तहलका स्टिंग ऑपरेशन : भाजपा के पूर्व अध्‍यक्ष बंगारू लक्ष्‍मण दोषी करार

आज से 11 साल पहले तलहका के स्टिंग ऑपरेशन में फंसे बीजेपी अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण रिश्वत लेने के दोषी करार दिए गए। अदालत के फैसले के तुरंत बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। सीबीआई की विशेष अदालत आज उन्हें सजा सुनाएगी। इस रिश्वत कांड में बंगारू लक्ष्मण को अधिकतम 5 साल की सजा हो सकती है। अपने पूर्व अध्यक्ष और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के मौजूदा सदस्य के दोषी करार दिए जाने के बाद चाल चरित्र और चेहरे की दुहाई देने वाली बीजेपी का रंग उड़ा हुआ है।

शुक्रवार को ही सीबीआई की विशेष अदालत रिश्वत कांड में बंगारू लक्ष्मण को दोषी करार दिया है। बंगारू लक्ष्‍मण को हिरासत में लेकर दिल्ली के तिहाड़ जेल भेज दिया गया। लक्ष्मण को कोर्ट ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा-9 के तहत दोषी करार दिया। जज ने कहा कि सीबीआई ने ये साबित कर दिया है कि बंगारू लक्ष्मण ने एक लाख रुपए घूस के तौर पर लिए थे। शनिवार को सजा सुनाई जाएगी। अब सीबीआई की विशेष अदालत शनिवार को ये तय करेगी कि घूस लेने के दोषी पाए गए 72 साल के बंगारू लक्ष्मण को कितनी सजा दी जाए। ये देश में अपनी तरह का पहला ऐसा आपराधिक मामला होगा जिसमें स्टिंग ऑपरेशन में फंसे किसी राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष को सजा मिलेगी।

गौरलबल है कि अनिरुद्ध बहल के तहलका ने 13 मार्च 2001 को अपने स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो जारी किया, जिसमें ये दावा किया गया था कि बंगारू लक्ष्मण ने हथियारों के सौदागर से 1 लाख रुपए रिश्वत ली थी। खुफिया कैमरे में बंगारू लक्ष्मण रक्षा सौदे के फर्जी एजेंट से एक लाख रुपये लेते दिखाई दिए। वेबसाइट 'तहलका डॉट कॉम' ने ऑपरेशन वेस्ट एंड' नाम से अपने स्टिंग ऑपरेशन को अंजाम दिया था। सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक 23 दिसंबर 2000 से लेकर 7 जनवरी 2001 के बीच तहलका के रिपोर्टर ने बंगारू लक्ष्मण से आठ बार हथियार डीलर के तौर पर मुलाकात की। सीबीआई की चार्जशीट में कहा गया है कि 01 जनवरी 2001 को बंगारू लक्ष्मण ने अपने दफ्तर में इन फर्जी एजेंटों से एक लाख रुपये की रकम ली।

स्टिंग ऑपरेशन के खुलासे के बाद साल 2001 में एनडीए सरकार ने इसकी जांच के लिए वेंकटस्वामी आयोग बनाया, लेकिन जनवरी 2003 में जस्टिस के वेंकटस्वामी ने आयोग से इस्तीफा दे दिया। मार्च 2003 में जस्टिस एसएन फूकन आयोग बना। इस आयोग ने पहली रिपोर्ट में जॉर्ज फर्नांडिस को क्लीन चिट दी, लेकिन आयोग की अंतिम रिपोर्ट के पहले ही 2004 में यूपीए सरकार ने फूकन आयोग का काम सीबीआई को सौंप दिया। सीबीआई ने मई 2011 में बंगारू लक्ष्मण के खिलाफ चार्जशीट दायर की। बंगारू लक्ष्मण खुद इस केस की सुनवाई रुकवाने के लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट गए थे, लेकिन उन्हें कोर्ट से राहत नहीं मिली।

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