दैनिक भास्कर पर भड़का इंदौर का गुजराती समाज

: समाज के स्कूल मैदान पर गरबे की अनुमति से बिफरे समाजजन : रविवार को हुई एजीएम में जताया विरोध : कहा- भास्कर से समाज को क्या मिला जो समाज ने भास्कर को नि:शुल्क मैदान दे दिया : आरोप- संस्था मानद मंत्री पंकज संघवी की मनमानी ताकि आगामी विधानसभा चुनाव में मिले बड़े अखबार का साथ

इंदौर : गैर गुजरातियों के उपयोग के लिए वर्जित रही गुजराती समाज की बेशकीमती जमीन समाज के खैरख्वाहों ने दैनिक भास्कर समूह को पांच दिवसीय गरबा महोत्सव ‘अभिव्यक्ति’ के लिए दे दी। 300 पास और विज्ञापन में डिस्काउंट के लालच में जमीन भास्कर प्रबंधन को नि:शुल्क दी गई। रविवार को आयोजित गुजराती समाज की साधारण सभा में इसका खुलासा होते ही समाजजनों ने फैसले पर आपत्ति लेते हुए संचालकों को आड़े हाथों लिया। हालात यह थे कि हिसाब पूछने पर संचालक बगले झांकते नजर आए।

साधारण सभा नसिया रोड स्थित परिसर में हुई। बैठक संस्थाध्यक्ष विनोद भाई पंड्या और मानद मंत्री पंकज संघवी की मौजूदगी में हुई। पंड्या और संघवी की उम्मीद के विपरीत बैठक हंगामेदार रही। शुरुआती दौर में हर मुद्दे पास होते गए। जैसे ही हिसाब की बारी आई, आपत्तियां शुरू हो गई। सबसे ज्यादा आपत्ति पंड्या और संघवी द्वारा बालेबाले बिना किसी सक्षम स्वीकृति के दैनिक भास्कर समूह को अभिव्यक्ति के लिए स्कीम-54 स्थित शैक्षणिक परिसर का मैदान इस्तेमाल किए जाने की अनुमति दिए जाने पर आई। पूर्व पदाधिकारियों और वरिष्ठ सदस्यों ने फैसले पर कड़ा एतराज व्यक्त करते हुए कहा कि गैर गुजरातियों को मैदान न देने की परम्परा है तो लगातार दूसरी बार यह परम्परा भास्कर समूह के लिए क्यों तोड़ी गई। अभिव्यक्ति के पास 250 से 1000 रुपए तक में बेचने वाले भास्कर समूह को मैदान इस्तेमाल की अनुमति नि:शुल्क क्यों और किससे पूछकर दी गई। इससे समाज का फायदा क्या है?

जवाब में पंड्या और संघवी ने कहा कि इस्तेमाल के एवज में भास्कर समूह न सिर्फ हमें अभिव्यक्ति के 300 पास देगा बल्कि एडमिशन के दौरान 600 सीसी के कुछ विज्ञापन भी लगाएगा। वह भी डिस्काउंट के साथ। इस पर सदस्यों ने आपत्ति लेते हुए कहा विज्ञापन एडमिशन के दौरान लगते हैं, उनमें आज दिन तक भास्कर ने डिस्काउंट क्यों नहीं दिया। दूसरा जो 300 पास मिलेंगे वह किस सदस्य को और कितने मिलेंगे। मिलेंगे भी या संस्था की 30 सदस्य कार्यकारिणी ही 10-10 पास आपस में बांट लेगी?

ताकि चुनाव में मिले भास्कर का साथ…

चूंकि श्री गुजराती समाज संस्था में पंकज संघवी का एकतरफा होल्ड है इसीलिए वे अपने तरीके से बंधारण (नियम) बनाते हैं और बिगाड़ते हैं। उन्होंने इसी कड़ी में गैरगुजराती होने के बावजूद भास्कर को लगातार दूसरी बार जमीन दी ताकि भास्कर उनकी मदद आगामी विधानसभा चुनाव में करें। विधानसभा चुनाव में वे विधानसभा-5 से दावेदार हैं।

महेश शर्मा

जिस दैनिक भास्कर को विज्ञापन के डिस्काउंट के लालच में मैदान दिया उसने आज दिन तक समाज के विकास में क्या योगदान दिया। अब तक डिस्काउंट क्यों नहीं दिया। 300 पास किसे और कैसे बंटेंगे? इसका कोई मापदंड तय नहीं है।

