दो और मामलों में कोर्ट में हाजिर हुए पीके तिवारी

 

: जेल में हुई भुप्‍पी की सामान्‍य प्रक्रिया पर समूह प्रमुख से भेंट : नोएडा : महुआ समूह के मुखिया पीके तिवारी को दो और मामलों में कोर्ट में हाजिर करा दिया गया है। यह मामले मौजूदा उस मामले से अलग है, जिसमें उन्‍हें पहले से सीबीआई की तरह से जेल भेजा जा चुका है। उधर खबर है कि महुआ के सलाहकार भूपेंद्र नारायण सिंह उर्फ भुप्‍पी ने आज तिहाड़ में बंद पीके तिवारी से भेंट की। हालांकि इस भेंट का ब्‍योरा अब तक पता नहीं चला है। लेकिन इतना तो बताया जाता है कि इस बातचीत का मकसद महुआ में आये ताजा संकट के लेकर ही हुआ। कहा गया है कि समूह में तोपची-चूहे के तौर पर मशहूर बैडमैन की विवादित सितारगंज चुनावी यात्रा और उसमें उनके संगी-साथी रहे लोगों के साथ ही लखनऊ में उनकी एक करीबी की करतूतों पर लम्‍बी से चर्चा हुई। वैसे एक और खबरों के मुताबिक महुआ समूह के पुराने कर्मचारियों की एक बैठक समूह के प्रबंधन के साथ अगले 20 तारीख को होनी है और उसके तहत अब यह समूह अपने लोगों को एकजुट करना चाहता है। जाहिर है कि प्रबंधन का मकसद महुआ समूह को अब बंदी की ओर बढ़ाना नहीं है।
 
तो, पहले खबर अब तिहाड़ में बंद पीके तिवारी और उनके बेटे से हुई मुलाकात से। सूत्रों के मुताबिक आज दोपहर पीके तिवारी से भुप्‍पी की तिहाड़ जेल में मुलाकात हुई। यह मुलाकात जेल के नियमों के तहत हुई। बताते हैं कि भुप्‍पी ने सामान्‍य प्रचलित नियमों के तहत बाकायदा मुलाकाती वालों से मुलाकात करने वालों की प्रकिया में पर्ची लगायी। यह भी नहीं पता चल पाया है कि यह पर्ची खुद भुप्‍पी ने अपने नाम से तैयार किया थी, या किसी और के नाम पर मुलाकात की है। खैर, काफी समय बाद भुप्‍पी को तिहाड़ जेल के भीतर इंट्री मिली। पीके तिवारी से भेंट में, बताते हैं कि, भुप्‍पी ने करीब 17 मिनट तक बातचीत की। भेंट का पूरा ब्‍योरा तो नहीं मिल पाया है कि लेकिन बताते हैं कि इस भेंट में यशवंत राणा को लेकर हुई चर्चा ही केंद्र में रही। बताते हैं कि पीके तिवारी को लेकर महुआ के प्रति उनके रवैये, उनके पहले और जेल जाने के बाद हुए घटनाक्रमों को लेकर खुल कर बात की।
 
तिहाड़ के दौरान बातचीत में सितारगंज यात्रा के दौर को लेकर महुआ के कई बड़े लोगों द्वारा की गयी दलाली, महुआ से निकाले गये लोगों को वहां के भाजपा विधायक से गाड़ी मांगने के लिए महुआ के न्‍यूज डायरेक्‍टर के तौर पर पेश करने, उत्‍तराखंड के ब्‍यूरो प्रमुख को इस पूरे मामले में हटाने लगाने, खबरों को लेकर इस बीच अचानक हुए महुआ के तौर-तरीके और तेवर में आये बदलाव पर चर्चा की गयी। चर्चा हुई ऐसे लोगों की, जिन्‍होंने महुआ प्रबंधन को लगातार शुरू से ही न केवल धोखा किया और न केवल उन्‍हें खुद को एक राणा-सांगा की तरह किसी विजेता जैसा पेश किया। बताया गया कि कैसे उत्‍तराखंड में कैसे 28 लाख की नकद उगाही की गयी। कैसे वहां के ब्‍यूरोचीफ के साथ बदतमाजी की गयी। कैसे दो लाख बीस हजार रूपयों का बकाया किस तरह बांट-बट्टे में निजी समूह के लोगों को चूना लगाया गया। कैसे नोएडा इनक्‍लेव में किसके साथ उन लोगों ने किन लोगों की रात रंगीन किये जिन पर महुआ न्‍यूज लाइन में चटखारे में चर्चाएं हर दरवाजे में खूब चलती हैं। इन्‍हीं लोगों ने ही तो ठीक उसी रात रंगीन किया था कि जिस ही दिन इस चैनल की बंदी का ऐलान राणा यशवंत ने किया था। 
 
कर्मचारी जब महुआ आफिस में भूख-प्‍यास-आशंकाओं से जूझ रहे थे, उसी ही रात तो महंगी दारू और बिरयानी कट रही थी। शराब के साथ शबाब के बीच। इन्‍हीं लोगों ने ही तो यूपी चैनल की इस बदतमीज पत्रकार के साथ अपनी इश्‍कबाजी में इस करीबी के चलते ही महुआ को ताजमहल बताने की साजिशें की थीं, बावजूद सारे कर्मचारी इस महिला के व्‍यवहार से बेहद खफा थे। बताते हैं कि बातचीत के पहले ही पीके तिवारी ने इस कांड का खुलासा करते हुए इस बैडमैन को कम्‍पनी से बाहर निकाल कर दिया था। 
 
बहरहाल, खबर है कि महुआ समूह प्रबंधन ने पीके तिवारी पर दो और भी लंबित मुकदमों में हाजिर कराने का फैसला किया है। यह दोनों ही मामले पीके तिवारी पर पहले से दर्ज थे और उन पर तिवारी जी को पहले से वांछित किया गया था। बताते है कि पीके तिवारी के करीबी और कलेक्‍शन चीफ मनोज दुबे इस पूरे मामले की गंभीरता के साथ देख रहे थे। लेकिन बताते हैं कि इन नयी इस हाजिरी का मकसद था कि पीके तिवारी को जमानत के दौरान किसी भी दिक्‍कत से रोकने का मकसद था। इन लोगों का मकसद था कि ऐसा न हो कि किसी जमानत पर छोड़ते ही पीके तिवारी को नये या पुराने किसी मामले में वांछित कर उन्‍हें फिर जेल की यात्रा करा दी जाए।
 
सूत्र बताते हैं कि महुआ समूह अब उन सभी उन लोगों से फिर नये से बात करना चाहता है कि जो इस समूह में पुराने हैं। यह सभी 

लोग ऐसे हैं जिन्‍हें हाल ही में  कम्‍पनी से निकाल दिया गया था। साफ है कि प्रबंधन का मकसद इस समय चैनल को चलाना ही है, न कि उसे बंद करना है। अब यह सब लोग अगले 20 तारीख को प्रबंधन के साथ एकजुट होंगे, बातचीत होगी और रणनीति तैयार की जाएगी।
 
लेखक कुमार सौवीर सीनियर जर्नलिस्‍ट हैं. वे कई अखबारों तथा चैनलों में वरिष्‍ठ पदों पर काम कर चुके हैं. इन दिनों स्‍वतंत्र पत्रकार के रूप में सक्रिय हैं. इनसे संपर्क 09415302520 के जरिए किया जा सकता है.

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