दीपक चौरसिया से घृणा करने वाले हे हजारों फेसबुकियों, सुनो…

इन नादानों को पता नहीं कि आजकल के बाजारू दौर में आप जिससे सबसे ज्यादा घृणा करोगे वह उतना ही बड़ा सेलेब्रिटी बन जाएगा. यही कारण है कि ढेर सारे विरोध-बाधाओं के बावजूद दीपक चौरसिया न्यूज चैनलों के सेलेब्रिटी एंकर हैं. हालांकि इंडिया न्यूज जाने और दुर्घटनाग्रस्त होने (वैसे तो कहने वाले पहले से यह भी कह रहे हैं कि इंडिया न्यूज जाना ही अपने आप में एक दुर्घटना है) के कारण दीपक की निजी टीआरपी काफी गड़बड़ा गई है, लोग उन्हें भूलने लगे हैं. फिर भी वो पूरा जोर लगाए हैं कि चैनल का और उनका खुद का टीआरपी ग्राफ उठे.

आम आदमी पार्टी के सीधे-शरीफ नेताओं पर निशाना साधकर शुरुआती चर्चा-कुर्चचा के माध्यम से इंडिया न्यूज चैनल को थोड़ी बहुत चर्चा दिलाने वाले दीपक आजकल टीआरपी बटोरू मुद्दे की तलाश में हैं, लेकिन कुछ सूझ नहीं रहा. घर से चैनल चला रहे और एंकरिंग कर रहे दीपक के लिए सबसे बड़ी समस्या उनका खराब स्वास्थ्य है. डाक्टरों की सलाह अनसुनी करने के कारण दुबारा बेड रेस्ट पर जाने का खामियाजा उठाने वाले दीपक चौरसिया पर इंडिया न्यूज प्रबंधन ने काफी बड़ा दांव खेला हुआ है. इसका मानसिक दबाव भी दीपक पर दिखता है. पर सारे प्रयासों के बावजूद चैनल अभी रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा. टीआरपी की सुई थोड़ी बहुत बढ़ने के बाद धड़ाम से नीचे आ जाती है.

इधर, फेसबुक पर दीपक विरोधियों ने दीपक चौरसिया पर हल्ला बोल दिया है. ''We hate Deepak Chaurasia'' नामक एक पेज बनाकर दीपक विरोधियों ने खुद को एक मंच पर इकट्ठा कर लिया है. इस पेज को 4,059 लोगों ने लाइक किया है. यानि फेसबुक पर खुलेआम दीपक से घृणा करने वालों की संख्या चार हजार से ज्यादा है. इस पेज पर दीपक से घृणा के कारणों में एक बड़ा मजेदार कारण लिखा हुआ है. वह यह कि दीपक कभी शेव नहीं बनाते. हद है ये तो. कोई दाढ़ी न बनाए, मूंछ न हटाए तो आप उससे घृणा करोगे? दीपक को लेकर जो पूरा लिखा गया है, वो इस प्रकार है-   ''This guy stinks so bad! He never shaves! He is pretty rude as a journalist and demotivates people on news channels. We think that he should quit journalism ! Enough of Deepak!''

वैसे, इन विरोधियों और घृणा करने वालों को समझना चाहिए कि आजकल का दौर ''बदनाम होंगे तो क्या नाम न होगा'' वाला टाइप है. इसलिए विरोध घृणा छोड़ो, तारीफ करना शुरू करो. जिसको वाकई नष्ट करना चाहते हो उसकी जमकर तारीफ करना शुरू कर दो, बाकी काम खुद ब खुद हो जाएगा 🙂

मीडिया से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि दीपक चौरसिया से घृणा के फार्मूले में सवर्ण और ब्राह्मणवादी मानसिकता भी काम करती है. मीडिया में सवर्णों, खासकर ब्राह्मणों का बोलबाला है. ये लोग कतई नहीं चाहते कि कोई गैर-सवर्ण मीडिया में आए और छा जाए. दीपक ने सवर्ण डामिनिटेड इस किले में न सिर्फ सेंध लगाई है बल्कि अपने दम पर अपनी जगह बनाई है. यह बात सवर्ण और सामंती मानसिकता के लोगों को नहीं पचती.

वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि दीपक चौरसिया इगोइस्ट और अवसरवादी हैं. उनका अहंकार इतना बड़ा है कि यह अहंकार ही दीपक के करियर के पतन का कारण बनेगा. अपने आगे किसी दूसरे को कुछ भी न समझने वाले दीपक की खास अदा रही है कि वह अपने हित में दूसरों का इस्तेमाल तो कर लेते हैं तो पर जब दूसरों के लिए करने की बारी आती है तो उनके फोन का रिसीविंग काम नहीं करता. यही वजह है कि दीपक आज ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां उनके पास भरोसेमंद दोस्त के नाम पर कोई नहीं हैं, ज्यादातर उगते सूरज को प्रणाम करने वाले हैं, हां, विरोधियों के नाम पर एक बड़ी फौज खड़ी जरूर दिखती है.

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