नईदुनिया : जगह और प्रिंट लाइन दोनों बदलेगी?

 

कभी हिंदी अखबारों का आदर्श रहा 'नईदुनिया' आज इस हाल मे है कि यहाँ काम कर रहे पत्रकारों और गेरपत्रकारों का भी अपने संस्थान पर से भरोसा उठ गया है. जब से नईदुनिया कि बागडोर जागरण के हाथ में आई है, इंदौर समेत सभी संस्करणों में असुरक्षा का माहौल है. कब किसकी नौकरी पर विराम लग जाये कहा नहीं जा सकता! सबसे गर्म खबर ये है कि 'नईदुनिया' का करीब पांच दशक पुराना दफ्तर बदले जाने कि तेयारी है. इसे करीब १२-१४ किलोमीटर दूर ले जाने की कोशिश चल रही है. जहां अभी नईदुनिया का दफ्तर है उस ४ बीघा जमीन पर शोपिंग माल बनाया जा सकता है. 
 
इसके साथ ही एक खबर ये भी हवा मे है कि 'नईदुनिया' ६ से १० प्रतिशत इन्क्रीमेंट किया जा रहा है, लेकिन एक ख़राब खबर ये भी है कि दिवाली के बाद फिर छंटनी होने वाली है. 'नईदुनिया' के पुराने मालिक विनय छजलानी का नाम भी प्रिंट लाइन से हटाये जाने कि चर्चा है, क्योंकि जिन कारणों से सौदे के बाद भी उनका नाम जा रहा था, वो औपचारिकता अब नहीं रही. यदि ऐसा होता है तो स्थानीय संपादक जयदीप कर्णिक और कारपोरेट रिलेशन ऑफिसर मनीष शर्मा पर खतरा मंडरा सकता है, क्योंकि विनय छजलानी के सबसे ख़ास माने जाते हैं. जयदीप कर्णिक तो प्रधान संपादक श्रवण गर्ग के आने के बाद से ही हाशिये पर हैं और मनीष शर्मा को भी वाइस प्रेसिडेंट (मार्केटिंग) से पदावनत कर दिया गया है. ऐसे हालत मे जयदीप फिर 'वेब दुनिया' मे जा सकते हैं. वैसे वे अभी भी वे 'वेब दुनिया' को अघोषित रूप से संभाल रहे हैं. 

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