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तो क्या बदल जाएँगी कानपुर की सभी विधानसभा सीटें?

कानपुर के सभी दस सीटों पर मतदान शांतिपूर्ण संपन्न हुआ. विगत विधानसभा चुनाओं में यहाँ लगभग चवालीस प्रतिशत मतदान रहा था, इसकी अपेक्षा आज 57 प्रतिशत मतदान हुआ. प्रदेश में हो रहे चुनाव के पूर्व के चरणों की भांति कानपुर में भी मतदान का प्रतिशत बढ़ने के साथ पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण संपन्न हुयी. कहीं किसी प्रकार कि अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली. एक दो जगहों पर मशीन कि गड़बड़ी के कारण कुछ समय के लिए मतदान प्रक्रिया बाधित रही पर कोई खास विरोध आदि नहीं हुआ. मतदाता सूची में काफी मतदाताओं के नाम कटे हुए थे जिस वजह से हजारों मतदाता वोटर कार्ड धारक होने के बावजूद बिना वोट डालने रह गए.

कानपुर के सभी दस सीटों पर मतदान शांतिपूर्ण संपन्न हुआ. विगत विधानसभा चुनाओं में यहाँ लगभग चवालीस प्रतिशत मतदान रहा था, इसकी अपेक्षा आज 57 प्रतिशत मतदान हुआ. प्रदेश में हो रहे चुनाव के पूर्व के चरणों की भांति कानपुर में भी मतदान का प्रतिशत बढ़ने के साथ पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण संपन्न हुयी. कहीं किसी प्रकार कि अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली. एक दो जगहों पर मशीन कि गड़बड़ी के कारण कुछ समय के लिए मतदान प्रक्रिया बाधित रही पर कोई खास विरोध आदि नहीं हुआ. मतदाता सूची में काफी मतदाताओं के नाम कटे हुए थे जिस वजह से हजारों मतदाता वोटर कार्ड धारक होने के बावजूद बिना वोट डालने रह गए.

कानपुर नगर की शहरी सीमा में कल्यानपुर में प्रदेश सरकार में पूर्व मंत्री रहीं प्रेमलता कटियार भाजपा से प्रत्याशी थीं, उनका सीधा मुकाबला बसपा के निर्मल तिवारी और सपा के सतीश निगम से था. इस त्रिकोणीय संघर्ष में कांग्रेस के देवी प्रसाद तिवारी ने कहीं-कहीं मतदाताओं को रिझाने में पूरी मशक्कत कर मुकाबला चतुष्कोणीय करने की असफल कोशिश की. निर्मल तिवारी ने ये सीट पिछले चुनावों में कुछ सौ वोटों से गंवाई थी. पर इस बार फिर युवा वोटर का साथ क्या परिणाम देता है स्पष्ट नहीं है. वैसे पिछली बार केवल युवा वोटर का साथ उन्हें गैर-गंभीर बना गया था और उनकी हार का कारण बना था.

छावनी सीट पर कांग्रेस के अब्दुल मन्नान ने सुबह से ही बढ़त जारी रखी. भाजपा के गुमनाम और बहरी प्रत्याशी रघुनंदन सिंह भदौरिया, सपा के हसन रूमी, बसपा के सोहेल अंसारी और पीस पार्टी के मो. ताहिर पर जनतादल (यू) के अशोक बाजपेयी भारी रहे. इस तरह सीधे मुकाबला इस सीट पर मानना और अशोक बाजपेयी के बीच रहा. अशोक बाजपेयी का सक्रिय और बेदाग़ युवा होना छोटी पार्टी का प्रत्याशी होने के बाद भी काफी लाभदायक रहा. भविष्य के चुनावो में उसकी ये छवि लाभदायक होगी. मुस्लिम बाहुल्य इस सीट पर सपा का बार-बार प्रत्याशी बदलना पार्टी के लिए घातक साबित हुआ.

