दिलीप मंडल जी, महिलाओं को तराशे हुए वक्ष रखने की सलाह देने के लिए बधाई

Ajit Anjum : हमारे एक पत्रकार साथी हैं, दिलीप मंडल. सरोकारी पत्रकारिता के बड़े पक्षधर और कॉरपोरेट पत्रकारिता के भयंकर विरोधी. विचारों से काफी क्रांतिकारी किस्म के हैं. इन दिनों इंडिया टुडे (हिन्दी) के संपादक हैं. दिलीप जी के हिन्दी इंडिया टुडे के कवर पर दुनिया भर की महिलाओं और पुरुषों के सरोकार से जुड़ी एक कवर स्टोरी है. शीर्षक है- उभार की सनक. कवर पर एक तस्वीर है, जिसके नीचे लिखा है- महिलाओं को चाहिए तराशे हुए वक्ष और मर्दों को चुस्त की चाहत. दिलीप जी को बधाई, ऐसी कवर स्टोरी के लिए. वैसे ये अंग्रेजी इंडिया टुडे का अनुवाद है. आप सब लोग भी चाहें दिलीप मंडल जी को इतना शानदार अंक निकालने के लिए और जन सरोकार वाली पत्रकारिता करने के लिए बधाई दे सकते हैं.

Dinesh Chandra Mishra : yeh hai deelep mandal ki sarokari patrkarita. jai ho sarokar ki

Dilnawaz Pasha : Ajit Anjum सर, क्या आप मुझे कोई एक मीडिया समूह बता सकते हैं जो सरोकारों की पत्रकारिता कर रहा है? अभिषेक मनु सिंघवी की सेक्स सीडी की खबर आई, माना की कोर्ट का आदेश था, कोर्ट ने कहा था सीडी का प्रसारण न करे, लेकिन कोर्ट ने पत्रकारों को यह आदेश नहीं दिया था कि वो इस बात पर इंवेस्टिगेशन न करें कि सिंघवी कोर्ट चैंबर में क्या कर रहे थे? खैर.. सेक्स बिकता है…और मीडिया अब सिर्फ सामान बेचना ही तो रह गया है। हम सेक्स बेच रहे हैं, बाबाओं को बेच रहे हैं, सबकुछ तर्क-वितर्क, ज्ञान-विज्ञान ताक पर रखकर निर्मल बाबा जैसे नव भगवानों का विज्ञापन प्राइम टाइम में दिखा रहे हैं…. मैं मीडिया के बारे में बहुत ज्यादा नहीं जानता… पत्रकारिता कर रहा हूं लेकिन खुद को छात्र ही ज्यादा समझता हूं…बड़े संपादकों पर मैं टिप्पणी नहीं कर सकता…बड़े संपादकों के अपने एजेंडे और अपनी मजबूरियां होती होंगी… और अपने सरोकार भी… लेकिन एक बात है सर… नई उम्र के पत्रकार, जो नव मीडिया को समझते हैं… वो अपने तरीके से…कम रिसोर्सों के साथ ही सही…अपनी बात रखेंगे, रिपोर्ट करेंगे और लोगों तक बात पहुंचाएंगे… एक उदाहरण देता हूं… जैसे ही सिंघवी के सेक्स वीडियो की खबर आई मुझे आभास सा हुआ कि इसे कार्पोरेट मीडिया कैरी नहीं करेगा… (भई कोर्ट का आदेश जो है)… इसलिए एक वीडियो रिपोर्ट…ऐसे ही लैपटॉप से बनाकर यूट्यूब पर डाल दिया… इसे अब तक 70 हजार से ज्यादा लोग देख चुके हैं…

Hasan Jawed : post of the moments… Dilip ji ko dukandari k ahmiyat samajh m aane lagi h… che che che
 
Ajit Anjum : दिलनवाज जी , बात तो दिलीप जी की हो रही है ….एक बार मैंने कुछ इसी तरह के सवाल दिलीप जी से पूछे थे उन्होंने कहा था शायद – फुटबॉल के मैदान में हॉकी की स्टिक नहीं चलती …तो मैंने तो उन्हीं से सीखा है …मुद्दे पर बात करना …मैं तो कुछ कह ही नहीं रहा हूं कि कौन मीडिया हाउस सरोकार की पत्रकारिता करता है, कौन नहीं …मैं तो दिलीप जी की बात कर रहा हूं , अलख जगाते रहे हैं …मशालें लेकर …
 
Ranjan Rituraj : ha ha ha ha ha ha …….. ban gayi hajamat … bina pamolive ke …..
 
