दलाली के चक्कर में बिहार बीएसएनएल को बर्बाद करने की योजना

बीएसएनएल बिहार सर्किल बिहार में लगभग 2000 मोबाइल टावर लगाने की तैयारी कर रहा है ताकि बीएसएनएल के उपभोक्ताओं को अधिक कनेक्टिविटी मिल सके. इन सबमें हैरान कर देने वाली बात यह है कि ये बीटीएस भारती एयरटेल के टावरों पर लगेंगे. बीएसएनएल के एक अधिकारी के मुताबिक ऐसा बीएसएनएल सिर्फ पैसे की बचत को ध्यान में रख कर रही है.

इस स्थिति को देखते हुए जो बुनियादी सवाल उठते हैं उनमें सबसे पहला यह है कि भारती एयरटेल की बीएसएनएल के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा है. इस स्थिति में बीएसएनएल की सेवा को भारती एयरटेल बाधित नहीं करेगा, इसकी क्या गारंटी है. दूसरा कि मोबाइल टावरों की कुछ निश्चित ऊंचाई होती है इसमें भारती एयरटेल स्वयं को पहली प्राथमिकता देगा ये बात तय है. उसके बाद भारती एयरटेल ने अपने मोबाइल टावर पर कई अन्य निजी कंपनियों को अपना बीटीएस किराये पर लगाने दिया है. इस क्रम में बीएसएनएल का नंबर सबसे नीचे है लिहाजा बीएसएनएल के बीटीएस भारती एयरटेल के टावर पर सबसे कम ऊंचाई पर लगाने तय हैं.

इस स्थिति में बीएसएनएल अपने उपभोक्ताओं को कितनी अधिक कनेक्टिविटी दे पायेगा, इस पर एक बड़ा प्रश्न चिह्न है. तीसरा एक बड़ा और सबसे अहम सवाल है रेंट का, आखिर कितने रुपये का करार है दोनों के बीच और प्रति टावर भारती एयरटेल बीएसएनएल से कितने रुपये लेगा.

इस करार में बीएसएनएल के बिहार के सीजीएम विजय कुमार की सर्वोच्च भूमिका रही है. बिहार के कई जगहों पर बीएसएनएल और भारती एयरटेल के टावर महज 5 से 10 कदम की दूरी पर हैं जहाँ बीएसएनएल का मोबाइल टावर उपलब्ध है. महज 5 से 10 कदम की दूरी पर भारती एयरटेल के टावर पर बीएसएनएल का एक नया बीटीएस लगाने की कवायत में बीएसएनएल है जो मुह फाड़ कर भ्रष्टाचार की कहानी बया कर रहा है. आप ही बताइए एक ही कंपनी के टावर महज 5 से 10 कदम की दूरी पर रह कर किसका भला हो सकता है और इसकी क्या उपलब्धता रहेगी? 

जानकारी के मुताबिक बीएसएनएल के बिहार के सीजीएम विजय कुमार के पुत्र भारती एयरटेल में एक बड़े पोस्ट पर कार्यरत हैं और इस डील के बाद बीएसएनएल के बिहार के सीजीएम विजय कुमार के पुत्र को एयरटेल ने पदोन्नति भी दी है. इतना ही नहीं जानकारों के मुताबिक इस डील में कुल 200 करोड़ की दलाली भी बीएसएनएल के बिहार के सीजीएम विजय कुमार सहित बिहार में बीएसएनएल में बड़े पोस्ट पर बैठे अधिकारियों और पटना के कई दिग्गज कहे जाने वाले पत्रकारों तक पहुची है. शायद इन्ही वजहों से पटना के किसी पत्रकार ने इस 200 करोड़ की दलाली का पर्दाफाश नहीं किया. इस परिस्थिति में सबसे अधिक फायदा किसे होगा और क्या पूरे बिहार में बीएसएनएल के 2000 मोबाइल बीटीएस भारती एयरटेल के टावर पर लगाने के पीछे कहीं भारती एयरटेल को मुनाफा पहुचाने, दलाली और बीएसएनएल के अधिकारियों की तरफ से बीएसएनएल को बर्बाद करने की योजना तो नहीं है?

एयरटेल को दोतरफा फायदा पहुचाने और बीएसएनएल को बेचने की एक सुपर योजना बीएसएनएल के बिहार के सीजीएम विजय कुमार ने बनाई है. यहाँ सवाल ये है कि बिहार में कुकुरमुत्ते की तरह मोबाइल कंपनी हैं फिर 99 फीसदी डील एयरटेल के साथ क्यों की गई? महज 5 से 10 कदम के बीच बीएसएनएल के दो टावरों की क्या उपलब्धता है? निश्चित तौर पर दलाली के भ्रष्टाचार में बीएसएनएल को बर्बाद करने की योजना है.

पटना से ओझा वीके की रिपोर्ट

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