लद्धाराम भाई पटेल

संघवी ने पद का दुरुपयोग करते हुए एजीएम की स्वीकृति से पहले भास्कर को मैदान दे दिया यह मनमानी नहीं तो क्या है। शैक्षणिक गतिविधियों और छात्रहित को नजरअंदाज करते हुए मैदान दिया। भास्कर से समाज को कभी ऐसा कुछ नहीं मिला कि उसे नि:शुल्क मैदान दे दिया जाए।

उन्मेशभाई त्रिवेदी

मुफ्त का मक्खन क्यों?

बॉम्बे हॉस्पिटल क्षेत्र में 25000 से लेकर दो एकड़ में फैले आधा दर्जन गार्डन है लेकिन हर एक का औसत भाड़ा दो लाख रुपए रोज का है। जबकि यहां क्षेत्रफल चार एकड़ है। यानी दूसरों से दोगुना। बावजूद इसके भास्कर को जमीन मुफ्त मिली जबकि इतनी जमीन का उसे दूसरी जगह कमसकम 25 दिन के लिए 50 लाख रुपए चुकाना पड़ता। चौतरफा सुरक्षित परिसर भास्कर के लिए फायदेमंद है क्योंकि उसे अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्थ नहीं जुटाना पड़ेगी।

यह है आपत्तियां…

शैक्षणिक : तकरीबन 4.62 लाख वर्गफीट में फैले गुजराती समाज के परिसर में एसकेआरपी गुजराती हॉम्योपैथिक कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर, आरजीपी गुजराती प्रोफेशनल इंस्टिट्यूट, एसजेएचएस गुजराती इनोवेटिव कॉलेज आॅफ कॉमर्स एंड सांइस, एनएमटी गुजराती कॉलेज आॅफ फॉर्मेसी और एएमएन गुजराती इंग्लीश मिडियम स्कूल जैसी शैक्षणिक संस्थाएं हैं जहां तीन हजार से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं। इनके बीच 1.70 लाख वर्गफीट (4 एकड़) का मैदान देने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी।

खेलकूद : तकरीबन चार एकड़ जमीन पर किके्रट, फुटबॉल, टेनिस ग्राउंड हैं। जहां मध्यावकाश के दौरान बच्चे खेलते है। आयोजन पांच दिन का है लेकिन शामियाना तानने और निकालने के नाम पर भास्कर समूह 25 दिन मैदान में ही डटा रहेगा। इन 25 दिनों में चौतरफा सुरक्षित परिसर छोड़कर बच्चे कहां और कैसे खेलेंगे।

स्वास्थ्य : गुजराती समाज और बॉम्बे हॉस्पिटल ‘जहां ज्यादातर क्रिटिकल केस आते हैं’, के बीच डॉ. सुनील जैन का टोटल हॉस्पिटल, गोल्ड जिम, महेश दृष्टिहीन कल्याण केंद्र व अपाहिजों से जुड़ी अन्य संस्थाएं और उनके परिसर हैं। इनमें से कुछ में हॉस्टल व्यवस्था भी है। एक लाख वॉट के साउंड इनकी सेहत भी बिगाड़ेगा। सामने बीसीएम हाईट्स और शेखर प्लेनेट जैसी मल्टियां हैं जहां कई आईएएस, आईपीएस और आईआरएस रहते हैं। वे भी प्रभावित होंगे।

यातायात : बेतरतीब पार्किंग से बीआरटीएस और रिंग रोड के बीच की लिंक रोड प्रभावित होगी। यह रोड विजयनगर, स्कीम-54, 74 और 78 को महालक्ष्मीनगर, चिकित्सकनगर, स्कीम-94, सार्इंविहार कॉलोनी, क्लासिक पुर्णिमा जैसी 20 से ज्यादा वैध-अवैध कॉलोनियों को जोड़ता है। यातायात विभाग भास्कर को अनुमति देने से पहले यदि सड़क पर वाहनों का दबाव जांच ले तो पता चल जाएगा कि यहां कितना लोड है।

इंदौर के दबंग दुनिया अखबार में प्रकाशित विनोद शर्मा की रिपोर्ट.

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