‘तहलका’ में अगर मेरा कोई बयान आता है, तो उसे फर्जी माना जाए : ज्योति कुमारी

Jyoti Kumari : ‘तहलका’ या किसी भी पत्रिका के लिए मैने कोई भी बयान नहीं दिया है। यदि ‘तहलका’ में मेरे नाम से कोई भी बयान छपता है तो उसे फर्जी माना जाए। 14 अक्टूबर दिन सोमवार को दोपहर में किसी राहुल कोटियाल का फोन आया था, जिसने खुद को ‘तहलका’ का रिपोर्टर बताया। मैने उस समय भी उनको स्पष्ट कहा था कि आप मेरे नाम से जो भी बयान छापेंगे चाहे उसे आपने ‘बतकही’ ब्लॉग या किसी अन्य ब्लॉग, फेसबुक या कहीं और से लिया हो, मेरे नाम से देने से पहले उसका एक-एक शब्द मुझे बता देंगे क्योकि कई बार वाक्य विन्यास और शब्दों का थोड़ा सा खेल पूरा अर्थ बदल देता है और मैं नही चाहती कि सच के अलावा मेरे बयान में कुछ भी जाए।

इसलिए मुझे दिखाए बिना मेरा बयान ना छापे और अगर आप किसी की भी बात इस स्टोरी में बिना नाम के या फर्जी नाम से छाप रहें हैं तो मेरी ओर से कोई भी बात या मेरा नाम अपनी स्टोरी में इस्तेमाल ना करें। मैं ऐसे किसी भी फर्जीवाड़े का शिकार नहीं होना चाहती। उस वक्त उन्होंने आश्वस्त किया था कि मुझे दिखाए बिना, मेरा कोई भी बयान इस्तेमाल नहीं होगा। लेकिन इसके बावजूद मुझे राहुल कोटियाल के मैसेज से यह जानकारी मिली है कि वे मेरे नाम से कोई बयान इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन उस बयान में क्या बातें हैं, यह मेरे पूछने पर भी उसने मुझे नहीं बताया।

बाद में राहुल कोटियाल ने मेरा फोन उठाना बंद कर दिया। उसके बाद मैंने संपादक संजय दुबे को भी फोन किया, लेकिन उन्होंने भी मेरा फोन नहीं उठाया। मैने इस संबंध में राहुल को कई मैसेज किए, जिस हर एक मैसेज की एक कॉपी संपादक को भी भेजी है। इस संबंध में मैंने पुलिस से शिकायत की है, राहुल कोटियाल पुलिस का फोन भी नहीं उठा रहे हैं। इसलिए ‘तहलका’ में अगर मेरा कोई बयान आता है, तो उसे फर्जी माना जाए, और उस बयान से मेरा कोई वास्ता नहीं है। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए मुझे शक है कि इन सबमें कही कोई पावर लॉबी तो काम नहीं कर रही है।

Chandrika Bgl राहुल कोटियाल ऐसा है क्या…? यह एक सेंस्टिव मसला है बगैर ज्योति के राय के किसी तरह का स्टेटमेंट छापना वाकई हद दर्जे ग़लत है. अपेक्षा करता हूं कि ऐसा नहीं करेंगे आप. Jyoti ब्लाग पर जो भी छपा है क्या आप उससे सहमत हैं… क्योंकि अन्य श्रोतों की विश्वसनीयता नहीं है और पूरी बात बतंगड़ जैसी हो गई है. बगैर यह सोचे हुए कि हिन्दी समाज जैसा है उसके क्या प्रभाव पड़ेंगे… किसी के जीवन पर.. प्लीज संभव हो तो बात यहाँ रखिएगा.

Sanjeev Chandan मामले को अपने हिसाब से न तोड़ा -मरोड़ा जाये

Abhishek Srivastava ध्‍यान देंगे Atul Chaurasia Sanjay Dubey Vikas Kumar

Pawan Kumar मै बुरा हूँ …………. कि बुरे को बुरा कहता हूँ  वो भला है कि कुछ कहता नहीं, चुप रहता है !

