दिल्ली को संपूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल

लखनऊ स्थित सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर तथा अधिवक्ता प्रतिमा पाण्डेय ने आज सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली तथा पुदुचेर्री को राज्य का दर्जा दिए जाने हेतु अनुच्छेद 32 में एक पीआईएल (डायरी संख्या 5684/2014) दायर किया है. उनके अधिवक्ता अशोक पाण्डेय हैं. याचिका में कहा गया है कि भारत का संविधान मात्र राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेशों की बात करता है जिसमे राज्य की कार्यपालिका तथा विधायिका विषयक विभिन्न प्रावधान भाग VI में बताये गए हैं.

इनके विपरीत संविधान के अनुच्छेद 239ए, 239एए तथा 239एबी ऐसे प्रावधान लाते हैं जो दिल्ली और पुदुचेर्री को वस्तुतः राज्य का स्वरुप प्रदान करते हैं. इन केंद्रशासित प्रदेशों के लिए मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल तथा विधान सभा की व्यवस्था की गयी है जिन्हें राज्य तथा समवर्ती सूची पर अधिकार सौंपे गए हैं, लेकिन राज्यों के विपरीत इनके मुख्यमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है पर वे उपराज्यपाल को सहायता और सलाह देते हैं.

डॉ ठाकुर और सुश्री पाण्डेय का कहना है कि इस प्रकार की विरोधाभाषी स्थिति अपने आप में त्रुटिपूर्ण है जो इन्हें व्यवहार में राज्य और कानूनन केंद्रशासित प्रदेश बना देते हैं. यह केशवानंद भारती केस (1973) में प्रतिपादित तथा कुलदीप नायर केस (2006) में स्थापित संविधान के संघवाद के मौलिक ढांचा के सिद्धांत के खिलाफ है. अतः याचीगण ने संविधान के अनुच्छेद 239ए, 239एए तथा 239एबी को रद्द किये जाने तथा दिल्ली एवं पुदुचेर्री को केंद्रशासित प्रदेशों की सूची से हटा कर प्रथम अनुसूची में राज्यों की सूची में रखे जाने का निवेदन किया है.

 

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