Sanjay Singh : ha…ha….ha….
 
Dinesh Chandra Mishra ‎: Ajit Anjum ji mandal ji mashal nahi उभार की सनक ….jala rahe hai
 
Vivek Chandra : deelep g kahta to bada accha hai par karna k time nokari ki chinta jayda kjar lata hai—–
 
Dilnawaz Pasha : Dilip C Mandal जी निश्चित ही सरोकारों की बातें करते हैं… कार्पोरेट मीडिया के अपने नियम हो सकते हैं… हो सकता है वहां रीडर इंट्रेस्ट एक संपादक की समझ और सरोकार से ज्यादा हो इसलिए वो वहां मजबूर हो जाते हों…लेकिन कम से कम सोशल मीडिया पर, संगोष्ठियों में और जहां भी वो जाते हैं स्वीकार तो करते हैं कि कार्पोरेट मीडिया का क्या स्वरूप हो गया है। मैं यहां उनका पक्ष नहीं ले रहा हूं… लेकिन सर आप भी एक बड़े संपादक हैं। जब कॉलेज में था तो एक सीनियर ने कहा था अजित अंजुम जी से सीखो….उनके तेवर देखो…बहुत कुछ समझ में आएगा… मैं आपसे सीधा सवाल करता हूं सर…. अब आपके वो तेवर कहां हैं (जिनके उल्लेख मेरे सीनियर ने कहा था), न्यूज 24 पर ना सही, यहीं बता दीजिए की निर्मल बाबा पर आपकी व्यक्तिगत राय क्या है?
 
Sanjay Pathak : मुखौटे हैं, मुखौटे !!!!????? किसी के पीछे कौवा छुपा है……. तो किसी के पीछे सुग्गा…….. सुयार भतेरे, भतेरे बंदर !!!!!! मुखौटे वाले भेड़िए अनेक….. क्यों महाराज ????????????
 
Alok Kumar : दिलनवाज भाई… अंजुम जी कभी सेमिनारों में जाकर इस तरह की मीडिया से किनारा करने की बात नहीं करते, ना ही मजबूरियों को छिपाते हैं.. जहां तक मैं समझता हूं टीआरपी के खेल में जो हो रहा है उसी दुनिया में रह कर बेहतरी की बात करते हैं.. दिलीप जी को इस मीडिया से गुरेज था.. उन्होंने ताल ठोक कर हुंकार भरी थी वैकल्पिक रास्ते के जरिए इसे दुरूस्त करने की और दलालों की मंडली में शामिल न होने की..तो स्पष्ट है गुस्ताखी उन्होंने ख़ुद अपने साथ की है.. सुनना तो पड़ेगा

 Dilnawaz Pasha : मतलब अब यह हो गया है कि मशाल लेकर अलख जगाने वाले के सामने एक ही विकल्प रहना चाहिए…भूखे रहना…।….
 
Yashwant Singh : महिलाओं को तराशे हुए वक्ष रखने की सलाह देने के लिए दिलीप मंडल को बधाई.
 
Udayesh Ravi : फ़र्ज़, धर्म, सरोकार, कर्त्तव्य… जैसे शब्द मीडिया में कहाँ रह गए मान्यवर! सभी कोर्पोरेटर हो गए. सबको गाड़ी-बंगला चाहिए. समाचार अब बाज़ार बनके रह गया. लोगों की विश्वसनीयता घटी है. लोग कहते हैं : "चैनल चिल्लाता है… अखबार में सिर्फ विज्ञापन बोलता है, ख़बरों में लाग-लपेट है… रेडियो ऍफ़-एम् बनकर चुहलबाजी कर रहा है… बड़े पत्रकारों में धन-लिप्सा है, कर्त्तव्य-लिप्सा नहीं…" और भी बहुत कुछ… सर्वे करायें तो सुनेंगे… ऐसे में मित्रवत छेड़ा-छड़ी तो जायज़ है …
 
Vishal Tiwari : सर जब आप हीं कह रहे हैं तो बधाई 😀
 
Ashwini Kumar Srivastava : Mandal ji wahan naukari kar rage hain, jaise ki anjum ji kar rahe hain.aapke channel par jo kuch dikhta hai, uske liye aap to masoom ban jaate hain kyonki aap malik nahi, us channel key naukar hain, phir mandal ji, ko kyon kos rahe hain…wo kam se kam kahin to sarokar ki baat kar rahe hain.
 
