‘नये मीडिया’ के सशक्तिकरण का लाभ सम्पूर्ण मीडिया और समाज को मिले

: मैपकास्ट में विज्ञान और नये मीडिया पर केन्द्रित दो दिवसीय मीडिया चौपाल सम्पन्न : भोपाल। मीडिया चौपाल में आये हिंदी भाषी क्षेत्रों के ब्लोगर्स, पत्रकार व सोशल मीडिया के विशेषज्ञों ने नये मीडिया के बढ़ते प्रभाव को अवसर मानते हुए कहा की पारंपरिक मीडिया की तरह इसके लिए भी चुनौतियां बढ़ गई हैं. मीडिया चौपाल के प्रतिभागियों ने नये मीडिया खासकर वेब मीडिया के लिए स्व-नियमन और आर्थिक माडल की बात भी उठाई. तेजी से बढ़ रहे वेबमीडिया को एक सकारात्मक दिशा दी जा सके इस बात पर भी काफी चर्चा की गई. वेब मीडिया के अधिकांश संचारकों ने इस बात की आशंका व्यक्त की कि अगर स्व-नियमन का प्रयास नहीं हुआ तो सरकार आपत्तिजनक भाषा और सामग्री की आड़ में नये मीडिया पर नियंत्रण की कोशिश कर सकती है. इस दिशा में सरकार का दुराग्रहपूर्ण रवैया शुरू हो चुका है.

मीडिया चौपाल में देशभर से करीब १५० सोशल मीडिया और विज्ञान से जुड़े लोगों ने भागीदारी निभाई. मीडिया चौपाल में काफी कुछ नए मीडिया को लेकर बात हुई. विज्ञान को कैसे नए मीडिया में बेहतर तरीके से जगह मिले. सरल और रुचिकर तरीके से विज्ञान को लोगों के बीच ले जाने में सोशल मीडिया अहम भूमिका निभा सकती है. दरअसल सोशल मीडिया के पहुँच जन-जन तक है. यह सबसे ताज मीडिया है. सोशल मीडिया परस्पर संवाद का माध्यम है. लोगों को विज्ञान के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी मिल सके इस बात को लेकर ब्लॉगरों, सोशल मीडिया के संचालकों और विज्ञान विशेषज्ञों ने काफी मंथन किया. इसके लिये वैज्ञानिकों को सोशल मीडिया के पत्रकारों के बीच आपसी सामंजस्य होने और पत्रकारों के प्रशिक्षण की बात भी सामने आई. इस पूरे आयोजन को कराने का जिम्मा पिछले साल की तरह इस साल भी मध्यप्रदेश के विज्ञान तकनीकी परिषद (MPCOST) ने ले रखा था। इस आयोजन में शोध और जागरूकता के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था स्पंदन ने भी अहम भूमिका निभाई. भोपाल मे आयोजित मीडिया चौपाल मे वेबसाइट के साथ ही ब्लोग्स, फेसबुक और ट्विटर की दुनिया को लेकर भी चर्चा हुई.

मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद और स्पंदन संस्था की ओर से आयोजित दो दिवसीय मीडिया चौपाल में विज्ञान और मीडिया से जुड़े अनेक पहलुओं पर विशेषज्ञों ने चर्चा की। इस चौपाल में देशभर से करीब १५० ब्लोगेर्स, पत्रकार व सोशल मीडिया के विशेषज्ञ और विज्ञान लेखकों ने भागीदारी की. कार्यक्रम में माखनलाल राष्ट्रीय पत्रकारिता विवि के कुलपति बीके कुठियाला, प्रोधोगिकी परिषद् के महानिदेशक प्रो प्रमोद कुमार वर्मा ने इस तरह के कार्यक्रम को जन-जन तक पहुचाने की जरूरत पर बल दिया। मीडिया चौपाल में पांच तकनीकी सत्रों ने नया मीडिया, नई चुनौतिया, सहित अनेक पक्षों पर चर्चा हुई. पहले दिन सोशल मीडिया और नयी चुनोतियाँ विषय पर वेबदुनिया के संपादक जयदीप कर्णिक ने विस्तार से अपनी बात रखी. उन्होंने बताया की सोशल मीडिया की प्रमाणिकता पर ध्यान देने की जरूरत है.

