‘धरती पुत्र’ राजीव रंजन

Amarendra Kishore : बिहार और उत्तर प्रदेश के सम्मिलन स्थल का इलाका सिताब दिआरा– लोक नायक जय प्रकाश नारायण की जन्म भूमि। इस माटी की खासियत है की यहाँ धरती पुत्र पैदा होते है। यह महज संयोग नहीं कि इसी इलाके के हैं सुविख्यात टीवी पत्रकार राजीव रंजन जो "धरती पुत्र" के नाम से हम संगियों के बीच अपनी पहचान रखते हैं। सामाजिक जीवन की शुरुआत नुक्कड़ नाटकों से इन्होने की।

किस्मत से नहीं बल्कि अपनी वाक् पटुता और गंभीर सोच के बूते राजीव भारतीय जन संचार संस्थान में आये। राजीव ने कभी विवादों का साथ नहीं दिया तो इसी वजह से विवादों से राजीव जुदा रहे। अपने काम के प्रति बेहद समर्पित राजीव आज की तारीख में हिंदी के सर्वश्रेष्ठ रक्षा टीवी पत्रकार माने जाते हैं–जिनके द्वारा अमूमन हर हफ्ते शनिवार के दिन प्रस्तुत "वतन के रखवाले" कार्यक्रम की ख़ास पहचान है।

इस मुकाम को हासिल करने केलिए राजीव ने किसी हथकंडे का सहारा नहीं लिया बल्कि "परख" कार्यक्रम से बतौर प्रशिक्षु अपनी पारी शुरू करते हुए इन्होने शशि मेहता के कार्यक्रम "खोज खबर" के निर्माण में वर्षों तक अहम् भूमिका अदा की। इसके बाद न्यूज़ एजेंसी एएनआई में काम करते हुए राजीव ने काम सीखने को प्राथमिकता दी न कि नामचीन होने की होड़ में कोई हड़बोंग किया। आतंकवादी आक्रमणों से ग्रस्त जम्मू कश्मीर में राजीव ने ४ साल तक रिपोर्टिंग कर अपने साहस और ज़ज्बे का परिचय दिया।

सहारा टीवी के रस्ते अपनी सेवा देते हुए आज राजीव एनडी टीवी के बेहद प्रतिष्ठित पत्रकार माने जाते हैं। आम आदमी की जुबान में राजीव सामरिक मामलों के प्रति लोगों को जागरूक कर रहे हैं। इन्हें "पत्रकारिता की किताब" कहना ज्यादा ठीक होगा, क्योंकि राजीव की प्रत्येक रिपोर्ट जन संचार (पत्रकारिता) के छात्रों केलिए एक अध्याय होता है

अमरेंद्र किशोर के फेसबुक वॉल से. उपरोक्त पोस्ट पर आईं टिप्पणियां यूं हैं…

    Manoj Khandelwal राजीव रंजन …after a long time seen your photo….proud to be a IIMCianSee Translation
 
    Sanjay Kishore jio raja
 
    Amrita Maurya I am proud to be your batch-mate Rajeev Ranjan.
   
    Suraj Kumar bahut achcha… dil khush ho gaya..
    
    Aakash Gupta nice pic
     
    Ankit Srivastava IIMC to bus IIMC hai
     
    Aparna Sah yese hi kuch namchin log hi to bina nam ka kam karte hain….javi to Dharti-putra kahlate hain…kya yeh pahchan kafi nahi??dekha chehra se aapne pahchan karaya….thnx.
     
    Ranjit Kumar Singh Kuchh bat hai ki hasti mitati nahi hamari………….@
     
    Vibha Rani nice to know about him.
     
    Vikas Mishra निश्चित रूप से राजीव रंजन आज की टेलीविजन पत्रकारिता के लिए एक थाती की तरह हैं, जिन्हें परफेक्ट से कम मंजूर नहीं है। जो रास्ता राजीव ने चुना है वो दूसरों से अलग है, मेहनत भरा है और आने वाली पीढ़ियों के लिए वो पाथेय बनेगा।
     
    Vibha Rani Rajeev Ranjan ji ka programme desh ke 3 sainik school me dikhaya jaata hai.Ye apne aap me ek badi baat hai. Impressive work
     
    Pawan Jindal Rajeev Ranjan Ne sahi mein apne kaam aur lagan se bahut impress kiya hai aur aaj ki unki safalta ke peeche sangharsh aur mehnat ki ek lambi kahani hai. He is an authority over defence journalism..keep going rajeev……
     
    Ratnessh Srivastwa Our best wishes are with u dear.
     
    Pramod Chauhan बात सन 1999 की है.. मैं उस समय एक प्रोग्राम के सिलसिले में श्रीनगर में नौकरी कर रहा था.. तीन महीने हो चुके थे.. इसबीच मुझे पता चला कि यहां एएनआई का एक तेजतर्रार रिपोर्टर है जिसके पास सेना की हर खबर होती है.. मैंने वैसे ही अपने एक रिपोर्टर से उसके बारे में जानना चाहा.. तो उसने राजीव नाम बताया.. मैं सोच नहीं सकता था कि अपना राजीव यहां का हीरो है.. मैने वैसे ही राजीव का उससे नबंर लिया और बात की.. शायद राजीव को याद होगा कि फोन पर बात करने के बाद हम लाल चौक में मिले थे.. फिर वो मेरे आफिस आया.. जहां कई दिनों तक हम मिलते रहे.. सही में राजीव ने शुरु से ही डिफेंस की बीट पर जबरदस्त काम किया.. अमरेन्द्र तुमने हमारे धरतीपुत्र पर बहुत अच्छा लिखा.. हर मंगलवार को किसी एक पर लिख रहे हो.. उम्मीद है अगली बार दिल्ली के साथियो के साथ ही मुकेश, तरुण, समी समेत बाकी सभी के बारे में पढने को मिलेगा..
     
    Sangita Tewari राजीव का नाम धरतीपुत्र यूं ही नही पड़ा..संस्थान के दिनों में राजीव ऐसे मुद्दे उठाते रहे कि ये नाम देना पड़ा..गांव या छोटे शहर से दिल्ली आना औऱ एक बिल्कुल अपरिचित सी दुनिया में अपनी पहचान बनाना..कामयाबी का ये सफर कितना मुश्किल औऱ संघर्ष भरा रहा होगा समझना मुश्किल नही है..शुभकामनाएं राजीव..


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