नहीं टूटा भड़ास के यशवंत का मनोबल, यूज होने से बचने की जरुरत

भड़ास के संपादक यशवंत आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं और साथ ही जिस तरह से उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में अपना धैर्य बनाये रखा और मनोबल को टूटने नहीं दिया, यह न केवल यशवंत की पूंजी है और साथ ही कई उन लोगों के लिए सन्देश है जो संघर्ष का रास्ता अख्तियार करते हैं. एक समय मुझे भी लगा था कि भड़ास के दिन अब पूरे हुए लेकिन अब लगता है कि भड़ास कि टीआरपी तो बढ़ी ही, साथ ही यशवंत तप कर सोना हो गए.

मैंने बहुत कम ही लोगों को देखा है, खास कर के मीडिया की लाइन में जो परिस्थितियों से समझौता न करते हों. कई लोग ऐसे हैं जो अपनी जगह को बनाये रखने के लिए नीचता की हद को भी पार कर जाते हैं लेकिन यशवंत ने यह जता दिया कि व्यक्ति का लक्ष्य साफ़ हो तो उसके अंदर कोई ताकत अपने आप आ जाती ही है. बस अब दुआ यही है कि यशवंत जिस कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं उसको कायम रखें और इस बात का ख्याल जरूर रखें कि उनको मोहरा कोई न बना पाए.

कई बार लोग अपना मतलब साधने के लिए भी भड़ास का दुरूपयोग करते हैं और सही आदमी भी बेइज्जत हो जाता है. दूसरे लोगों की भी बात आनी चाहिए और अगर केवल बदनाम करने के लिए ही कोई सवाल उठाया गया हो तो उससे बचना भी चाहिए. खैर पोर्टल यशवंत का है, जैसे चाहें चलायें लेकिन मुझे सुकून इस बात का है कि कुछ लोग अभी भी संघर्ष करने वाले और सही बात कहने का माद्दा रखने वाले इस देश में जिन्दा हैं.

राजीव श्रीवास्तव की टिप्पणी. आपकीखबर डॉट कॉम में प्रकाशित. राजीव से संपर्क rajiv.reporter.lko@gmail.com के जरिए किया जा सकता है.


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