दलित दस्‍तक की लांचिंग आज, पहुंचें गांधी शांति प्रतिष्‍ठान

देश में दलित-पिछड़ों की आवाज को मंच देने तथा इस समाज के दबे-छुपे नायकों को सामने लाने के लक्ष्‍य के साथ 27 मई को मासिक पत्रिका 'दलित दस्‍तक' की लांचिंग की जा रही है. लांचिंग समारोह का आयोजन गांधी शांति प्रतिष्‍ठान में दिन में दो बजे से किया गया है. इसमें कई वरिष्‍ठ पत्रकार भाग लेंगे. पत्रिका के संपादक-प्रकाशक अशोक दास हैं. अशोक दास पिछले छह सालों से पत्रकारिता करते हुए अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं.

संपादक अशोक दास का कहना है‍ कि हम पॉजिटिव सोच के साथ इस पत्रिका की लांचिंग कर रहे हैं. जिस समाज की बात वर्षों से मीडिया में नहीं आ पा रही है हम उनकी आवाज को सबके सामने रखने का प्रयास करेंगे. दलित-ओबीसी के दबे-छुपे नायकों को सबसे सामने लाएंगे. हम दलित समाज की उपलब्धियों को सामने रखेंगे, जिन्‍हें मुख्‍यधारा की मीडिया में जगह नहीं मिलती. गीतकार शैलेंद्र दलित थे, उधम सिंह इसी समुदाय से आते हैं, कितने लोगों को पता है? हम ऐसे ही नायकों को उनके समुदाय के सामने लाने का काम करेंगे. हम इस विशाल समुदाय को उसकी पहचान बताने की कोशिश करेंगे.

अशोक दास कहते हैं कि हम समाज में विरोध की पत्रकारिता नहीं बल्कि एक बड़े दबे-कुचले समाज की उपलब्धियों को सामने लाएंगे. वे बताते हैं कि इस पत्रिका में हर विषय को जगह देने की कोशिश की गई है. राजनीति, शिक्षा, लाइफ स्‍टाइल, समस्‍या जैसे परम्‍परागत विषयों के साथ फेसबुक के लिए भी कुछ पन्‍ने तय किए गए हैं ताकि इन होने वाले विमर्शों को भी स्‍थान दिया जा सके. मेहमान लेखकों के लिए भी जगह निर्धारित किया गया है ताकि लोग अपनी बात रख सकें. 'दलित दस्‍तक' पत्रिका के संपादकीय मंडल में अवै‍तनिक रूप से वरिष्‍ठ पत्रकार रवीश कुमार, दिलीप मण्‍डल, जय प्रकाश कर्दम, अनीता भारती, सुशील कुमार, नीतिन नेतराम, सुनील कुमार सुमन व प्रो. विवेक कुमार शामिल हैं. कार्यक्रम में संपादक मण्‍डल के पत्रकारों के अलावा आनंद श्रीकृष्‍ण, शेष नारायण सिंह, रमेश भंगी भी शामिल होंगे.

इस पत्रिका की कीमत 20 रुपये रखी गई है. सालाना सब्‍शक्रिप्‍शन 250 रुपये निर्धारित किया गया है. संपादक मण्‍डल ने स्‍पष्‍ट रणनीति बनाई है कि वे ऐसा कोई विज्ञापन नहीं प्रकाशित करेंगे जो उनकी नीतियों के खिलाफ हो. मैगजीन 54 पेज का होगा, जिसमें आठ पेज रंगीन तथा बाकी पेज ब्‍लैक एंड व्‍हाइट होंगे. पत्रिका के संपादक अशोक दास की गिनती जुझारू पत्रकारों में होती है. आईआईएमसी से पासआउट अशोक दास ने करियर की शुरुआत लोकमत समाचार, औरंगाबाद से की थी. इसके बाद वे अमर उजाला, अलीगढ़ के साथ रिपोर्टर के रूप में जुड़ गए. इसी दौरान राज ठाकरे द्वारा उत्‍तर भारतीयों पर हमले के खिलाफ इन्‍होंने अमर उजाला छोड़कर देश में कई किलोमीटर की यात्रा की.

अशोक दास अलीगढ़, मेरठ, गोरखपुर, बनारस, दिल्‍ली व पटना समेत कई शहरों की यात्रा करते हुए यहां स्‍थापित विश्‍वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं से मिले तथा उनका समर्थन हासिल किया. इसके बाद सैकड़ों लोगों के हस्‍ताक्षर युक्‍त पत्र राष्‍ट्रपति को सौंपा. यात्रा से वापस लौटने के बाद ये भड़ास के साथ भी जुड़े रहे. भड़ास के लिए काम करने के बाद ये देशोन्‍नति से दिल्‍ली ब्‍यूरोचीफ के रूप में जुड़ गए. अभी भी वे देशोन्‍नति को अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इसके साथ ही अशोक दास दलितमत नाम की एक वेबसाइट का संचालन भी कर रहे हैं. अशोक दास कहते हैं कि देशोन्‍नति मे मालिक प्रकाश पोहरे के समर्थन के चलते ही वे इतना बड़ा कदम उठा पाने में सक्षम हो सके हैं. 

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