नागपुर। समय : रविवार रात एक बजे. स्थान- कामठी कंटोन्मेंट. पुलिस की नाकाबंदी जारी थी. इसकी आड़ में वाहन चालकों को पुलिस की गुंडागर्दी का सामना करना पड़ रहा था. कई लोग बेवजह पीटे गए. लोकमत समाचार के पत्रकार आशीष दुबे भी इसका शिकार हुए. रात को कार्यालय से घर लौटते समय यह वाकया हुआ. चर्च के पास नाकाबंदी के लिए पुलिस निरीक्षक दीपक डेकाटे समेत 7 पुलिस जवान तैनात थे. बेरिकेड के पास पहुंचते ही जवान ने गाड़ी रोकने को कहा.
वहां पहले से ही एक ऑटो, एक मारुति वैन तथा कुछ दुपहिया वाहन खडे़ थे. लिहाजा, गाड़ी कुछ दूरी पर रोकी. इतने में चार पुलिस जवान वहां पहुंचे. कुछ पूछने के पहले गालियां देनी शुरू कर दी. साथ ही अभद्र व्यवहार किया. इसका विरोध करने पर एक जवान ने लाठी तान दी. कहा, जा साहब से बात कर. दुपहिया वाहन पर बैठे पुलिस निरीक्षक दीपक डेकाटे ने सुनते हुए अपने पास बुलाया. कुछ पूछे बिना ही पहले तमाचे जडे़. फिर लाठियां बरसानी शुरू कर दी. मारपीट की घटना में आशीष को आंख, कान और चेहरे पर अंदरूनी चोटें आई हैं. इस दौरान लाठी की मार से हाथ पर भी चोटें आईं. अचानक शुरू हुई मारपीट का विरोध करने पर पुलिस निरीक्षक ने कांस्टेबल को गाड़ी नंबर नोट कर पत्रकार के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया. फिर जेल में डालने की बात कही.
आशीष ने तुरंत फोन पर घटना की जानकारी अपने संपादक को दी. घटना के तुरंत बाद कामठी स्थित उपजिला अस्पताल पहुंचकर मेडिकल जांच कराई. फिर पुलिस थाने पहुंचे. वहां ग्रामीण पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार शर्मा मौजूद थे. अपने खिलाफ कार्रवाई की आशंका को देखते हुए पीआई डेकाटे पहले ही वहां पहुंचकर सफाई देने लगे. डॉ. शर्मा को घटना की पूरी जानकारी देते हुए दुबे ने पुलिस निरीक्षक डेकाटे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए लिखित शिकायत दर्ज कराई है. साथ ही उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की गई है. जिस पर एसपी, मनोज शर्मा ने पीआई पर एक हजार रुपये से दंडित किया व वहां से ट्रांसफर दूसरी जगह कर दिया, लेकिन नागपुर पत्रकार संघ ने इस घटना की तीव्र निषेध करते हुए पीआई को सस्पेंड करने की मांग की है. पत्रकारों के साथ पुलिस अगर ऐसा सलूक करते हैं तो आम आदमी के साथ उसका व्यवहार कैसा होगा यह सोचने वाली बात है.





