वरिष्ठ पत्रकार दिबांग अब एबीपी न्यूज में नौकरी करने लगे हैं. पहले वे आजाद पत्रकार थे और टीवी चैनलों पर डिस्कशन वगैरह में शामिल होते रहते थे. बीच में एक फिल्म मद्रास कैफे में भी दिबांग दिखे थे. दिबांग का स्वर्णिम काल एनडीटीवी के साथ रहा. तब वे वहां मैनेजिंग एडिटर हुआ करते थे और उनकी तूती बोला करती थी. अपनी तानाशाही के कारण दिबांग एनडीटीवी के भीतर और बाहर काफी अलोकप्रिय हो गए. आखिरकार एनडीटीवी ने एक दिन उनसे मुक्ति पा ली. उसके बाद दिबांग ने कहीं ज्वाइन करने की जगह विभिन्न किस्म के प्रयोग किए और आजाद पत्रकारिता की राह अपनाई. अब जानकारी मिल रही है कि एबीपी न्यूज ने उन्हें पूरी तरह अपने साथ जोड़ लिया है.
प्रभात रंजन दीन अब कैनविज टाइम्स, लखनऊ से कार्यमुक्त हो गए हैं. कैनविज टाइम्स प्रबंधन उनसे काफी समय से मुक्ति चाहता था. इसी कारण कैनविज टाइम्स के बरेली एडिशन की लांचिंग से दीन को अलग रखा गया. अनुपम मार्कंडेय और मुशाहिद रफत के नेतृत्व में अखबार की लांचिंग बरेली में की गई. अपनी उपेक्षा के कारण प्रभात रंजन दीन ने इस्तीफा दे दिया. सूत्रों का कहना है कि कन्हैया गुलाटी के मालिकाना वाले कैनविज टाइम्स के संपादकीय विभाग में अब मार्केटिंग एप्रोच वाले लोग ज्यादा रखे जा रहे हैं ताकि अखबार के जरिए गुलाटी के धंधों को बढ़ाया जा सके, साथ ही विज्ञापन और पेड न्यूज का भी कारोबार हो सके.
जहरखुरानी के कारण प्रभात खबर, देवघर के संपादक सुशील भारती इन दिनों बेहोशी की स्थिति में अस्पताल में भर्ती हैं. सुशील भारती अपने रिपोर्टर संजीत मंडल के साथ ट्रेन से धनबाद जा रहे थे. ट्रेन में जहरीली चाय इन्हें कुछ लोगों ने पिला दी जिसके बाद बेहोशी की स्थिति में चले गए. उन्हें धनबाद में एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है.





