दैनिक जागरण विज्ञापन और पैसे के लिए ऐसे करता है किसी संस्थान को ब्लैकमेल

बिहार के समस्तीपुर जिले में दैनिक जागरण के पन्नों पर इन दिनों में बहुचर्चित शिक्षण संस्थान ‘गुरूकुल’ के प्रचार-प्रसार से संबंधित समाचारों को लगभग नियमित रूप से स्थान दिया जा रहा है। कुल मिलाकर प्रत्येक 1-2 दिन के अंतराल पर जागरण के 2-3 कॉलम में गुरूकुल का गुणगान किया जाता है। इस निजी संस्थान को जागरण इतना अधिक भाव एवं तरजीह दे रहे हैं जैसे वह कोई सरकारी या अर्द्धसरकारी संस्थान या विश्वविद्यालय हो। ऐसा नहीं है कि ‘गुरूकुल’ के गुणगान में सिर्फ जागरण ही लगा है। अन्य अखबार भी ऐसा करते हैं लेकिन जागरण वालों ने तो हद ही कर दी। अब यहां ‘गुरूकुल-जागरण’ के इस रिलेशनशिप की वजह पर चर्चा करते हैं।

गुरूकुल कोचिंग संस्थान जिले का एक प्रमुख एवं विवादित संस्थान है। यहां के प्रबंधन द्वारा जून माह से पहले तक ‘प्रभात खबर’ पर विशेश ध्यान दिया जा रहा था। वास्तव में प्रभात खबर के कर्त्ताधर्त्ता गुरूकुल वालों की जरूरत से ज्यादा मक्खनबाजी किया करते थे और बदले में विज्ञापनरूपी स्नेह पाते थे। इस परस्थिति में जहां अन्य अखबार संयम बरत रहे थे वहीं जागरण में बैचैनी व्याप्त थी। 11 जून 2013 को गुरूकुल के निदेशक ने एक बड़ी गलती कर दैनिक जागरण को विज्ञापन के लिए ब्लैकमेल करने का मौका दे दिया। हुआ यह कि गुरूकुल के निदेशक सौरभ चौधरी ने संस्थान में अध्ययनरत छात्र रजनीश कुमार की मोबाईल छीन ली और बर्बारतापूर्ण पिटाई कर उसे गंभीर रूप से जख्मी कर दिया।

इस घटना को लेकर पीड़ित छात्र रजनीश ने स्थानीय थाना में कांड संख्या 145/13 दर्ज कराते हुए कार्रवाई की गुहार लगाई। वहीं गुरूकुल के फाउण्डर एवं निदेशक सौरभ चौधरी के पिता जर्नादन चौधरी ने खुद को बचाने के लिए पीड़ित छात्र रजनीश से छीने गये मोबाईल से अपने सेलफोन पर कॉल कर उसके द्वारा धमकी दिये जाने से संबंधित प्राथमिकी थाने में दर्ज कराई। दैनिक जागरण को छोडकर अन्य अखबारों ने इस समाचार के तथ्य को छुपाकर प्रकाशित किया वहीं जागरण ने अक्रामक तेवर में सनसनीखेज समाचार लगाकर मामले को तूल दे दिया।

नतीजतन पीड़िक छात्र के समर्थन में जिले भर में धरना-प्रदर्शन होने लगे और मामला अत्यंत संवेदनशील बन गया क्योंकि गुरूकुल के निदेशक की मानसिकता एवं कार्यप्रणाली दबंग बाहुबली टाईप वाली है। इनके संस्थान पर दर्जन भर निजी सुरक्षा गार्ड अपराधियों की तरह बंदूक ताने रहते हैं साथ ही इन पर पूर्व के दिनों में एक अधिवक्त्ता की गोली मारकर हत्या करने का मामला दर्ज है। धनबल एवं आपराधिक मानसिकता का ही नतीजा है कि इनके द्वारा जिले के कई पत्रकारों को अपमानित भी किया गया है। इनका कहना है कि हमारी पहुंच सभी अखबारों के प्रबंधन तक है और इनके पसंद के अनुसार ही समस्तीपुर में ब्यूरो प्रमुख की नियुक्त्ति होती है।

