…दो के बदले दस कटेंगे अब रहम ना पायेंगे… जैसलमेर सीमा से दुर्गसिंह राजपुरोहित की लाइव रिपोर्ट

जम्मू कश्मीर में सैनिकों के सर काट कर ले गए पाकिस्तानी सैनिकों ने भारत की सेना और यहाँ की अवाम को गुस्से से भर दिया है। अब वो कोई भी घटना होने के बाद सिर्फ अफ़सोस प्रकट करने की बजाए पकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देने को तत्पर हैं। भारत की सीमाओं की रक्षा में लगी सीमा सुरक्षा बल ने दिन-रात इस सीमा पर सुरक्षा में कई गुना बढ़ोतरी कर दी है। जैसलमेर सीमा से दुर्गसिंह राजपुरोहित की ख़ास खबर…

सबक सिखाने की ताक में भारतीय जवान

बाड़मेर। सीमा पर जब नफरत की आग पकिस्तान के द्वारा बार बार जलाई जा रही है, ऐसे हालात में शायद जवान यही कह रहे होंगे कि ‘ले गए सर काट कायर धुंध में सूरत छुपा के, भर रही हुंकार सरहद लहू का टीका सजा के, नर पिशाचों के कुकृत्य अब सहे ना जायेंगे, दो के बदले दस कटेंगे अब रहम ना पायेंगे’. इसी से शायद पाकिस्तान को अपनी औकात पता चलेगी कि दुश्मनी बराबर वालों से ली जाती है, अपने से ताकतवर मुल्कों से अगर दुश्मनी पैदा करोगे तो तुम्हारा वजूद भी शायद आने वाले दिनों में इस धरती पर ना रहे।

दरअसल सीमा पर सैनिक गुस्से से में हैं। अपने देश के सैनिक को दुश्मन मुल्क से आये रेंजर्स ने बिना किसी वजह के मार दिया, और तो और,  बर्बरता की हदें पार करके उन्होंने उनके सर काट लिए और बड़े फख्र के साथ अपने साथ पकिस्तान ले गये। इसके बाद भारतीय सेना में जबरदस्त रोष है और वो सीमा पर इसी के इंतज़ार में हैं कि पडोसी इसके बाद ऐसी गलती करें तो उसको उसी की भाषा में जवाब दिया जाए। सीमा पर सैनिकों के चेहरे गुस्से से तमतमाए हुए हैं और हर पल वो मुस्तैदी से मुल्क की रक्षा में चौकस हैं।

पश्चिम में पाकिस्तान से लगती सीमा जिसे रेडक्लिफ लाइन भी कहते हैं पर सीमा सुरक्षा बल ने पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब देने के लिए आपरेशन सर्द हवा भी चला दिया है और अब अगर पाकिस्तान ने जम्मू जैसी गलती की तो पकिस्तान की खैर नहीं है। राजस्थान से लगती 1040 किलोमीटर लम्बी भारत-पाक सीमा पर युद्ध जीतने में भारत अव्वल रहा है और इसी सीमा पर अब भारत ने सीमा सुरक्षा बल के जरिये सीमा को सबसे ज्यादा सुरक्षित बनाया है। हम आज आपको बता रहे हैं कि जम्मू कश्मीर में हुई घटना ने कैसे सरहद पर देश की रक्षा में लगी बीएसएफ के खून में उबाल लाया है।

हमारी टीम जैसलमेर से करीब 130 किलोमीटर दूर ऐसे दुर्गम सीमा क्षेत्र में पहुंची जहां जीवन का कोई अर्थ नहीं है। दूर-दूर तक सिवाय रेत के रेगिस्तान के कुछ भी नज़र नहीं आता और ऐसे इलाके जहां सड़क भी दूर तक नहीं है। सीमा सुरक्षा बल की पेट्रोल जिप्सियों के जरिये हमे इस क्षेत्र तक पहुंचने में करीब साढ़े चार घंटे से ज्यादा का वक़्त लगा। यहाँ पर आम आदमी का आना सख्त मना है और अगर कोई यहाँ आएगा तो उसको पूछताछ के साथ साथ दूसरी कई परेशानियों से दो-दो हाथ करने ही पड़ेंगे। जब हम यहाँ सीमा सुरक्षा बल की बीओपी पर पहुंचे तो उस समय पेट्रोलिंग की तैयारियां चल रही थी।

सैनिक अपने हथियारों के साथ तैयार थे और उनको अधिकारीयों के द्वारा निर्देशित किया जा रहा था कि वे सतर्क रहें, क्यूंकि पड़ोसी कुछ भी गलत हरकत कर सकता है। निर्देश दिए गये कि हम उन्हें उकसाने की कोई कार्यवाही नहीं करेंगे और अगर उन्होंने कोई ऐसा काम किया तो उनको मुंहतोड़ जवाब देने से भी हमें नहीं चूकना है। इसके बाद शुरू हुई तीन तरह की पेट्रोलिंग। सबसे पहले यहाँ प्रशिक्षित ऊँटों के जरिये पेट्रोलिंग की जा रही है। बीएसएफ के प्रत्येक ऊंट पर दो जवान हथियारों के साथ चौकसी करते हैं। और यह सिलसिला लगातार चलता है।