Alok Kumar : दिलनवाज भाई, हम भी नौकरी करते हैं.. ये हमारी मजबूरी है.. पेट भरना है अपना भी बच्चों का भी..लेकिन सोच-समझ, वैचारिक क्रांतिकारिता इसकी मोहताज नहीं होती.. हम अपने ही संस्थान को गरियाएँ और विकल्प तलाशने की कोशिश करें तो ये व्यावहारिक नहीं होगा और भूखा तो संस्थान कर ही देगा.. पर दिलीप जी इसके उलट उवाच करते आए थे.. मानो जब तक भारतीय पत्रकारिता आइडियल या यूं कहे सामाजिक न्याय के कथित सिद्धांतों को अपना नहीं लेती वो लड़ाई लड़ेंगे.. फिर क्यों कूद गए कुएँ में..???
 
Alok Kumar : दिलीप जी इंडिया टुडे के कवर पेज पर उत्थान दिखा कर अपने पतन की कहानी बयां कर रहे हैं..
 
Prashant Priyadarshi : मेरी तरफ से बड़ी वाली बधाई! 🙂 वैसे जब से वो इण्डिया टुडे के संपादक बने तब से उनकी प्रोफाईल मुझे दिखी नहीं.. 🙂
 
संतोष त्रिवेदी : they are now doing selling-type journalism …this is not value based journalism !
 
शिवानन्द द्विवेदी सहर ‎: Ajit Anjum दिलीप मंडल साहब को मै उसी बच्चे की तरह मानता हूँ जो जब मर्ज़ी मिट्टी का घर बनाता है और जब मर्ज़ी उसे गिरा देता है ! बच्चों की बातों पर ध्यान नही देते अंजुम साहब ! इंडिया टुडे अपने जिस दौर में है उसको आने वाले दिनों में सर्कुलेशन बचाना भारी पडेगा ! ये तो शुक्र मनाइए कारपोरेट मैनेजरों का (जिनके दिलीप मंडल दिखावटी विरोधी हैं) जो पैसे का जुगाड़ कर दिलीप की नौकरी बचा रखे हैं !
 
Rajeev Tyagi : Aajkal FB par Unke Krantikaari Vicharo ko nahi padh paa rahe hai…shaayad Agreji se hindi Anuvaad ke baad samay hee nahi bachta hoga…
 
Prashant Priyadarshi : वैसे मेरी समझ में दिलीप जी ने वन-वे इख्तियार कर लिया है. वह इण्डिया टुडे में जाने से पहले जिस जगह पर थे उधर वापस आना उनके लिए बेहद कठिन होगा.
 
Varunesh Vijay : यह सत्य है कि सच्चाई कड़वी होती है। हम इंसानों का स्वभाव ही ऐसा है कि हम अपनी बुराई सुनना पसंद नहीं करते। या इसे यूं कहे कि हर कोई को अपना गुणगान व बड़ाई बड़ी ही अच्छी लगती है। हर व्यक्ति की चाहत होती है कि उसके द्वारा किए गए कार्यो को सराहा जाए। भले ही कार्य गलत हो या फिर सही।
 
Varunesh Vijay : अपने दोष ढूंढ़ निकालना हिम्मत का काम
 
Varunesh Vijay : जो चीजें कष्ट पहुंचाती हैं वही सिखाती भी हैं
 
Mukesh Kumar 'Gajendra' : बहुत खूब सर जी…
 
Manojeet Singh : ITS GOOD SIR…
 
Varunesh Vijay : A revolution is impossible without a revolutionary situation.
– Vladimir Lenin
so let them go ahead.
 
Roshan Suchan : Dekho bhaai ye Media jan media nhin ho sakta , jise carporate ke log chala rhe hain . Yhaan chahe Anjum sahab ya mandal ji jaise kitne hi avaam ke sarokari bnde kyun na hon , jo Carporate dikhana chahega ye sahab nhin rok paayenge …. Avaam ko apna media inke brabar khada krna pdega bs fir bnegi baat ….
 
Prabhat Ranjan : मेरी ओर से भी दिलीप जी को बधाई.
 
Abhijit Sharma : इंडिया टुडे nahi dilip c mandal ji ka सेक्स टुडे….ha ha ha…
 
Dinesh Chandra Mishra ‎: Prabhat Ranjan उभार की सनक ko seedhe salam kejea. mandadl ji aatamsaat kar lenge
 
Mohammad Anas : जैसे Dilip C Mandal सर बधाई के पात्र हैं ठीक वैसे ही Ajit Anjum सर भी, एक महिलाओं के वक्ष की उभार की बात करता है तो दूसरा निर्मल बाबा को दिखा कर खुद को स्थापित करता है,दोनों पत्रकरिता कर रहे हैं,और हम जैसों के आदर्श बन रहे हैं.. मैं एक छात्र हूँ और हमेशा दोनों से सीखता आया हूँ !
 
