तेजपाल के बहाने तहलका का शिकार चल रहा है

आज लगातार छठवें दिन टाइम्स ऑफ इंडिया ने तेजपाल कांड को मुख पृष्ठ (front page ) की खबर बनाई है। 22, 23, 24, 25, 26 और आज 27 नवम्बर को तेजपाल कांड, TOI की फ्रन्ट पेज की खबर है। आज फ्रंट पेज के साथ-साथ पेज नं 5 पर टाइम्स नेशन पर कुल चार खबरों में से तीन खबरें तेजपाल पकरण की हैं। पहली मुख्य खबर चार कॉलम की बॉक्स के साथ, दूसरी दो कॉलम की, तीसरी तेजपाल को गिरफ्तार करने की बीजेपी कि मांग। पेज 7 टाइम्स नेशन पर तीन कॉलम की बड़ी सी खबर। 22, 23 और 24 (रविवार) को तेजपाल काण्ड मोटी-मोटी हेडिंग्स के साथ मुख पृष्ठ की मुख्य खबर थी। 26 नवम्बर को पेज 5 टाइम्स नेशन पर कुल सात खबरें।
 
कुल सातों खबरें तेजपाल प्रकरण की, arrest rapist tarun tejapal emmediatly नामक शीर्षक और फोटो के साथ। पीड़िता के full email के साथ। अरुंधती राय का पूरा, बड़ा सा बयान। ये अलग बात है कि इन्हीं अख़बारों ने अरुंधती राय को देशद्रोही और गद्दार तक घोषित कर दिया था। पिछले छः दिनों में बहुत कुछ हुआ। छत्तीसगढ़, मिजोरम और मध्य प्रदेश में चुनाव हुआ। मीडिया के लिये सबसे बड़ा मुद्दा, आरुषि हत्याकांड का फैसला आया। ईरान का अन्य देशों के साथ महत्वपूर्ण समझौता हुआ। जहीर खान की वापसी और आनन्द की हार हुई। देश की सबसे बड़ी खबर, देश के भावी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के 'साहेब और शाह' जासूसी काण्ड का खुलासा हुआ। आईएएस प्रदीप शर्मा ने बड़ा खुलासा किया। लेकिन इन खबरों की बाढ़ के बीच टाइम्स ऑफ़ इंडिया के लिए मुख्य खबर है तेजपाल कांड। 
 
इस देश में बलात्कार की संस्कृति को सबसे ज्यादा बढ़ावा देने वाला टाइम्स ग्रुप, औऱत को एक इंसान से एक माल (comodity), एक उपभोक्ता वस्तु बनाने में सबसे ज्यादा योगदान देने वाला टाइम्स ग्रुप, बिजनेस घरानों और कम्पनियों से पैसा लेकर खबर छापने की शुरुआत करने वाला टाइम्स ग्रुप, अखबार को पैसा कमाने की मशीन बनाने वाला टाइम्स ग्रुप, पेड न्यूज़ के दलदल में आकण्ठ डूबे टाइम्स ग्रुप और इसी टाइप के तमाम मीडिया ग्रुपों से इसी तरह की पत्रकारिता की उम्मीद की जा सकती है। तेजपाल को उसके कुकृत्य के लिए सजा मिलनी चाहिए, नहीं, बहुत पहले ही मिल जानी चाहिए थी लेकिन अखबारों, चैंनलों को अपने-अपने तेजपालों को भी एक्सपोज करना चाहिए। लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया जैसे अखबारों और 'जनरल' अर्णव गोस्वामी जैसे फतवा देने वाले पत्रकारों की प्राथमिकता में कहीं भी स्त्री नहीं है। स्त्री अस्मिता, स्त्री स्वतंत्रता, स्त्री बराबरी इनके एजेण्डे में हो भी नहीं सकती। पीड़िता के सहारे किसी तहलका, बाबा और सेलेब्रिटीज़ का कैसे शिकार कर लिया जाये। बलात्कार को किस तरह से बेंच कर टीआरपी कमा ली जाये। ये इनकी प्राथमिकता में सबसे ऊपर है। 
 
                        लेखक प्रशान्त कुमार मिश्र माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल में पत्रकारिता के छात्र हैं. इनसे 09826181687 के जरिए संपर्क किया जा सकता है.

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