दिलीप मंडल का इंडिया टुडे (हिंदी) में वेरी गुड काम, अरुण पुरी ने दिया इनाम

दिलीप मंडल ने इंडिया टुडे हिंदी मैग्जीन में इतना अच्छा काम किया है कि मालिक अरुण पुरी प्रसन्न हो गए और उन्होंने मंडल का पद बढ़ा कर बड़ा कर दिया है. उन्हें कार्यकारी संपादक से मैनेजिंग एडिटर बना दिया गया है. यानि कि व्यवस्था संपादकों की भीड़ में एक और नाम शामिल हो गया है.

इस बारे में अमरेंद्र यादव अपने फेसबुक वॉल पर लिखते हैं : ''उत्‍तर भारतीय मीडिया संस्‍थानों में 'फैसला लेने वाले पदों' पर दलित-ओबसी और आदिवासियों की संख्‍या बहुत कम है। दिलीप मंडल और दीपक चौरसिया जैसे चंद लोग ही, इन पदों पर पहुंच सके हैं। उम्‍मीद की जाने चाहिए कि, उच्‍च शिक्षा में आरक्षण की व्‍यवस्‍था लागू होने के बाद, अब आने वाले वर्षों में इन तबकों के लोग ज्ञान के विभिन्‍न क्षेत्रों में पर्याप्‍त संख्‍या में दिखने लगेंगे। आप कितना रोकिएगा? आपने इन तबकों को 'अवसर' देने से ही वंचित कर रखा था। अब लोकतंत्र और बाजार उन्‍हें यह अवसर मुहैया करवा रहा है। आप इनके श्रम का मुकाबला नहीं कर सकते। वर्ण व्‍यवस्‍था ने आपको संस्‍कारगत रूप से आलसी और परजीवी बना दिया है और इसके विपरीत वंचित तबकों में श्रम करने की अकूत क्षमता भर दी है।''

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