Dilnawaz Pasha : कितना आसान हो गया है हंस लेना, उपहास उड़ा लेना..। अभी यहां जितने भी लोग दिलीप जी का उपहास उड़ा रहे हैं उनमें से कोई एक भी अपनी कोई एक ऐसी रिपोर्ट का लिंक मुझे दे जिसमें जन सरोकार हो। मैं उस व्यक्ति का सम्मान करना चाहता हूं दिल से…. अरे अंधेरे के इस दौर में जब विलासिता संपादकों पर हावी हो गई है, जब संपादक नोट सूंघकर सोए हैं… तब सरोकारों की बात करना भी हिम्मत का काम है…. मैं तो सलाम करता हूं उस व्यक्ति को जो कम से कम बातों में ही सही सरोकार तो रखता है……। यहां तो लोग अपनी व्यक्तिगत राय तक जाहिर करने में गुरेज करते हैं….।।
 
Bharti Ojha : Maaf kare Ajit ji Mujhe bahut kam mauko par hi Dilip ji ke vichaar aur lekh sahi lage hai…Varn vyavstha ka bhaan jinhe nahi ho unke vichaar Jatiyataa ka badhaava dene ke liye kaafi hai.. Ye mere vyaktigat vichar hai… Aise shirshak ke saath Jan-Sarokaar se bhari Cover story ke liye DILIP ji ko mai badhai nahi de sakti… 🙁 🙁 🙁

Mohammad Anas : और कौन लोग बोल रहे हैं जिनकी नज़रे उभारों पर जा कर सब कुछ भूल जाती है..! जो मैगजीन के सबसे पिछले पन्ने को पलटने को आतुर बैठे रहते हैं, Dilip C Mandal सर ने वही लिखा जो समाज में हो रहा है,यही तो जन सरोकार है,हाँ हम उसे किस रूप में स्वीकार कर रहे हैं वो मायने रखता है ,पर सरोकार ये नही था की निर्मल बाबा को सबसे ज्यादा दिखाया जाए !
 
Varunesh Vijay : this discussion is going towards wrong direction
 
Varunesh Vijay : either do something or finish it.
 
Varunesh Vijay : ajit sir is giving his opinion.He is not blaiming anyone.
 
Mohammad Anas : अब 'रान्ग' लगने लगा .. नहीं भाई ऐसा नही है,बात दिलीप जी की ही हो रही है,बस उसमे अजीत सर को भी शामिल कर लिया गया है..क्योकि दोनों जन सरोकारों की बात करते हैं और काम उसके विपरीत (ऐसा कुछ लोगों को लगता है,ज़रूरी नही सबको लगे,मुझे लगे,आपको लगे )
 
Varunesh Vijay : i think anas is right. But we should do something with positive attutude.Noone should b blaimed.We all are responsible.
 
Varunesh Vijay : kam se kam apna part to sahi kar sakte hai.
 
Varunesh Vijay : kabhi kabhi dusro ki galti se khud bhi seekh leni chahiye
 
Sharad Dixit : जब दिलीप मंडल फेसबुक पर डौंडियाते थे तो वो आप पर निशाना साधा करते थे। आप उनका सीधा जवाब देते थे। मुकाबला काफी रोचक होता था। बहु‍त दिनों बाद वो रण फिर से शुरू हुआ है लेकिन अफसोस दिलीप मंडल अब इसका जवाब शायद नहीं देंगे।
 
Anand Dutta : breast implant karne wale jaruratmand doc. saab k paksh me dilip ji ne apna sakriya sahyog diya hai, aabhar prakat karte hain………..
 
Varunesh Vijay : पाकिस्तान मे विमान हादसे और ग्लेशियर मे पाकिस्तानी सैनिकोँ की मौत पर हमारे न्यूज चैनल और सरकार अपने आंसू लीटर के हिसाब से बहा रहे हैँ, इसलिए अगर समय मिले तो ये भी जान लेँ कि विदर्भ मेँ आज दो और किसानोँ ने जान दे दी है
 
Riyaz Journalist : एक जगह जाकर सब एक जैसे हो जाते है !
 