ब्राह्मण बाहुल्य किदवईनगर सीट पर कांग्रेस के दबंग प्रत्याशी अजय कपूर से सभी प्रत्याशी लड़ते रहे. भाजपा के विवेकशील शुक्ला, सपा के ओमप्रकाश मिश्रा और बसपा के श्याम सुन्दर गर्ग ने पूरी ताकत अजय कपूर को हराने के लिए लगा रखी थी. केन्द्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने भी अंदरखाने अजय कपूर को हरवाने की साजिश की थी. परन्तु कानपुर के एक भू-माफिया और अपराधी वकील ने छिपे तौर पर विवेकशील का साथ "जनेऊ" के नाम पर देकर मामला काफी गंभीर कर दिया. अब जनता का फैसला मशीनों में बंद हो चुका है. अजय कपूर ने तीसरी बार जीतने के लिए धन, जन और गन-बल से पूरी तैयारी की थी और अपने वोटरों को बताया था कि इस बार वो मंत्री पद के दावेदार हैं इसलिए उन्हें जिताएं.

गोविंदनगर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के पूर्व विधायक सत्यदेव पचौरी और कांग्रेस के शैलेन्द्र दीक्षित में सीधा मुकाबला रहा. बसपा के युवा प्रत्याशी सचिन त्रिपाठी और सपा के अशोक अन्शवानी ने भी टक्कर में बने रहने के लिए जी-तोड़ मेहनत की. पर वो मतदाताओं को जीत दिलाने लायक प्रभावित ना कर सके. उनकी स्थिति 'वोटकटवा' की ही रही. सीसामऊ विधानसभा में सपा के हाजी इरफ़ान सोलंकी, कांग्रेस के संजीव दरियाबादी और भाजपा के हनुमान मिश्र में मुकाबला था. बसपा के मो. वसीक के भी प्रत्याशी होने से चुनाव दिलचस्प हो गया. हिन्दू खासकर सवर्ण मतदाताओं के बल पर हनुमान मिश्र कि स्थिति मजबूत बनी हुयी है. मुस्लिम मतों का बिखराव उनके पक्ष में रहा. इरफ़ान और संजीव निवर्तमान विधानसभा में सदस्य रहे हैं पर परिसीमन के चलते आमने-सामने हैं.

आर्यनगर विधानसभा में पूर्व मेयर और कांग्रेस प्रत्याशी अनिल शर्मा ने भाजपा प्रत्याशी सलिल विश्नोई को तीसरी बार विधान सभा में घुसने से रोकने के लिए मतदाताओं को रिझाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. राहुल गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सभाओं और अनिल शर्मा की स्वच्छ छवि का फायदा उन्हें मिला. दूसरी तरफ सपा के जीतेन्द्र बहादुर सिंह और बसपा के कैलाश शर्मा आखिर तक अपना चुनाव न उठा सके. भाजपा के भितरघातियों ने भी सलिल को निपटने की कमर कसी थी पर एन वक्त वो सहम गए और समर्पण कर बैठे. कानपुर की हाई-प्रोफाइल महराजपुर सीट इस बार फिर दिलचस्प बनी हुयी है. इस सीट पर इतिहास बन सकता है. भाजपा के ब्राह्मण विरोधी पूर्व नगर विकास मंत्री सतीश महाना के हारने की पूरी संभावना बनी हुयी है. बसपा सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे अनंत कुमार मिश्र "अन्टू" कि पत्नी शिखा मिश्रा और सपा के दबंग एम.एल.सी. लाल सिंह तोमर कि पत्नी व विधायिका अरुणा तोमर आमने-सामने हैं. कांग्रेस के धर्मराज सिंह और निर्दलीय प्रताप यादव चौथे नंबर कि लड़ाई में आमने-सामने हैं. पिछली बार अन्टू मिश्र बहुत नजदीकी मुकाबले में अरुणा तोमर से चुनाव हारे थे. इस बार बसपा में पूर्व घोषित प्रत्याशी अजय प्रताप सिंह के टिकट काटने के बाद सपा में शामिल हो जाने का प्रभाव भी रहने कि आशा राजनीतिक हलकों में बतायी जाती है.

लेखक अरविंद त्रिपाठी कानपुर में पत्रकार हैं तथा चौथी दुनिया से जुड़े हुए हैं

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