नार्को टेस्ट में बैंक मैनेजर बोला- रमन सिंह और उनके तीन मंत्रियों को एक एक करोड़ रुपये घूस दिए

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह और उनके चार मंत्रियों पर रिश्वत लेने के सनसनीखेज आरोप लगे हैं. विधानसभा चुनाव के लिए कमर कस रही कांग्रेस ने एक सीडी जारी कर यह आरोप लगाए हैं. यह मामला एक दिवालिया हो चुके बैंक का है. इस बैंक के मैनेजर की गिरफ्तारी के बाद उसके कथित नार्को टेस्ट की सीडी जारी की गई है.

इस टेस्ट में बैंक मैनेजर उमेश सिन्हा ने बयान दिया है कि इंदिरा बैंक घोटाला उजागर होने के बाद मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह और उनके चार मंत्रियों को एक-एक करोड़ रुपए की रिश्वत दी गई. कांग्रेस का यह भी आरोप है कि पीसीसी अध्यक्ष नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल इसका खुलासा करने वाले थे. इसलिए राज्य सरकार ने साजिश करके उन्हें दरभा की जीरमघाटी में मरवा दिया.

उधर, राज्य सरकार में मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने इन आरोपों को बकवास बताया है. पुलिस महानिदेशक जीपी सिंह ने भी इस मामले को फर्जी करार दिया है. उन्होंने सीडी की सत्यता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. उन्होंने कहा कि उनकी जांच रिपोर्ट में कथित नार्को टेस्ट का कहीं जिक्र नहीं है. उन्होंने यह भी बताया कि नार्को करने वाली महिला को बर्खास्त किया जा चुका है. यह मामला रायपुर के इंदिरा प्रियदर्शिनी महिला नागरिक सहकारी बैंक से संबंधित है. इसमें साल 2006 में 54 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ था. छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री और कार्यक्रम समन्वयक भूपेश बघेल ने शनिवार को एक प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि नार्को टेस्ट में मैनेजर ने बयान दिया है कि घोटाला उजागर होने के बाद मुख्यमंत्री रमन सिंह को एक करोड़ रुपए दिए गए थे.

घोटाले पर कार्रवाई रोकने के लिए चार वरिष्ठ मंत्रियों बृजमोहन अग्रवाल, अमर अग्रवाल, राजेश मूणत, रामविचार नेताम के अलावा तत्कालीन डीजीपी ओपी राठौड़ को एक-एक करोड़ रुपए बतौर रिश्वत दिए गए. भूपेश बघेल का दावा है कि नक्सली हमले में मारे गए कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल के बेटे दिनेश पटेल ने एक एसएमएस के जरिए कहा था कि वह सरकार के खिलाफ ऐसा भंडाफोड़ करने वाले हैं जिससे राज्य सरकार गिर जाएगी. वह इसी सीडी की बात कर रहे थे.

उन्होंने आरोप लगाया कि इसी वजह से नंदकुमार और उनके बेटे दिनेश पटेल की हत्या करवा दी गई. कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी के मुताबिक, नक्सली हमले में मारे कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नंद कुमार पटेल के पुत्र स्व. दिनेश पटेल की ओर से 23 मई को उन्हें एक एसएमएस भेजा था कि 15 जून को बड़ा खुलासा होगा. लेकिन 25 मई को जीरम घाटी में नक्सली हमले में उनकी मौत हो गई. वर्ष 2003 से पहली अगस्त 2006 तक इंदिरा सहकारी बैंक के 25716 खातेदारों की 54,38,45,333.27 रुपए की जमा राशि का गबन किया गया. इसके फलस्वरूप दो अगस्त को बैंक का बैंकिंग कारोबार बंद हो गया.

