देहरादून में पत्रकार नहीं ब्‍लैकमेलर भी हैं

मुझे अपने पत्रकार होने का बहुत दुःख हुआ खास तौर पर इलेक्ट्रानिक मीडिया में होने का फक्र नहीं रहा मुझे.. आप लोग जानना चाहेंगे क्यों? तो सुनिये, वो इसलिए क्योंकि आज मुझे एक व्यक्ति ने पत्रकारिता के घिनौने चेहरे को दिखाया है, जो पत्रकारिता नहीं करते सिर्फ दलाली करते हैं.  आज मैं आप को बतात हूं कि क्या हुआ जब उस व्यक्ति ने मुझसे कहा कि…आप इलेक्ट्रानिक मीडिया से हैं?

दीपक वत्स… जी बताइए.

???????…… आप नहीं गए शिमला बाई पास?

दीपक वत्स…. क्या हुआ वहां, कुछ खास?

???????….. अरे वहां ??? चैनल के कई पत्रकार वहां गए थे. गाडियों में और बहुत मोटा पैसा कमा के लाये हैं. उनके साथ एक सरकारी अधिकारी भी था, जिसने वहां जाकर जमीन पर चल रहे कंस्ट्रक्शन करने वालों को धमकाया और काम रुकवा दिया, जिसके बाद उन्होंने वहा बंद कमरे में बात की और वहां से मुस्कुराते हुए चले गए. उनके जाने के बाद वहां फिर कंस्ट्रक्शन का काम शुरू हो गया..

अब मुझे लगा कि जो अपने अस्तित्व को बचाने में लगे रहते है वो ऐसा कैसे कर सकते हैं…. वैसे मैं आप को बता दूं कि जो लोग वहां वसूली करने गए थे, उन चैनलो पर एक-एक मेल भी भेजी गयी है, जिस में सारी बाते संक्षेप में लिख दी गयी है.

दीपक वत्स

देहरादून

09808305001

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