Samar Anarya अगर ऐसा कुछ किया जा रहा है तो यह निंदनीय तो है ही पत्रकारीय नैतिकता का उल्लंघन भी होगा. ज्योति जी की अनुमति के बिना उनका कोई भी बयान कहीं नहीं छपना चाहिए.

Raj Bahadur Singh Pawar Sahiteykaar apney lekhan me sprite jimmeydar hota h . Usney Jo kaha h vahi likhna chahie nae ki apni

Mool Chandra Gautam यही अंदेशा था कि हिरनी को फ़ांस लिया कुत्तों ने

Samar Anarya Mool Chandra Gautam बहुत आपत्तिजनक, अभद्र और स्त्री विरोधी भाषा है यह सर.

पंकज कुमार झा तहलका का चरित्र ही यही है.

Sanjay Swadesh साप्ताहिक और मासिक का तो कह नहीं सकता , लेकिन दैनिक समाचार पत्र कभी किसी का बयान उसे दिखा-पढ़ा कर तो नहीं ही छापेंगे…बातचीत करके जो अंश जरूरी लगेगा उसे ही बर्जन के रूप में प्रकाशित करेंगे….इतनी दादगिरी की आजादी तो समाचारपत्रों का होनी ही चाहिए…

Mansi Manish छि छि… ऐसी भाषा मूल चंद की… शेम शेम

पंकज कुमार झा अगर बयान देने वाला/वाली मना कर दे तो छापना नैतिक है?

Samar Anarya आप अनैतिक कहना चाह रहे थे शायद पंकज भाई..

Sanjay Swadesh पंकज कुमार झा यदि बर्जन देने वाला मना कर दे तो समाचार के साथ यह लिखा जाएगा कि उसने इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया….ऐसे समाचार तो आपने पढ़े ही होंगे सर…

पंकज कुमार झा आगे प्रश्नवाचक चिन्ह छूट गया था Samar भाई. क्षमा चाहता हूं. ध्यान दिलाने के लिए धन्यवाद. सुधार लिया है.

Sanjay Swadesh कोई केवल अपन बर्जन देने से इनकार दे तो क्या संबंधित मुद्दे को नहीं प्रकाशित करना चाहिए…

Samar Anarya नहीं, पर फिर कोई भी बात उसे atrribute करके नहीं छापनी चाहिए.

पंकज कुमार झा बिलकुल Sanjay Swadesh भाई. 'उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार किया' यह छपने में बुराई नहीं है. लेकिन यहां सवाल मना करने के बावजूद बयान को छापने की आशंका का है. राजनीतिक दल में कम करने के कारण कई ऐसा कटु अनुभव मुझे भी है जब मना करने के बावजूद अखबारों ने बयान को नाम के साथ छापा. ऐसी गुंडागर्दी से बचना होगा.

Mansi Manish वर्जन शब्द बा शब्द छापना चाहिए ना कि तोड़ मरोड़कर, यदि कोई वर्जन नहीं दे रहा तो उसके नाम के साथ लिखो कि यहाँ उनका पक्ष नहीं है

Sanjay Swadesh तोड़ मरोड़ कर प्रकाशित करना निश्चय ही अनैतिक कहा जाएगा…

पंकज कुमार झा हालांकि Jyoti Kumari को एक बार यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि आशीष कुमार 'अंशु' द्वारा उनके हवाले से लिखे गए पोस्ट के एक-एक शब्द से सहमत तो हैं न ?

Samar Anarya और शब्द ब शब्द न बताने की स्थिति में छापने से मना करने के बावजूद छाप देना भी अनैतिक ही होगा.

Somnath Chakraborti अगर आपने कोई बयान सार्वजनिक मंच पर दिया है तो उसे आपके अनुमति के बिना भी छापा जाना चाहिए ! और यह अनैतिक नहीं है !