रिजर्व बैंक की ओर से सहकारी बैंक का लाइसेंस निरस्त कर दिया. बैंक के निदेशक मंडल एवं कर्मचारियों ने आपराधिक षड़यंत्र रचकर गबन किया जिसमें फाल्स एफडीआर, डीडी एवं पे-आर्डर जारी करना तथा विभिन्न बैंकों में राशि को आहरण कर उसे इस बैंक की लेखा पुस्तकों में आमद न लेना एवं फाल्स दस्तावेजों के आधार पर ऋण वितरण किया जाना शामिल है. प्रकरण की प्राथमिकी पुलिस थाना सिटी कोतवाली रायपुर में नौ जनवरी 2007 को दर्ज कराई गई थी. त्रिवेदी ने कहा है कि उनके पास इस बात के प्रमाण मौजूद है कि जांचकर्ताओं ने इस मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी लेकिन सरकार ने इसे दबा दिया. पुलिस जांच में अभी तक गबन की राशि बरामद नहीं हो पाई है जिसके कारण खातेदारों की जमा रकम वापस करने की विवशता बैंक के सामने है. कांग्रेस ने धांधली के कारण दिवालिया हो चुके इंदिरा प्रियदर्शिनी बैंक के मैनेजर के कथित नार्को टेस्ट की सीडी जारी की सूबे के मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने खारिज किए आरोप, पुलिस महानिदेशक जीपी सिंह ने भी मामले को फर्जी बताया.

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में बैंक मैनजेर की नार्को टेस्ट की सीडी ने राज्य की बीजेपी सरकार को कटघरे मे ला खड़ा किया है. इस सीडी मे बैंक मैनेजर ने कहा है कि उसने राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह समेत उनके मंत्रिमंडल के चार मंत्रियों और डीजीपी को एक-एक करोड़ रुपये दिए. इस मैनेजर का अदालत के निर्देश पर नार्को टेस्ट तो हुआ लेकिन वो सीडी अदालत मे जमा नही कराई गई. कांग्रेस ने यह सीडी जारी कर राज्य की बीजेपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. 2007 में छत्तीसगढ़ का सहकारी सेक्टर का सबसे बड़ा इंदिरा प्रियदर्शनी बैंक करोड़ों के घोटाले के बाद डूब गया था. नार्कों टेस्ट के दौरान अपना बयान देने वाला शख्स रायपुर के इंदिरा प्रियदर्शनी बैंक का जनरल मेनेजर उमेश सिन्हा है.

इंदिरा प्रियदर्शनी बैंक छत्तीसगढ़ का सहकारी क्षेत्र का सबसे बड़ा और भरोसेमंद बैंक था. राज्य भर में इसके तीस हजार से जायदा ग्राहक थे. खास बात यह थी की इस बैंक के संचालक मंडल में कांग्रेस के नेताओं की पत्नियां और महिला नेता शामिल थीं. ये तमाम महिलाएं ही बैंक का संचालन करती थीं. 2007 में 40 करोड़ का घोटाला उजागर होने पर यह बैंक डूब गया. प्रारभिक जांच पर पता चला की बैंक के मैनेजर समेत संचालक मंडल ने करोड़ों रुपये का गबन किया है और फर्जी ऋण बांट कर आम ग्राहकों की रकम डकार ली. पुलिस ने धोखाधड़ी और अमानत में खयानत का मामला दर्ज कर इस घोटाले के लिये 13 लोगों के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया था.


नारको टेस्ट वीडियो देखने के लिए नीचे हेडिंग या तस्वीर पर क्लिक करें…

बैंक मैनेजर उमेश सिन्हा का नारको टेस्ट वीडियो


उधर बीजेपी सरकार इस सीडी को फर्जी बता रही है. राज्य सरकार के प्रवक्ता और राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने संवाददाता सम्मेलन कर इस सीडी की सच्चाई पर सवाल खड़ा कर दिया और कहा कि यह कांग्रेस की पुरानी आदत है कि वह असत्य बातों को सीडी के माध्यम से लाकर सत्य बताने का प्रयास करती है. फिलहाल इस सीडी को लेकर मचे घमासान से राज्य का राजनीतिक गलियारा गर्म है.

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