दोनों तरफ से प्राथमिकी दर्ज होने के साथ ही जागरण ने गुरूकुल के खिलाफ माहौल बनाने का एक सूत्री अभियान चला दिया। लगातार 10 दिनों तक मुख्य पेज सहित अंदर के पन्नों पर इस प्रकरण को स्थान दिया जाता रहा जिससे घबड़ाकर गुरूकुल ने घुटने टेक दिये और जागरण को विज्ञापनरूपी समर्थन देकर मामले को हल्का करवा लिया। हलांकि जागरण के कड़े तेवर के कारण पाठकों के एक बड़े वर्ग (छात्र-छात्राओं एवं अभिभावकों) के बीच तत्काल उसकी लोकप्रियता बढ़ गई थी लेकिन बाद में जागरण द्वारा भी गुरूकुल के समक्ष घुटने टेक दिये जाने से जिले के पाठक एवं प्रबुद्धजन हतप्रभ रह गये।

इसके बाद से तो जागरण ने मक्खनबाजी एवं चमचागिरी की हदें पार कर दी। गुरूकुल के प्रबंधन को जागरण ने भरोसा दिलाया कि हमारे कारण आपको जो क्षति पहंुची उसकी भारपाई कर दी जायेगी और ‘डैमेज कण्ट्रोल’ पैकेज के तहत समाचार के रूप में गुरूकुल के कार्यकलापों के बड़े-बड़े समाचार एवं तस्वीर प्रकाशित कर रहा है। जागरण की यह बेशर्म हरकत पर जिले के प्रबुद्धजन एवं शिक्षाविदों ने निराशा प्रकट करते हुए कहते हैं जागरण ने पत्रकारिता को मजाकर बनाकर रख दिया है। यहां यह भी बता दें कि ‘जागरण-गुरूकुल’ के गठबंधन से जहां गुरूकुल को व्यापक फायदा मिलता दिख रहा है वहीं जागरण साख एवं प्रतिश्ठा गंवाकर समस्तीपुर जिला में अपने अस्तित्व को बचाने हेतु संघर्षरत है।

यहां अगर इस प्रकरण को लेकर जागरण की मंशा सही है और वह निष्पक्ष है तो उसे उस छात्र रजनीश के बारे में अपने पाठकों को बताना चाहिये कि अब उसकी तबियत कैसी है और उसके द्वारा दर्ज केस पर प्रशासन द्वारा क्या-क्या कार्रवाई की गई। क्योंकि जागरण ने गुरूकुल को ‘दबोचने’ हेतु छात्र रजनीश एवं उसके घायल अवस्था वाली तस्वीर का उपयोग हथियार के रूप में किया था। हलांकि जागरण की इस बेशर्म हरकत पर बोलकर लोग खुद को सुर्खियों में लाना नहीं चाहते हैं लेकिन इस मामले में हस्ताक्षेप करनेवालों के द्वारा बताया गया है कि गुरूकुल ने जागरण से समझौता करने के बाद पीड़ित छात्र को भी धनबल के प्रभाव से अपने पाले में कर लिया है जिससे इस विवाद से उपजे जनान्दोलन में योगदान देनेवाले विभिन्न छात्र संगठन एवं राजनीतिक दलों के लोग खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। अंत में कहना चाहूंगा कि जागरण एवं गुरूकुल दोनों पर पंकज उदास की गजल ‘उसका उतना नाम हुआ है,,,,जो जितना बदनाम हुआ है…..’ बिल्कुल सटीक बैठती है!! 

समस्तीपुर से विकास कुमार की रिपोर्ट. संपर्क: 09570349744

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