Mansi Manish वेब मीडिया को परिमार्जित मीडिया की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, पोर्टल और ब्लोग्स ने इन्ही सारी पत्रकारीय आचरणों को चुनौती दी है…यहाँ तथ्यों की पड़ताल किये बगैर, शब्दों में किसी भी प्रकार की मर्यादा कुछ भी ध्यान में नहीं रखा जाता… अंशु की बात चले तो ऐसे सैकड़ों पोर्टल और ब्लॉग सामने लाये जायें जहाँ बाकायदा गलियाँ, रेप पीड़ितों के फोटो आदि आदि आदि पहले भी छप चुके हैं, जिस पर किसी ने सवाल उठाया हो, मुझे नहीं याद पड़ता

Mansi Manish वाह वाह सोमनाथ जी, मान लिया किसी नेता ने लेफ्ट में रहते एक बयान दिया,, आज वो कांग्रेस में है…आप अपने हिसाब से उसका वही बयान छाप देंगे… बहुत बढ़िया.. जरा पत्रकारिता के इस नजरिये से बहार आइये,

Samar Anarya दो गलत एक सही नहीं बनाते मानसी जी. और कम से कम मेरे जैसे लोग तो भास्कर.कॉम जैसे वेब मीडिया के खिलाफ अभियान तक चला चुके हैं तो ऐसा सरलीकृत बयान न देने का आग्रह करूँगा.

Samar Anarya इस पूरे मामले में ज्योति जी की सबसे बड़ी चूक ही यही है कि उन्होंने एक नितांत अविश्वसनीय, घोषित मोदी भक्त को अपनी बात रखने के लिए चुन लिया. वह आदमी जिसने फिर सारी पत्रकारीय नैतिकता ताक पर रखके उनकी तस्वीर तो लगाईं ही, एक इंटरव्यू को टीआरपीखोरी में किश्तों में छापना शुरू किया.

Mansi Manish आपसे सहमत हूँ, लेकिन बयानों की उलटफेर से आप भी खूब परिचित होंगे.. और आप यह भी जानते हैं कि कैसे अस्वस्थामा मरो, नरो व कुंजरो…वाली परंपरा मीडिया के पुराने दिग्गजों ने तैयार की है, जिसे आज भी कुछ पत्रकार ना सिर्फ धो रहे हैं बल्कि नाम चमका रहे हैं

Somnath Chakraborti यहाँ बात पुराने बयान पर नहीं ताजे बयान के संबंध में बताइए न मानसी जी ?? क्या करेंगे आप ??

Prem Prakash तेहलका हमारे लिए विश्वसनीयता का दूसरा नाम रहा है…और इस खबर ने उस विश्वसनीयता को चोट पहुंचाई है….कुछ बातों पर बहस नही हो सकती…नही ही होनी चाहिए….किसी का कोई बयान बिना उसे दिखाए,बताये या उसकी सहमती लिए छपन अगर नैतिकता है….तो ऐसी नैतिकता को चूल्हे में झोंकिये…ये अपने आप में सरासर गलतबयानी है..नैतिकता का जनाजा ही निकाल दिया जायेगा इस तरह की परिभाषाएं गढ़ के….यहाँ एक लड़की अगर खुद मना कर रही है…और आप सहमत भी हो रहे हैं कि आपको दिखाए बिना नही छापेंगे…..फिर उसके बाद भी वही कर के छुप जाना,फोन न उठाना ….और क्या कहानी कहता है इसके अलावा कि आप जानबूझ के ये सब कर रहे हो….और बिक चुके हो..?

पंकज कुमार झा अपनी तमाम कमियों के बावजूद वेब मीडिया ने कोर्पोरेट मीडिया को तमाचा जडा है. जिन चीज़ों को अपने स्वाभाविक दलाली स्वभाव के कारण कोर्पोरेट नहीं छापेगा उसे इस मीडिया ने मंच दिया है. इस मामले में भी एक बड़ी हस्ती के यहां से नौकर का छेड़खानी के आरोप में गिरफ्तार होना अगर किसी भी कथित मुख्यधारा के लिए खबर नहीं है तो लानत भेजिये ऐसे मीडिया को और शाबासी दीजिए इस नए माध्यम को.

