तीन भ्रष्टाचारियों नीरा यादव, अशोक चतुर्वेदी, राजीव कुमार को चार साल की सजा

नीरा यादव नप चुकी हैं. करप्शन के कारण उन्हें कोर्ट ने चार साल की सजा सुना दी है. वैसे पहले से ही नीरा यादव को महाभ्रष्ट आईएएस अफसरों में माना जाता रहा है. गाजियाबाद से मिली जानकारी के मुताबिक नोएडा प्लाट आवंटन घोटाले में नोएडा प्राधिकरण की पूर्व सीईओ एवं यूपी की पूर्व मुख्य सचिव नीरा यादव और प्राधिकरण के पूर्व डीसीईओ राजीव कुमार दोषी को अदालत ने तीन साल कैद और भारी जुर्माने की सजा सुनाई.

फ्लेक्स इंडस्ट्रीज के सीईओ अशोक चतुर्वेदी को भी दोषी करार देते हुए 4 साल की सजा सुनाई गई है. सजा का ऐलान होते ही पुलिस नीरा को गिरफ्तार कर ले गई. एक और मामले में कैलाश हास्पिटल को जमीन देने के आरोप से कोर्ट ने नीरा यादव को बरी कर दिया.

इससे पूर्व वर्ष 2010 में सीबीआइ कोर्ट नीरा यादव को एक अन्य भूखंड आवंटन मामले में चार साल कैद की सजा सुना चुकी है.  इस मामले में सीबीआई ने दो चार्जशीट दाखिल की थीं जिनमें नीरा यादव पर 1994 में नोएडा अथारिटी की सीईओ रहते हुए आईएएस राजीव कुमार और अपनी दोनों पुत्रियों के नाम नियम के विपरीत जमीन आवंटन का आरोप लगाया गया था. इससे पूर्व सीबीआई कोर्ट सात दिसंबर, 2010 को नीरा यादव तथा यूफ्लैक्स के मालिक अशोक अग्रवाल को चार-चार साल कैद की सजा सुना चुकी है.

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के फिरोजपुर गांव की रहने वाली नीरा यादव का चयन भारतीय प्रशानिक सेवा में 1971 बैच में हुआ था. नीरा यादव के पति महेंद्र सिंह यादव भी आइपीएस अधिकारी थे, जिन्होंने बाद में राजनीतिक कारणों से इस्तीफा दे दिया था.  नीरा यादव को उत्तर प्रदेश के लगभग सभी महत्वपूर्ण जगहों पर काम करने का मौका मिला. इस दौरान अपनी पहुंच के कारण उन्होंने काफी धन कमाया. इस कारण उन पर भ्रष्ट अफसर होने का लेबल लगा.

बदनामियों के बावजूद अपने राजनीतिक रसूख के कारण नीरा यूपी की मुख्य सचिव बनने में सफल रहीं. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उन्हें पद से हटना पड़ा. नीरा यादव के हटने के बाद अखंड प्रताप को प्रदेश का मुख्य सचिव बनाया गया. नीरा यादव रिटायरमेंट के बाद वर्ष 2009 में भाजपा में शामिल हुईं. पर करप्शन की चर्चा के कारण वह राजनीति में एक्टिव नहीं हो पाईं. आज गाजियाबाद की सीबीआई की विशेष अदालत ने नीरा यादव को जमीन आवंटन घोटाले मामले में दोषी मानते हुए 4 साल की सजा सुनाई है.

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