धन्य है आजतक की रिपोर्टिंग, वयोवृद्ध पत्रकार सुनीता नाईक को ही दोषी करार दिया

आजतक वाले खुद को ईश्वर से कम नहीं मानते. इसीलिए वो सर्टिफिकेट बांटते फिरते हैं कि कौन सही है या कौन गलत. आपको सुनीता नाईक का नाम याद होगा. जो मुंबई में गुरुद्वारे के बाहर सड़क पर रहती हैं और वहीं खाती पीती सोती हैं. जब उन दिनों उनकी खबर छपी तो उन्हें एक परिवार अपने साथ ले गया. सुनीता की अपनी जीने का स्टाइल है. अगर उन्हें रोज मटन खाना है तो खाना है. अगर आप नहीं खिला पा रहे तो वह आपके घर से जाने को स्वतंत्र हैं, आजाद हैं.

सुनीता के पास उनका अपना कुत्ता है. अगर उन्हें लगता है कि उनका कुत्ता ज्यादा बुखार से ग्रस्त है तो वो गल्ती से वही क्रोसीन दवा उसे खिला सकती हैं, जो वो खुद के बुखार होने पर खा लेती हैं. ये अलग बात है कि उनका अंदाजा गड़बड़ा गया और ज्यादा क्रोसीन खाने से उनका कुत्ता मर गया. ऐसे में अगर आजतक वाले सुनीता पर यह आरोप लगाएं कि वो ज्यादा मटन खाने के चक्कर में सड़क पर आ गईं, तो ये न सिर्फ बेहद छिछोरा, घटिया, अतार्किक, अलोकतांत्रिक आरोप है बल्कि आजतक की चीप व टीआरपीबाज मानसिकता का नमूना भी है. देखिए, आजतक की वेबसाइट पर सुनीता के बारे में किस एंगल व अंदाज में खबर प्रकाशित की गई है…

कभी करोड़पति रही पत्रकार सुनीता नाईक मटन के चक्‍कर में फिर आई फुटपाथ पर

किसी जमाने में शानदार जिंदगी जी चुकीं पूर्व पत्रकार सुनीता नाईक एक बार फिर सड़कों पर आ गईं हैं. अभी एक महीने पहले ही दंपति ग्रेगोरी और क्रिस्‍टीन मिसक्विटा उन्‍हें और उनके कुत्ते को मुंबई के विले पार्ले स्थित अपने घर में ले गए थे. आपको बता दें कि ये वही सुनीता नाईक हैं जो कभी करोड़पति पत्रकार थीं. वर्ली में उनके दो फ्लैट थे, लेकिन जिंदगी ने पलटा खाया और पांच भाषाओं को धाराप्रवाह ढंग से बोलने वाली सुनीता सड़क पर आ गईं. जब उनकी कहानी एक अखबार में छपी तो कई लोग उनकी मदद के लिए आगे आए. इन्‍हीं लोगों में ग्रेगोरी भी थे, जो उन्‍हें 20 अगस्‍त को अपने घर ले आए.

लेकिन मराठी पत्रिका गृहलक्ष्‍मी की पूर्व संपादक सुनीता नाइक ने सोमवार को मिसक्विटा दंपति का घर छोड़ दिया और अब वे फिर से वर्सोवा के गुरुद्वारे के बाहर रह रही हैं. सुनीता ने गुरुद्वारे के अधिकारियों को बताया कि मिसक्विटा दंपति ने उनके साथ बहुत अच्‍छा बर्ताव किया, लेकिन उनके बीच कुछ चीजों को लेकर मतभेद थे इसलिए उन्‍होंने घर छोड़ने का फैसला कर लिया. ग्रेगोरी कहते हैं, 'घर छोड़ने का फैसला सुनीता का था. हमने अपने घर में तहे दिल से उनका स्‍वागत किया था. हालांकि, कई सारे मुद्दे थे. सुनीता रोज मटन खाना चाहती थीं. मैं एक बार लेकर भी आया, लेकिन मैं रोज-रोज ऐसा नहीं कर सकता.'

उनका कहना है कि सुनीता उस तरह के खाने की मांग करती थीं जो उन्‍होंने अपने अच्‍छे दिनों में खाया था. कुत्ते के प्रति सुनीता के बर्ताव को लेकर भी मिसक्विटा दंपति और उनमें मतभेद था. ग्रेगोरी के मुताबिक, 'एक बार उन्‍होंने अपने कुत्ते को ढेर सारी क्रोसिन खिला दी, जिससे उसकी मौत हो गई. मैंने उनसे कहा कि उन्‍हें इस बारे में मुझे बताना चाहिए था. मैं कुत्ते को लेकर डॉक्‍टर के पास जाता.'
 

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