Ashok Kumar Pandey एकदम काबिल-ए-एतराज़. बयान इस तरह लादा नहीं जा सकता. लेखक की अनुमति और सहमति से ही उसका बयान शाया किया जाना चाहिए.

Mohammad Anas बिना तहलका का पक्ष जाने आप जजमेंटल क्यों हो जाते हैं साहब ? और फिर ज्योति के साथ वे सब लोग खड़े हैं जो कभी शहला मसूद के लिए चूचां तक नहीं करते तो उनकी विश्वसनीयत इस मामले में तो सवालियां निशान छोडती ही है पंकज कुमार झा जी .

Sheeba Aslam Fehmi Is mamle me bahot log apna career bana rahe hain Jyoti . aap bahot savdhan rahiye.

Ashok Kumar very bad…! but it is quite expected with the Tahalka kind of journalism…and I am sure even the people who indulge in reading Tahalka also do not give too much credence to it…so..not to worry…!

Atul Chaurasia पंकज कुमार झा यहां तहलका के लिए चरित्र प्रमाण पत्र बांट रहे हैं. खैर ज्योति की बात कर रहें लोगों से सिर्फ यही कहना है कि पहले वे ये जान लें कि ज्योंति ने तहलका से कल दोपहर में जो पंद्रह मिनट तक बात करके सारी बातें रखीं थी उनमें क्या था और बाद में वे "किन परस्थितयों" में अपना बयान वापस लेने का नगाड़ा पीट रही हैं. यहां परिस्थितियां महत्वपूर्ण हैं और आपके सारे सवालों का जवाब मिल जाएगा. फेसबुक उसके लिए उचित जगह नहीं है. इस तरह से उछलकूद मचाने की बजाय पहले आप लोग स्टोरी का इंतजार करें… हमारे पास सारी बातचीत की रिकॉर्डिंग मौजूद है…

आशीष कुमार 'अंशु' इस मानवाधिकार के कारोबारी आर्य पांडंेय से कोई पूछिए- राष्ट्रीय स्वयंसेविका संघ की कार्यकर्ता के साथ यदि कोई कम्यूनिस्ट अत्याचार करता है, उसका शोषण करता है, तो घटना की जानकारी मिलने पर यह मार्क्सवादी आर्य पांडेय क्या करेगा? आर्य पांडेय की भाषा से लगता है कि पहले वह पीड़िता की विचारधारा जानेगा और फिर कहेंगा – चूंकि तुम संघी हो तो तुम्हारा कोई मानवाधिकार नहीं है। वह शोषक के साथ इसलिए खड़ा होगा क्योंकि उसकी विचारधारा शोषक के विचारधारा से मेल खाती है।
पांडेय जी तुम कम्यूनिज्म को बेचने भर के लिए कम्यूनिस्ट हो। जिस दिन लगा कि कम्यूनिज्म से कुछ नहीं मिलेगा, उसी दिन तुम भी चंदन मित्रा हो जाओगे।

आशीष कुमार 'अंशु' यहां मुझे स्पष्ट करना जरूरी लगता है कि ज्योति से की गई बातचीत के बाद मेरे ब्लॉग पर जो भी है, वह ज्योति की सहमति से है।

आशीष कुमार 'अंशु' यह बात महत्वपूर्ण है कि ज्योति ने पत्रकार से बातचीत से मना नहीं किया है, वह चाहती थीं कि उनका पक्ष क्या जा रहा है, यह उन्हें बताया जाए, जिसके लिए पत्रकार द्वारा उन्हें आश्वास्त भी किया गया। बाद मे उनका फोन उठाना बंद कर दिया गया, यह किसी भी तरह से नैतिक नहीं कहा जा सकता।

