तिहाड़ जेल से सात मोबाइल फोन बरामद, जांच टीम गठित

तिहाड़ जेल में बंद सौम्या विश्वनाथन की हत्या के आरोपी अमित शुक्ला द्वारा मोबाइल फोन से रंगदारी मांगने के मामले ने जेल प्रशासन की नींद हराम कर दी थी। हर बार जेल प्रशासन जेल के अंदर मोबाइल के उपयोग पर सफाई देता है। साथ ही हर वर्ष जैमर की संख्या भी बढ़ाई जाती है, लेकिन फिर भी कैदियों के पास से मोबाइल बरामद होते हैं। इस बार तिहाड़ जेल की महानिदेशक विमला मेहरा ने सात मोबाइल फोन बरामद होने की पुष्टि की। साथ ही तिहाड़ में मोबाइल फोन पहुंचने के प्रकरण को मानवीय भूल करार दिया। उन्होंने कहा कि जांच के लिए टीम गठित की गई है।

जेल अधिकारी के मुताबिक, तिहाड़ के अलग-अलग जेलों में फिलहाल 11 मोबाइल फोन जैमर लगे हैं और 21 जैमर और लगाए जाएंगे। बावजूद इसके तिहाड़ में मोबाइल का उपयोग धड़ल्ले से चल रहा है। सूत्रों का कहना है कि जेल में लगे जैमर काफी कम क्षमता वाले हैं। जैमर के ऊपरी हिस्से को लोहे या नुकीली चीज से घिस दिया जाता है। इसके बाद हर सेलुलर कंपनी के सिम को मोबाइल सेट में डालकर चेक किया जाता है। जो सिम चल जाता है, उसे लगाकर बातचीत शुरू कर दी जाती है।

ज्यादातर मोबाइल बाहर से ही रिचार्ज कराया जाता है। कैदी फोन की मदद से ही जानकार को रिचार्ज के लिए बोलते है। कैदियों के भाषा में मोबाइल को कबूतर कहा जाता है। प्राय: रात में मोबाइल का इस्तेमाल किया जाता है। जैसे ही गुप्त स्थान पर रखे मोबाइल को बाहर निकाला जाता है, वैसे ही कैदियों के बीच चर्चा गर्म हो जाती है कि कबूतर बाहर आ गया है। जिसे भी बात करनी हो, कर लें। सिर्फ उसे बात में लगे खर्च का दुगुना रिचार्ज कराना पड़ेगा।

जिन कैदियों के पास मोबाइल होता है, वो जेल में बड़े रसूख वाले माने जाते हैं। कैदी मोबाइल को टॉयलेट, दीवार के अंदर, पॉलीथिन के अंदर लपेटकर जमीन के अंदर, कपड़ों में लपेटकर रखते हैं। कैदी ज्यादातर रात में मोबाइल फोन चालू करते हैं और दिन में मोबाइल बंद रखते हैं। जेल प्रशासन हमेशा से जेल के द्वार पर पुख्ता चेकिंग करने का दावा करती है। लेकिन बताया जाता है कि यहीं के कर्मचारी जेल के अंदर मोबाइल और सिम को कैदियों तक पहुंचाते हैं। लेकिन मोबाइल और सिम की कीमत हजारों तक चली जाती है। कभी-कभी कैदी भी कोर्ट में पेशी के बाद अपने साथ मोबाइल और सिम ले आते हैं, जिसमें कई पकड़े भी जाते हैं।

तिहाड़ जेल महानिदेशक विमला मेहरा ने बताया कि इन कर्मचारियों पर नकेल कसने के लिए विजिलेंस की टीम बनाई गई है। ये टीम औचक निरीक्षण करके भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियों को पकड़ते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 13 जेलकर्मियों को निलंबित किया गया, जबकि 35 के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है। वहीं मोबाइल पर प्रतिबंध लगाने के लिए दिल्ली सरकार से बॉडी स्कैनर की मांग की गई है, जो जल्द ही तिहाड़ जेल को उपलब्ध करा दिया जाएगा। इसके बाद मोबाइल पर शत-प्रतिशत रोक लगने के आसार हैं।

दैनिक जागरण में प्रकाशित वरुण कुमार की रिपोर्ट.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *