी सार्वजनिक निंदा, अखिल भारतीय स्तर पर थूथू के बाद मुझे नहीं लगता कि अब कोई और दंड देकर उनकी अकल ठिकाने लाई जा सकती है… उन्हें अब माफ कर देना चाहिए.. लेकिन दुनिया सदिच्छा से नहीं चलती… मेरी निजी रायों, धारणाओं से नहीं चलती.. दुनिया को चलता हुआ दिखाने के लिए ढेर सारी प्रक्रियाओं का परंपरागत तरीके से निर्वाह किया जाता है… हम सब अचानक चिंतक, संविधान निर्माता, कानून निर्माता, लोकतंत्र के रक्षक हो जाते हैं और आदर्श स्थितियों की कल्पनाएं करने लगते हैं… खैर, तरुण तेजपाल को माफी मिले या जेल मिले, उसमें इतनी मेरी दिलचस्पी नहीं है जितनी उनके भीतर से हिल जाने और बदल जाने की प्रक्रिया शुरू होने में है… पर यह उनका निजी रुपांतरण होगा जिससे संभव हो ढेर सारे लोगों को सबक मिले.. मूल बात यही है कि अब ये दौर बहुत सावधान होकर रहने का है.. खासकर लड़कियों के मामले में… बेसिक इंस्टिंक्ट के चक्कर में बहुत बड़ा वाला घनचक्कर बनने से बेहतर है कि पुरुष खुद पर कठोर नियंत्रण करें… खासकर लड़की के मामले में… यह बड़ा मुश्किल काम होगा क्योंकि एक तरफ जहां बाजार, तकनीक, समाज की मूल गति ज्यादा खुलेपन, ज्यादा सेक्सी, ज्यादा कामुक, ज्यादा भ्रमित बनाने की तरफ है तो वहीं नियम-कानून आदि को दिन प्रतिदिन कठोर, निर्मम, जानलेवा बनाया जा रहा है… मेरी निजी सुहानभूति तरुण तेजपाल के प्रति है, क्योंकि उन्होंने जो अपराध किया उसके लिए उन्हें जिस तरीके से अखिल भारतीय स्तर का 'शो' बना दिया गया है, वह उन्हें बाकी जिंदगी में उसी तरह टीस देता रहेगा, जिस तरह उस लड़की को जिंदगी भर टीस मिलती रहेगी उस हरकत से जो तरुण तेजपाल ने उसके साथ किया.. पर क्या हम सब तरुण तेजपाल कांड पर बात करते हुए इतने एकपक्षीय, इतने दुराग्रही, इतने क्रूर राजनीतिक, ठीक से स्कोर सेटल करने वाले बन जाएंगे कि तरुण तेजपाल जैसों के बाकी आचरण, कामकाज को भुलाकर सिर्फ एक अपराध के लिए फांसी देने की मांग करेंगे और इसके नाम पर मोदियों, अंकित गर्गों, के अपराधों को भुला देंगे और सोनी सोरी के साथ हुए भयंकर सेक्स उत्पीड़न पर चर्चा तक नहीं करेंगे.. चीजें वैसी ही नहीं होती, जैसी टीवी, अखबार, मीडिया आदि द्वारा दिखाई जाती हैं.. उसके पीछे इतनी परतें, इतने खेल, इतने बदले, इतने गोल होते हैं कि मूल मुद्दा, मूल एजेंडा, मूल मकसद, पवित्र भावना कहीं बहुत पीछे छूट जाती है… जय हो…
…समाप्त…
भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.
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तरुण तेजपाल अब माफी के लायक हैं (1)
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यह एक्सीडेंट नहीं, जानबूझ कर मारी गई टक्कर है, इसलिए माफी नहीं