Mazkoor Alam  Atul Chourasiya bhai apne kaha ki jyoti se rahul ki 15 minute baat huee thi. hamein umeed hai ki wo baatcheet unhone record bhi ki hogi. bina jyoti ko bataye ki wo record kar rahe hain. us baatcheet ko unhe sunana chahiye. agar jyoti ne us baatchit me ye kaha hai ki jabtak mujhe na dikha diya jaye ki mere byan me aap kya chhap rahe hain tab tak na chhapa jaye to sari baat ko tab tak off the record mana jayega jab tak ki aap jyoti ko na dikha dein. chunki ye mamla kafi sanvedansheel hai, isliye jyoti ki ye baat jayaz hai. dusri unhone ye bhi kaha hai ki kisi benami admi ke sath unka byan na chhapa jaye. jaise agar koi ye likhta hai ki ek sahityakar ne naam na batane ki shart par kaha…. to is baat ki kitni viswasaniyata hai. yahi galti aashih bhi pahle kar chuke hain. jiske liye ham unki lanat malamat karte rahe hain. ab agar yahi galti tahalka jaisa koi bada sansthan karta hai to ham use yunhi nhi chhod sakte. pakka sabkuchh power ka khel hai. waise rahul ne jyoti ko bhi yahi kaha tha ki un byano me aap par koi arop nhi hai. uske baad bhi jyoti ne ye stand uthaya hai to kabile tareef hai. kyonki farji naam ke aad me bahut farjiwada hota hai, is se ham sab waqif hain.

Dhirendra P Singh 'तहलका' सनसनी पर उतर आया, क्या ? ये क्या हुआ, तरुण तेजपाल !

Mazkoor Alam Atul Chourasiya bhai apne kaha ki jyoti se rahul ki 15 minute baat huee thi. hamein umeed hai ki wo baatcheet unhone record bhi ki hogi. bina jyoti ko bataye ki wo record kar rahe hain. us baatcheet ko unhe sunana chahiye. agar jyoti ne us baatchit me ye kaha hai ki jabtak mujhe na dikha diya jaye ki mere byan me aap kya chhap rahe hain tab tak na chhapa jaye to sari baat ko tab tak off the record mana jayega jab tak ki aap jyoti ko na dikha dein. chunki ye mamla kafi sanvedansheel hai, isliye jyoti ki ye baat jayaz hai. dusri unhone ye bhi kaha hai ki kisi benami admi ke sath unka byan na chhapa jaye. jaise agar koi ye likhta hai ki ek sahityakar ne naam na batane ki shart par kaha…. to is baat ki kitni viswasaniyata hai. lagta hai sabkuchh power ka khel hai. waise rahul ne jyoti ko bhi yahi kaha tha ki un byano me aap par koi arop nhi hai. uske baad bhi jyoti ne ye stand uthaya hai to kabile tareef hai. kyonki farji naam ke aad me bahut farjiwada hota hai, is se ham sab waqif hain.
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आशीष कुमार 'अंशु' यह बहस जारी रखी जा सकती है, लेकिन ऐसा ना हो हम सब 'तहलका' के अंक आने के बाद अपने-अपने कमेन्ट पर अफसोस करें। हम सबको कल तक इंतजार करना चाहिए, कल तहलका का नया अंक बाजार में आ जाएगा।

Mazkoor Alam chahe achchhi report ho tarika to galat hai na bhai. rahul ne bhi jyoti se yahi kaha tha aap par koi aarop nhi hai. iske bawazood usne kaha tha ki benami logo ke aad me kaee farjiwade hote hain. chahe kisi paksh se ho…

Atul Chaurasia alam : wo koi dosti yari ki baat cheet nahi thi ek story ke silsile me liya gaya interview tha. aur apko pata hona chahiye ki har interview record hota hai . ye batane ki nahi akal ki baat hai. aur rahul kaise kisi ko aaropi ya aaropmukt kar skte hai. ye adhikar sirf court ko hai jiski sharan me jyoti kumari gai hai

Mazkoor Alam yahi to mai bhi kah rha hoon agar jyoti kahti hai us recorded baatchit me ki mera interview mujhe dikha kar chhapa jaye to ye uska naitik dayitva banta hai ki wo dikhaye… kanooni bhi…

Dhirendra P Singh आशीष कुमार 'अंशु' जी, कुछ भी हो, किसी की सहमति से हुई वार्ता के बाद यदि उसका प्रकाशन वार्ता से इतर शब्दों में और पंक्चुएशन में छेड़छाड़ करते हुए किया जाएगा तो वह पत्रकारिता अनैतिक ही नहीं निंदनीय कही जायेगी . इसी तरह, वार्ताकार द्वारा कही गयी अपनी बातों को प्रकाशन के बाद असत्य बताना भी उतना ही गलत कहा जाएगा ! दोनों ही स्थितियों में, कानूनी कार्यवाही बनती है !