ऊँटो पर पेट्रोलिंग का बड़ा फायदा है कि उस पार से अगर कोई भी घुसपैठ का प्रयास करता है तो ऊँटो पर बैठे बीएसएफ के जवान उनको आसानी से देख सकते हैं, साथ ही जवान इस गश्त से थकते भी कम हैं। गश्त के लिए विशेष प्रशिक्षण बीएसएफ के द्वारा ऊँटों के साथ जवानों को भी दिया जाता है। इसके कारण ये ऊंट बीएसएफ के सबसे बड़े साथी साबित हो रहे हैं। ऊँटों की गश्त के बाद पैदल जवानों के द्वारा होने वाली गश्त की बारी आती है। आधुनिक हथियारों से लैस सैनिक रेतीली जमीन पर खिंची कंटीली तार के इस पार चौकस निगाहों से पूरे इलाके की निगरानी करते हैं।

यहाँ पर दिन में भी तापमान करीब सात डिग्री तक गिरता है, उसके बावजूद भी जवानों का हौसला फौलाद से ज्यादा मजबूती से बढ़ता जाता है, मानो अपने देश की मिट्टी से ज्यादा अच्छा उन्हें कुछ भी नहीं लगता हो। यही नहीं, जवान तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार ठेठ जीरो लाइन तक जाकर वहां की स्थिति को देखते हैं। जीरो लाइन के पास जाने से पहले बाकायदा सभी जवानों की तलाशी ली जाती है, सभी के नाम एक रजिस्टर में लिखे जाते हैं और उसके बाद ही दोनों मुल्को को बांटने वाली सीमा का दरवाज़ा खुलता है।

जवान जीरो लाइन से पहले भारतीय सीमा में इलाका हमेशा जांचते हैं कि कहीं इन इलाकों में मौके का फायदा उठा कर कोई अवांछित वस्तुएं जैसे हथियार, मादक पदार्थ या फिर अन्य तस्करी का सामान छुपा कर तो नहीं रखा गया है। यहाँ 24 घंटों तक तैनात रह कर मुल्क की हिफाज़त करने वाले जवानों के अनुसार उनको इस बात का दुःख जरूर है कि पड़ोसी मुल्क ने बर्बरता से उनका एक साथी उनसे छीन लिया लेकिन वो इस घटना के बाद और ज्यादा सतर्क और मजबूत हो गये हैं।

सीमा पर सबसे ज्यादा प्रभावी और तीव्रता से जिप्सी के जरिये विहकल गश्त होती है। इस गश्त में एक जिप्सी में बीएसएफ के ड्राइवर समेत छह जवान हथियारों के साथ सीमा के पर चौकस रहते हैं। अत्याधुनिक बेरेटा गन्स के साथ चौकसी करते देख हर भारतीय यह गर्व के साथ कह सकता है कि सीमा पर हर वक़्त तैनात सीमा सुरक्षा बल किसी भी सूरत में भारत की सरहद में पाकिस्तान की नापाक कदमताल नहीं होने देगा। भारतीय जवानों की इसी जिन्दादिली के कारण हम सुरक्षित हैं, हमारा देश सुरक्षित है और इसी कारण पड़ोसी की नज़रें कभी हमारे मुल्क की सरहद के पार आने से पहले कई बार अपने हश्र के बारे में सोचती हैं।

पकिस्तान की तरफ अपनी बंदूकें ताने हमारे सेना के जवानों के बाजुओं की ताकत का ही कमाल है कि पाकिस्तान हमारे देश के इन जवानों को मारने के लिए गीदड़ों की तरह पीठ पीछे हमला करता है और खुश होता है लेकिन सीने पर वार करने की ताकत सिर्फ सीमा पर तैनात भारतीय जवानों के पास है और सीमा पर इन दिनों यही कुछ नज़र आता है। यहाँ पकिस्तान के इलाकों में जबरदस्त हलचल बढ़ गई है और इसका जवाब भी भारत की बीएसएफ ने देने की सोच ली है। सीमा पर नफरी को बढ़ा दिया गया है।

अधिकारियों की मानें तो मुल्क की सीमा के उस पार हलचल तेज़ है लेकिन इसका कोई प्रभाव सीमा सुरक्षा बल पर नहीं पड़ेगा क्यूंकि हम हमेशा तैयार हैं। सीमा सुरक्षा बल के अधिकारी नरेंद्रसिंह धायल बताते हैं कि उस पार से अगर कोई भी अवांछित हरकत हुई तो उसका मुंह तोड़ जवाब दिया जाएगा।

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