नईदुनिया, ग्‍वालियर के संपादक राकेश पाठक का इस्‍तीफा

नईदुनिया को जागरण में रंग में रंगने और ढीले-ढाले लोगों की विदाई के क्रम में अब बारी संपादकों की आ गई है। छंटनी की कैची पहले ही चल चुकी है और अब वे लोग संस्थान से जा रहे हैं जिनके बारे में समूह संपादक श्रवण गर्ग राय रखते हैं कि यह लोग संस्थान के लिए सिर्फ सफेद हाथी हैं और जो कुछ भी करते हैं खुद के लिए करते हैं, संस्थान की भलाई कभी नहीं करते। इसी क्रम में नईदुनिया ग्वालियर के संपादक डॉक्टर राकेश पाठक ने इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे को लेकर दो तरह की चर्चाएं हैं।

पहली चर्चा में कहा जा रहा है कि डॉक्टर पाठक का मन नए प्रबंधन के साथ काम करने का नहीं था, इसलिए उन्होंने इस्तीफा दे दिया और अभी नोटिस पीरिएड में हैं। नोटिस एक माह का दिया गया है कि नए संपादक की तलाश इस दौरान कर ली जाए। दूसरी चर्चा यह है कि जब श्रवण गर्ग 6 मई को ग्वालियर यात्रा पर आए थे तो उन्होंने डॉक्टर राकेश पाठक से वन टू वन बात की। उनके कामकाज की समीक्षा और सबसे पहले उनका कालम बंद करवाया। इसके बाद उनसे कहा गया कि वे अब नईदुनिया में ज्यादा और नहीं चल सकते, इसलिए बेहतर होगा कि विदाई का सम्मानजनक रास्ता खुद ही चुन लें। सम्मानजनक रास्ता चुनते ही डॉक्टर पाठक ने इस्तीफा दिया है।

इनके बारे में यह ख्याति अखबार मालिकों के कान तक पहुंच चुकी है कि यह हटाए या तबादला किए जाने पर संस्थान में हड़ताल करवा देते हैं, इसलिए श्रवण गर्ग उनके इस कदम और उनके खास लोगों पर भी नजर रखे हुए हैं। डॉक्टर राकेश पाठक के बारे में कहा जा रहा है कि वे अपनी टीम के साथ पीपुल्स समाचार की री-लॉचिंग ग्वालियर में कर सकते हैं और इसके लिए अपनी टीम को नईदुनिया से तोडऩे में लगे हैं। उधर पीपुल्स प्रबंधन पहले ही ग्वालियर में पीपुल्स समाचार को एक ब्‍यूरो में तब्‍दील कर चुका है। सिर्फ तीन रिपोर्टर का स्टॉफ हैं यहां पर। बाकी सब बाहर कर दिए गए हैं। ऐसे में देखने वाली बात यह रहेगी क्या मोटा घाटा खाने के बाद एक बार फिर पीपुल्स प्रबंधन चुक चुके घोड़े पर दांव लगाने को तैयार होगा? इस संदर्भ में जब राकेश पाठक से बात की गई तो उन्‍होंने व्‍यस्‍तता की वजह से बात करने में असमर्थता जताई।

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