दैनिक जागरण की असंवेदनशील पत्रकारिता, मूक जानवरों को आतंक का पर्याय बताया…

Payal Chakravarty : दैनिक जागरण के संवाददाताओं की अल्प जानकारी की दाद देनी पड़ेगी… बिना किसी कानूनी जानकारी के खबरें छापना तो कोई इनसे सीखे… यही नहीं, छोटी सी बात को बड़ी करके गंभीर समस्या के तौर पर दर्शाना महज पाठकों को गुमराह करने जैसा है..

जागरण के पटना संस्करण की ये खबर देखिए…जहां सड़क के बेजुबान कुत्तों को जहर देकर मारने के लिए कहा गया है..जबकि खबर लिखने वाले पत्रकार को ये पता होना चाहिए कि कुत्तों की नसबंदी कराने, एबीसी ऑपरेशन जैसे अन्य ऑप्शन भी मौजूद हैं जिससे उनकी तादाद को कंट्रोल किया जा सकता है.. लेकिन एमसीडी की लापरवाही के खामियाजे में मूक जानवर को जहर देकर मारने तक की असंवेदनशील बात कही गई है..

इस पत्रकार को मैं ये बताना चाहती हूं कि मैं भी एक पत्रकार होने के नाते ये जानती हूं कि एकतरफा पत्रकारिता के कोई मायने नहीं होते… जब तक उसमें दोनों पक्षों के वर्जन न हों…क्यों इस खबर में किसी पशु संस्था पेटा या पीएफए का वर्जन नहीं लिया गया… क्या जागरण वाले लोगों को ये बताना जरूरी नहीं समझते कि पशु संस्थाएं सरकारी मदद के साथ और सरकारी मदद के बिना भी हर दिन हजारों पशुओं का मुफ्त स्टेरलाइजेशन कराती हैं.. और अगर एमसीडी ऐसा नहीं कर रही है तो पशुओं को जहर देकर मारना कहां तक जायज है? ऐसी भड़काऊ खबर लिखने वाले पत्रकार और खबर को आगे बढाने वाले संपादक के खिलाफ सख्त लीगल एक्शन लिया जा सकता है..

जानवरों के संरक्षण के लिए सक्रिय युवा और प्रतिभाशाली पत्रकार पायल चक्रवर्ती के फेसबुक वॉल से.

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