तरुण तेजपाल से जरा ही अलग खुर्शीद अनवर का मामला है

Abhishek Srivastava : बड़े लोगों के अपराध भी बड़े रहस्‍यमय होते हैं। तरुण तेजपाल के मामले में पीडि़ता की ओर से कोई मुकदमा/शिकायत दर्ज नहीं है, लेकिन तरुण ने प्रायश्चित्‍त करते हुए छह महीने के लिए इस्‍तीफा दे दिया है। इससे ज़रा ही अलग खुर्शीद अनवर का मामला है। अलबत्‍ता यहां कोई प्रायश्चित्‍त नहीं हुआ है, लेकिन उनके खिलाफ इंस्टीट्यूट फॉर सोशल डेमोक्रेसी की गवर्निंग बॉडी द्वारा आंतरिक जांच जारी है, ऐसी ख़बर मिली है। पीड़िता यहां भी गायब है, न मुकदमा न एफआइआर।

दोनों ही अपराध अस्‍पष्‍ट हैं। तरुण पत्रकारिता के शिखर पर हैं। खुर्शीद एनजीओ के। दोनों पीडिता फिलहाल चुप हैं। कुछ भी कानूनी नहीं हो रहा, सब कुछ आंतरिक तौर पर निपटाया जा रहा है। जो लोग तरुण तेजपाल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, उन्‍हें खुर्शीद अनवर पर कथित आरोप के मामले में भी हस्‍तक्षेप कर के ऐसी ही मांग करनी चाहिए। दोष सिद्ध हो या नहीं, यह कानूनी बात है लेकिन एक ही श्रेणी के कथित अपराध पर आप आसाराम, तरुण तेजपाल और खुर्शीद अनवर के बीच सिर्फ इसलिए फर्क नहीं बरत सकते कि ''वो तो अपना आदमी है''।

Samar Anarya : यौन हमले भारतीय कानून के तहत अपराध हैं तरुण तेजपाल साहब, कोई नैतिक धार्मिक भूल नहीं। अब यह तो आप जानते ही होंगे कि अपराध की सजा होती है, प्रायश्चित्त नहीं। और हाँ शोमा चौधरी जी, कोई अपराध कहीं का आन्तरिक मामला नहीं होता।

Abhishek Srivastava :  अवांतर: अगर कोई अपराध कहीं का आंतरिक मामला नहीं होता, तो खुर्शीद अनवर के खिलाफ जो आंतरिक जांच आईएसडी में चल रही है उसे क्‍या समझा जाय?

युवा पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारवादी अविनाश पांडेय 'समर' उर्फ समर अनार्या के फेसबुक वॉल से.

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