धीरेन्द्र अस्थाना पर केन्द्रित ‘इरावती’ के अंक का मुंबई में हुआ विमोचन

मुखातिब और मणिबेन नानावटी महिला महाविद्यालय, विले पार्ले मुंबई के तत्वावधान में हुए साहित्यिक कार्यक्रम में वरिष्ठ कथाकार सूर्यबाला ने कहा कि साहित्य जीवन से और जीवन साहित्य से उर्जा प्राप्त करते हैं और दोनों एक दुसरे के पूरक हैं. हिमाचल प्रदेश से प्रकाशित होने वाली पत्रिका ‘इरावती’ के वरिष्ठ कथाकार धीरेन्द्र अस्थाना पर केन्द्रित अंक का विमोचन करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. हर्षदा राठोड़ ने कहा कि  साहित्य मनुष्य को जीवन जीने की दृष्टि देता है और मनुष्यता में विश्वास पैदा करता है. डॉ. राठोड़ ने इरावती के सम्पादक श्री राजेन्द्र राजन जी को मुंबई में इरावती पत्रिका के विमोचन के लिए साधुवाद दिया। उन्होंने श्री धीरेन्द्र अस्थाना को भी शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर वक्तव्य  देते हुए श्री आलोक भट्टाचार्य ने कहा कि धीरेन्द्र अस्थाना  अपनी कहानियों में विचारधारा को हमेशा तरजीह देते हैं लेकिन वह एक दबाव कि तरह नहीं बल्कि कहानियों में रची बसी आती है. वरिष्ठ पत्रकार हरि मृदुल ने कहा कि धीरेन्द्र के कहानियां लिखने का अंदाज़ बिलकुल अलग है और वह एक रवानगी में कहानियां लिखते हैं. अनूप सेठी ने आपने वक्तव्य में कहा कि धीरेन्द्र धैर्य वाले किस्सागो हैं और उनकी कहानियों का समग्र मूल्यांकन होना चाहिए. युवा कथाकार दुर्गेश सिंह ने कहा कि धीरेन्द्र जी की कहानियों में मदिरा, महिलाएं और मुंबई बहुत सहज और खूबसूरत ढंग से आती हैं.

धीरेन्द्र जी की पत्नी  श्रीमती ललिता अस्थाना  ने इस अवसर पर कहा कि अक्सर  लेखक के लेखन और जीवन में एक फांक देखी जाती है जो नहीं होनी चाहिए. कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही वरिष्ठ कथाकार सूर्यबाला ने कहा कि धीरेन्द्र अपनी कहानियों में बहुत सहज हैं और उनकी कहानियों में पिछड़ती जा रही औरतें और पिछड़ते जा रहे लोग बहुत सहजता से आते हैं.

मुख्य अतिथि और इरावती के संपादक राजेंद्र राजन जी ने मुंबई में इतनी संख्या में उपस्थित श्रोताओं को धन्यवाद दिया और कहा कि उनकी पत्रिका नयी प्रतिभाओं में मौका देने में हमेशा अव्वल है. उन्होंने कहा कि सिर्फ कहानी और कविता ही साहित्य नहीं बल्कि साहित्य के सरोकार बहुत बड़े होते हैं. कार्यक्रम में वरिष्ठ कहानीकार सूरज प्रकाश, संपादक हृदयेश मयंक, गीतकार देवमणि पाण्डेय, और सुधि श्रोता उपस्थित थे. अतिथियों का परिचय और कार्यक्रम का सञ्चालन रविन्द्र कात्यायन और धन्यवाद ज्ञापन विमल चन्द्र पाण्डेय ने किया.

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