आशीष कुमार 'अंशु' वास्तव में यदि पत्रकार ने वादा किया था तो उन्हें निभाना चाहिए क्योंकि वे एक प्रतिष्ठित पत्रिका के प्रतिनिधि के नाते बात कर रहे थे। धीरेन्द्र सर, यह मेरा व्यक्तिगत मत है, जिससे आप असहमत हो सकते हैं कि हमें एक बार पत्रिका का इंतजार करना चाहिए। वैसे पत्रकार भी इंसान होता है। भूल किसी से हो सकती है। वैसे इन सारी बातों से महत्वपूर्ण है कि एक बार हम पत्रिका आ जाने दें।

Dhirendra P Singh सहमत ! यहाँ, ज्योति जी की ओर से जो बात रखी गयी है, उसके आधार पर उनके फेसबुक मित्रों की प्रतिक्रया आना भी स्वाभाविक था ! उम्मीद है कि बाज़ार में संदर्भित अंक आने के बाद भी वे अपना पक्ष रखेंगी और मित्र भी !

Atul Chaurasia http://sidmoh.blogspot.in/…

आशीष कुमार 'अंशु' Atul Chaurasia: Bhai us par yadav ji ka bayan aa gaya …..

आशीष कुमार 'अंशु' Anil Yadav ne jo likha hai, vah vastav sharmnak hai…unhen isake liy mafi mangani chahiy…

Mazkoor Alam agar pdf file nhi padhi ja rahi ho to ye lijiye………. Rajendra Yadav:
''बहुत ही अफ़सोस है मुझे कि वेब की दुनिया में मेरे और ज्योति कुमारी के संबंध को लेकर एक से एक कयास लगाये जा रहे है. मैंने हमेशा ज्योति कुमारी को अपनी बेटी की तरह माना है। इस सम्बन्ध में कुछ लोग गैर जिम्मेदाराना टिप्पणी कर रहे है। मै उनकी भर्त्सना करता हूँ। लोगों को सस्ती लोकप्रियता अर्जित करने के लिये ऐसी वैसी बात करने से परहेज़ करना चाहिये।''

Dhirendra P Singh आशीष कुमार 'अंशु' जी, राजेंद्र यादव की सदाशयता और कार्यशैली से हिंदी साहित्य में रूचि रखने वाले लगभग सभी पाठक सुपरिचित हैं! इस प्रकरण उन पर लोग क्या कहते हैं, उससे आज के राजेन्द्र यादव पर कोई ख़ास असर नहीं आएगा ! यदि आएगा भी तो दूसरे पर !

आशीष कुमार 'अंशु' राजेन्द्र यादव के बयान के बाद अनिल यादव अपने लिखे के लिए माफी मांगेगे? अब उन्हें जल्द से जल्द अपनी पोस्ट को वापस लेना चाहिए जो उन्होेंने ज्योति के लिए लिखा है।

Mazkoor Alam jab koi aadmi imandari se ladne par utaru ho jaye to aise chamatkaar hote hain sir… aage bhi honge…

लेखिका ज्योति कुमारी के फेसबुक वॉल से.


पूरे प्रकरण को जानने-समझने के लिए नीचे दिए गए दो शीर्षकों पर क्लिक करें…

जब मैं समझ गई कि राजेंद्र यादव के घर से बच कर निकलना नामुमकिन है, तब मैंने सौ नंबर मिलाया

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राजेंद्र यादव ने तरह-तरह के एसएमएस भेजे, वे साहित्यिक व्यक्ति हैं, इसलिए उनकी धमकी भी साहित्यिक भाषा में थी

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