दस साल में उदयपुर के दस हॉकरों ने की आत्‍महत्‍या

: कमिशन बढ़ाने की मांग लेकर आंदोलनरत हैं अखबार विक्रेता : उदयपुर में अंधेरी रात में घर-घर तक चुपचाप अखबार पहुंचाने वाले और गरीब तबके से ताल्लुक रखने वाले उदयपुर के हॉकरों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं है। मुफलिसी और तंगहाली में जीने वाले हॉकरों के लिए यह हड़ताल भारी पड़ रही है लेकिन विज्ञापनों और अन्य गोरखधंधों से लाखों के वारे-न्यारे करने वाले अखबार मालिकों का दिल नहीं पसीज रहा है। पिछले दस साल में उदयपुर में एक के बाद एक कुल दस हॉकरों ने आर्थिक तंगी के चलते मौत को गले लगा लिया। हड़ताल के बाद अब पूरा शहर कह रहा है कि हॉकरों की कमीशन बढ़ाने की मांग जायज है। क्या अखबार मालिक इस ओर ध्यान देंगे?

उदयपुर में हॉकरों की छह दिन की हड़ताल ने राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर प्रबंधन और कर्मचारियों को छठी का दूध याद दिला दिया है। हड़ताल से खफा और खींझ खाए अखबारों के प्रबंधन ने इस लड़ाई में अपने कर्मचारियों को ही 'कोल्हू के बैल' बना कर निचोडऩा शुरू कर दिया है। उनकी ऐसी हालत कर दी है कि अब कर्मचारियों को सोते-जागते अखबार के बंडल के सपने आने लगे हैं। लगातार पांच दिन-रात जाग-जाग कर, झिड़कियों के सितम सह कर हताश और नींद के बोझ के मारे कर्मचारियों का धैर्य जवाब देने लगा है। दबे-छिपे ही सही, निष्ठुर अखबार मालिकों के प्रति अंदरखाने आक्रोश भड़कने लगा है। राजस्थान पत्रिका ने अपने मार्केटिंग, सर्कुलेशन, विज्ञापन विभाग, एडिटोरियल, पेस्टिंग और मशीन के साथ ही चैनल24 न्यूज, 95 एफएम तड़का व फाइंड इट के स्टाफ तक की रातों की नींद हराम कर दी है।

पत्रकार कर्मचारियों की भड़ास है कि यही वो प्रबंधन है जो पिछले महीने यूआईटी के भूखंड आबंटन के समय कर्मचारियों को अनुभव प्रमाण पत्र देने से मुकर गया था। हद तो तब हुई जब अपने ही कर्मियों को पत्रिका का हिस्सा मानने से इनकार कर दिया गया। आज उसी स्टाफ से अखबार के बंडल उठवाए और बिकवाए जा रहे हैं। दैनिक भास्कर ने भी चिर परिचित 'खून चूसक' अंदाज में कर्मचारियों को अखबार की साख के नाम पर 'स्वैच्छिक रक्तदान' को मजबूर किया है। हालत यह कि जीएम और सीनियर रिपोर्टर बंडल उठा कर कॉपियां घरों में फेंक रहे हैं। यही नहीं प्रबंधन ने राजसमंद और अन्य ब्यूरो कार्यालयों से भी कर्मचारियों को यहां बुलाकर उन्हें जबरन हॉकर बना दिया है।

हॉकरों की हड़ताल का लगता है प्रबंधन पर कोई असर नहीं पड़ रहा है तभी तो रविवार को बापू बाजार में अलका पब्लिसिटी के बाहर भास्कर के जीएम शेखावत और आरपी के संपादक राजेश कसेरा, जीएम अरुण शाह ने साथ बैठ कर चाय की चुस्कियां लगाईं। यह बात दीगर कि इस दौरान हॉकरों ने जमकर 'हाय-हाय' के नारे लगाए। गौरतलब है कि हॉकर पिछले एक सप्‍ताह से अपना कमिशन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

 

 
 

 

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