नई दुनिया से केएन सिंह, अनूप भटनागर, संजय त्रिपाठी समेत चार लोग देंगे इस्‍तीफा

नईदुनिया, दिल्‍ली से खबर है कि चार लोगों को इस्‍तीफा देने का फरमान सुना दिया गया है. प्रबंधन इस कदर बौखलाहट में है कि उसे कुछ सूझ नहीं रहा है. प्रबंधन के इस फैसले से पत्रकारों पर क्‍या बितेगी उससे उसका कोई सरोकार नहीं है. शायद ऐसे ही नासमझ और असंवेदनशील मैनेजमेंट के चलते कंपनी इस हाल में पहुंची है. बताया जा रहा है कि डिप्‍टी आरई केएन सिंह, सीनियर लीगल रिपोर्टर अनूप भटनागर, सब एडिटर संजय त्रिपाठी एवं फोटोग्राफर एम यादव को इस्‍तीफा देने के लिए कहा गया है.

गंभीर बात यह है कि अनूप भटनागर किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं. उनके लिए नौकरी का होना बहुत जरूरी है, उसके बाद भी प्रबंधन बिल्‍कुल असंवेदनशील तरीके से इनसे इस्‍तीफा मांग लिया है. अनूप की गिनती दिल्‍ली के जाने माने पत्रकारों में होती है. वे इसके पहले भी कई संस्‍थानों को अपनी सेवाएं दे चुके हैं. पर प्रबंधन का यह रवैया अनूप के अलावा उनके शुभचिंतकों के लिए भी कचोटने वाला है.

वरिष्‍ठ पत्रकार केएन सिंह की गिनती राष्‍ट्रीय स्‍तर के पढ़ने-लिखने वाले पत्रकारों में की जाती है. इनसे किसी भी विषय पर कभी भी चर्चा की जा सकती है. केएन सिंह नईदुनिया ज्‍वाइन करने से पहले न्‍यूज चैनल हमार टीवी में चीफ कॉपी एडिटर और प्रोग्रामिंग हेड थे. केएन सिंह मुख्‍य धारा की पत्रकारिता में पिछले कई दशक से सक्रिय हैं. प्रिंट और इलेक्‍टॉनिक दोनों माध्‍यमों पर समान पकड़ रखने वाले नरेन्‍द्र सिंह प्रथम प्रवक्‍ता के फाउंडर एडिटर हैं. इंडिया न्‍यूज में वे कार्यकारी संपादक के रूप में भी वे लंबी पारी खेल चुके हैं. हिन्‍दी दैनिक राष्‍ट्रीय सहारा, अमर उजाला में वरिष्‍ठ पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं. केके बिड़ला फाउंडेशन फैलोशिप एवं आईआईई अमेरिकी फैलोशिप भी प्राप्‍त हो चुका है. इनकी एक किताब 'बिहार में निजी सेना का उदभव और विकास' छप चुकी है जबकि 'कवर स्‍टोरी' शीघ्र आने वाली है. नरेन्‍द्र सिंह मोतीलाल बोर और अर्जुन सिंह के मुख्‍यमंत्रित्‍व काल में उनके मीडिया सलाहकार भी रह चुके हैं.

संजय त्रिपाठी भी कई संस्‍थानों में काम कर चुके हैं. अब ये लोग इस्‍तीफा देने के बाद अपनी नई पारी कहां से शुरू करेंगे इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है, पर प्रबंधन के इस फैसले से अन्‍य सहकर्मी भी नाराज तथा टेंशन में हैं. हर कोई चिंतित है कि कहीं अगला नम्‍बर उसी का ना आ जाए. कुल मिलाकर नईदुनिया, दिल्‍ली के अंदर की स्थिति अत्‍यन्‍त ही तनावपूर्ण है. यहां काम करने वाले बाकी लोग अपने भविष्‍य के बारे में सोचकर परेशान हैं.

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