नकली नोटों के ‘छोकरे’ और ‘पतली भिंडी’

इलाहाबाद। पश्चिम बंगाल से इलाहाबाद समेत पूर्वांचल के कई जिलों में नकली नोटों का कारोबार करने वाले शातिर लोगों को एटीएस और शिवकुटी पुलिस ने पौने तीन लाख नकली नोटों के साथ तेलियरगंज के पास गोविंदपुर मोड़ के पास से दबोचा तो कई रहस्य प्याज की छिलके की तरह उतरते गए। पता चला कि देश की अर्थव्यवस्था को ध्वस्त करने वाले नकली नोटों के सौदागरों का तगड़ा नेटवर्क है। गिरोह में कई दर्जन सदस्य शामिल हैं। उन सदस्यों ने इलाहाबाद, जौनपुर, वाराणसी, प्रतापगढ़, कौशांबी, फतेहपुर, कानपुर, आदि जिले में तगड़ा कारोबार फैलाकर गहरी जड़ें जमा रखी हैं।

गिरोह होशियारी के साथ विभिन्न तरीके से आसपास के बाजारों में नकली नोटों को खपाने का काम करता है। इनके मजबूत नेटवर्क के चक्रव्यूह को ध्वस्त करना आसान नही है। तगड़ी मेहनत की जरूरत है। कोलकाता के मालदा जिले का दीपक मंडल और इलाहाबाद के नवाबगंज थाना क्षेत्र के दुर्गा शुक्ल व पवन शुक्ला तो छोटी मछली हैं। बड़ी मछलियां, खासकर धंधे के ‘आकाओं’ को जब तक नहीं दबोचा जाता तब तक अपराध के महासमुद्र में ना जाने कितने पवन और दीपक बतौर मछली के चारा की तरह यूज होते ही रहेंगे। इसलिए इनको भी दबोचना पुलिस के लिए असली चुनौती है।

इलाहाबाद के शहरी इलाके के अलावा देहाती इलाके यमुनापार और गंगापार के विभिन्न अड्डों पर नकली नोट चलाने वाले लोग बतौर एजेंट जुड़े हैं। बदले में इनको मोटा कमीशन मिलता है। कोडवर्ड में इनको ‘छोकरे’ व ‘पतली भिंडी’ के नाम से जाना जाता है। वे इसे देहात इलाके के पेट्रोलपंप, भांग-दारू के ठेके आदि पर आसानी से चलाने का काम किया करते हैं। इसके अलावा जुए के अड्डों पर भी नकली नोट खपाने का कार्य होता है।

खास बात यह है कि समय-समय पर यमुनापार के मेजा, कोरांव, बारा, गंगापार के हंडिया, झूंसी, नवाबगंज, टाउन एरिया लालगोपालगंज में नकली नोटों के खपाए जाने की सूचना सार्वजनिक होती रही है पर लोकल पुलिस ने कभी गंभीरता से ध्यान ही नहीं दिया। जानकारों का मानना है कि स्थानीय पुलिस अगर थोड़ा भी सचेत होकर कार्य करती तो देश की आर्थिक व्यवस्था को खोखला करने वाले ये नकली नोटों के सौदागर शायद काफी पहले ही हत्थे चढ़ गए होते।

बैंकों की भी तरफ घूम रही शक की सुई

बैंक में नकली नोटों का खपाना आसान नहीं होता। वहां तो ट्रेंड कर्मचारी होते हैं। ऐसे में अगर कुछ बैंकों में धड़ाधड़ नोटों को जमा किया गया तो शक की सुई बैंक की तरफ भी घूम रही है। सवाल उठता है कि क्या बैंक में भी जाल बट्टा करने वाले कुछ संदिग्ध कर्मचारी हैं जो इस अवैध धंधे में लिप्त हैं।

इलाहाबाद से शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट
 

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