अभी हो यह रहा है की हम फैक्ट के जांच किये बिना जल्दबाजी में फेसबुक, ट्विटर और ब्लॉग पर अपलोड कर देते हैं, ऐसे में कई बार भ्रामक और असत्य जानकारी हम लोगों तक पहुंचा देते हैं. कई बार यह बेहद गंभीर स्थिति निर्मित कर देते हैं. इसलिए सोशल मीडिया की प्रमाणिकता और विश्वशनीयता बनाये रखने पर जोर देना होगा. इसके लिये कंटेंट के लेबल पर काम करने की काफी जरूरत है. इसके बाद दुसरे सत्र को वरिष्ठ वैज्ञानिक और मध्यप्रदेश शासन के वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. प्रमोद के वर्मा ने प्रजेंटेसन के माध्यम से बताया की किस तरह सोशल मीडिया समाज में वैज्ञानिक चेतना और जागरूकता लाने में मदद कर सकता है. भारत सरकार के वरिष्ठ वैज्ञानिक मनोज पटेरिया ने कहा कि यदि भारत को तरक्की के रास्ते पर तेजी से ले जाना है तो यहाँ के समाज में भी विज्ञान के प्रति नजरिया डेवलप करना होगा. मध्यप्रदेश एकता समिति के उपाध्यक्ष रमेश शर्मा ने इसी सत्र में बताया कि भारत में विज्ञान कि कितनी महँ पारम्पर रही है, उसे ही फिर से लाने कि जरूरत है.

दूसरे दिन का पहला सत्र आपदा प्रबंधन और न्यू मीडिया पर केन्द्रित था। इस सत्र में विज्ञान प्रसार नई दिल्ली के पूर्व निदेशक डा. सुबोध मोहंती ने आपद प्रबंधन पर विचार रखे और बताया कि आपदा में सोशल मीडिया किस तरह शासन की और समाज की मदद कर सकता है. वहीं, दूसरे चर्चा सत्र में भारतीय जन संचार संस्थान के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष प्रो हेमंत जोशी ने न्यू मीडिया के परिप्रेक्ष्य में जन माध्यमों का अंतर्संबंध विषय पर विचार व्यक्त किए। लेखिका एवं शोधार्थी कायनात काजी ने सूचना प्रौद्योगिकी और हिन्दी साहित्य विषय पर व्याख्यान दिया। भड़ास के यशवंत सिंह ने नया मीडिया से दस हजार से एक लाख रुपये तक कमाने के नुस्खे का जिक्र किया ।

अनिल सौमित्र ने मीडिया चौपाल  की भूमिका रखी. उन्होंने कहा  कि यह सब प्रयास इसलिए हो रहा है ताकि वेब मीडिया के संचारकों की क्षमता वृधि हो और वे सशक्त हो, साथ ही इसका लाभ मीडिया के अन्य क्षेत्र के लोगों को भी मिले. इससे समाज के विकास और सशक्तिकरण में भी नए मीडिया कि भूमिक स्पष्ट हो सके. इस दौरान के सहभागियों ने अपने सुझाव भी साझा किये. मीडिया चौपाल को संस्थागत स्वरुप प्रदान किया जाये, इसका एक संगठनात्मक ढांचा बनाने की दिशा में कुछ किया जाना चाहिए. हिंदी वेबसाइटों के रेवेन्यु माडल पर भी विचार किया जाये, इसके अलावा समिति गठित कर केंद्र और राज्य को वेबसाइटों के लिए विज्ञापन नीति बनाने को लेकर सरकार तक बात पहुचाने के सुझाव दिए गए। इस दौरान वेबसाइटों के स्वनियमन और वेब मीडिया के पत्रकारों सुरक्षा को लेकर भी कई सुझाव आये।

कार्यक्रम के समापन सत्र में मप्र शासन के वैज्ञानिक सलाहकार एवं परिषद के महानिदेशक प्रो. प्रमोद के वर्मा ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। परिषद के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं जनसंपर्क प्रभारी डॉ. धीरेन्द्र पाण्डेय ने विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन संस्था स्पंदन के अनिल सौमित्र ने किया। विभिन्न सत्रों कि कार्वाहियों को मैपकोस्ट के वरिष्ठ वैज्ञानिक डीके पाण्डेय ने प्रस्तुत किया. मीडिया चौपाल में माखनलाल राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के प्रो. पुष्पेन्द्र पाल, प्रो. संजय द्वेदी, मोनिका वर्मा, लाल बहादुर ओझा, सुरेन्द्र पाल, वरिष्ठ पत्रकार गिरीश उपाध्याय, द बिजनेस स्टैंडर्ड के मध्यप्रदेश प्रभारी शशिकांत त्रिवेदी, द वीक के दीपक तिवारी, वेब पत्रकार हर्ष सुहालका, जय शर्मा केतकी, स्तंभ लेखक गोपाल कृष्ण छिब्बर, मुक्ता पाठक, शैफाली पाण्डेय, वरिष्ठ पत्रकार सुचान्दना गुप्ता, हरिअग्र हरी, सरमन नगेले सहित कई पत्रकार मौजूद रहे.

प्रेस विज्ञप्ति


कुछ तस्वीरें (मीडिया चौपाल-2013)

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