Mukesh Kejariwal : Dilnawaz Pasha- दिलनवाज भाई, आप मंडलजी को इसलिए ठीक मान रहे हैं, क्योंकि वह व्यक्ति कम से कम बातों में ही सही सरोकार तो रखता है…. लेकिन जो लोग सिर्फ दूसरों को ज्ञान पेल कर मलाई उड़ाते हैं, उन्हें आसाराम और निर्मल जैसा ढोंगी माना जाता है। आपने जन सरोकारों वाली स्टोरी का लिंक दिखाने की चुनौती दे कर कोई गलत काम नहीं किया। इसका आपको हक है। लेकिन अजितजी ही नहीं, Prabhat Ranjan, Alok Kumar जैसे ऊपर के टिप्पणी करने वालों में से कई ने बहुत अच्छी और सरोकार भरी पत्रकारिता की है। दिलनवाज भाई, सारे सरोकार आप इंटरनेट की लिंक पर नहीं देख पाएंगे। थोड़ा गहरे उतरना होगा। आपका जज्बा बरकरार रहे….

Mohammad Anas : जैसे सारे सरोकार /परोपकार लिंक में नही ढाला जा सकता ठीक वैसे ही Dilip C Mandal सर या फिर Ajit Anjum सर की कथनी /करनी पर बहस भी इस १६ इंच की स्क्रीन पर नही हो सकती .. यदि होती है तो सरोकारों को सबूतों की शक्ल देने में क्या परेशानी बड़े भाई @मुकेश केजरीवाल
 
Mukesh Kapil : सही है..यूं तो ये नेता भी मंचो से बड़ी बड़ी सरोकारों की बाते करते हैं..लेकिन आखिर कार किसी वकील के चैंबर में नगां नाच करते हुए पकड़े जाते हैं..या कोई उन पर अपना बाप होने का दावा करता है..तो जब खुद मलाई खा ली तो लंबी लंबी छोड़नी काहे की…मल…See more
 
Umashankar Singh : ये मंडल जी के 'दलित एजेंडे' का 'वैकल्पिक मीडिया उभार' है… किसी को अन्यथा नहीं लेना चाहिए 😉
 
Mukesh Kejariwal : ‎@Mohammad Anas- हा हा हा…. दोस्त, मैंने तो नहीं कहा कि इस … इंच स्क्रीन पर ही सारी बहस हो सकती है। रही बात सरोकार के सबूतों की तो अगर सचमुच चाहिए तो थोड़ी मेहनत कीजिए। आसानी से मिल जाएंगे। सचमुच। यह कोई भारत सरकार से जारी नागरिक पहचान पत्र तो है नहीं, कि जेब से निकाल कर कोई दिखा दे।
 
Akhilesh Pratap Singh : मंडल वाकई बेहद बकवास किस्म के आदमी हैं…. जिस गंदगी में हैं, उसका विरोध करते रहते हैं…. लेकिन रहते हैं उसी गंदगी में हैं, जाने कैसी मजबूरियां होंगी उनकी…… उनसे तो हजार गुना अच्छे वे लोग हैं, जो गंदगी में रहते हैं और उसके गुण गाते हैं…. अरे भाई, रहना ही जब उसमें है तो उसका विरोध करने से फायदा तो होना नहीं है…. शब्द पर ध्यान रहे… शब्द है फायदा… जो महज शब्द नहीं, एक प्रवृत्ति है, जिसमें लिथड़कर अच्छे-अच्छों की चूं निकल जाती है… मंडल बकवास आदमी हैं, गंदगी में रहते हुए भी उसका विरोध करते हैं… कहते रहते हैं, यह गंदा है, इसे ऐसा नहीं होना चाहिए… और फिर उसी कॉरपोरेट खराद पर चढ जाते हैं, बड बड करते हुए कि यह गंदा है, इसे बदलना चाहिए…. बकवास आदमी…. अरे भाई, विरोध ही करना है तो बाहर निकलो, फिर विरोध करो….. लेकिन यहां तो वही कॉमरेड विनोद मिश्र वाला संकट आ गया लगता है…. इस अद्‌र्ध सामंती लोकतांत्रिक सिस्टम में शामिल होकर इसका विरोध करें या बाहर से इसकी पुंगी बजाने का जतन करें….

Prashant Pathak : मुंह बोले तो सरोकार …………कलम बोले तो नौकरी बचाओ यार ……………सब गिद्ध……… सिद्ध हो गए

अजीत अंजुम के फेसबुक वॉल से साभार.

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